Latest Updates
-
रणदीप हुड्डा बने पापा, लिन लैशराम ने बेटी को दिया जन्म, इंस्टाग्राम पर शेयर की क्यूट फोटो -
Kalashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है कालाष्टमी का व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
गर्मियों में वजन घटाने के लिए पिएं ये 5 ड्रिंक्स, कुछ ही दिनों में लटकती तोंद हो जाएगी अंदर -
Mangalwar Vrat: पहली बार रखने जा रहे हैं मंगलवार का व्रत तो जान लें ये जरूरी नियम और पूजा विधि -
Sheetala Saptami Vrat Katha: शीतला सप्तमी के दिन जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, मिलेगा आरोग्य का आशीर्वाद -
Sheetala Saptami 2026: कब है शीतला सप्तमी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Sheetala Saptami 2026 Wishes: मां शीतला का आशीर्वाद...इन संदेशों के साथ अपनों को दें शीतला सप्तमी की शुभकामना -
मंगलवार को कर लें माचिस की तीली का ये गुप्त टोटका, बजरंगबली दूर करेंगे हर बाधा -
लंच में बनाएं उत्तर प्रदेश की चना दाल कढ़ी, उंगलिया चाटते रह जाएंगे घरवाले -
Gangaur Ke Geet: 'आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै'...इन मधुर गीतों के बिना अधूरी है गौरा पूजा, यहां पढ़ें पूरे लिरिक्स
कौन हैं नेपाल की जीवित कन्या? जिसका रोना माना जाता है अभिशाप, राजा से लेकर राष्ट्रपति तक करते हैं पूजा!
नेपाल की धरती अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इन्हीं परंपराओं में से एक है कुमारी देवी की प्रथा। यह परंपरा सदियों पुरानी है और माना जाता है कि इसकी शुरुआत मल्ल वंश के समय हुई थी। आज भी नेपाल में विशेष रूप से काठमांडू की नेवारी संस्कृति में एक छोटी बच्ची को देवी तलेजु (दुर्गा का रूप) का जीवित अवतार मानकर पूजा जाता है।
हाल ही में नेपाल में हुए हिंसक प्रदर्शनों और आगजनी के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि काठमांडू की कुमारी देवी ने पहले ही अनिष्ट का संकेत दिया था। एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि इंद्र जात्रा महोत्सव के दौरान कुमारी भावुक दिखीं, जिसे लोग अशुभ संकेत मान रहे हैं। यही कारण है कि एक बार फिर नेपाल की इस रहस्यमयी परंपरा पर दुनिया का ध्यान गया है।

कौन होती है कुमारी देवी?
नेपाल में कुमारी देवी किसी मूर्ति या तस्वीर का रूप नहीं होतीं, बल्कि एक जीवित कन्या होती हैं। मान्यता है कि देवी दुर्गा या तलेजु भवानी की आत्मा उस बच्ची में निवास करती है। इसलिए कुमारी को देवी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। काठमांडू की रॉयल कुमारी सबसे प्रसिद्ध हैं, जो दरबार स्क्वायर के पास बने कुमारी घर में रहती हैं।
कुमारी चुनने की कठोर प्रक्रिया
कुमारी देवी का चयन साधारण नहीं होता। इसके लिए कई धार्मिक और शारीरिक मानदंड तय हैं।
उम्र और स्वास्थ्य - बच्ची की उम्र 3 से 7 साल के बीच होनी चाहिए। वह पूरी तरह स्वस्थ और किसी शारीरिक विकार से मुक्त होनी चाहिए।
32 लक्षणों की परीक्षा - इसे "बत्तीस लक्षण" कहा जाता है। इसमें मजबूत शरीर, शंख जैसी गर्दन, गाय जैसी पलके, शेर जैसी छाती, मधुर आवाज और बिना टूटे दूध के दांत होना शामिल है।
ज्योतिषीय मिलान - बच्ची की जन्मकुंडली देवी तलेजु के अनुकूल होनी चाहिए।
साहस की परीक्षा - सबसे कठिन चरण वह होता है, जब बच्ची को कालरात्रि पर तलेजु मंदिर ले जाया जाता है। वहां 108 भैंसों और बकरों की बलि दी जाती है और लोग डरावने मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं। बच्ची को इस भयावह माहौल में बिना डरे रहना होता है। माना जाता है कि जिस बच्ची में डर नहीं होता, वही देवी का स्वरूप बन सकती है।
कुमारी का जीवन
- कुमारी चुने जाने के बाद बच्ची अपने परिवार से अलग होकर कुमारी घर में रहने लगती है।
- उसे जमीन पर पैर रखने की अनुमति नहीं होती, क्योंकि वह स्वयं देवी मानी जाती है और जमीन देवताओं का प्रतीक।
- कुमारी केवल साल में कुछ ही बार बाहर निकलती है और तब भी पालकी में ले जाई जाती है।
- उसकी शिक्षा-दीक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी राज्य और मंदिर प्रशासन की होती है।
- पूजा के समय वह कुछ नहीं बोलती, बल्कि उसके भाव, आंखें और हाथों की मुद्राएं ही देवी का संदेश मानी जाती हैं।
मान्यताएं और संकेत
- भक्त मानते हैं कि कुमारी के भाव भविष्य की झलक दिखा सकते हैं।
- यदि कुमारी रो दें तो अनहोनी का संकेत होता है।
- यदि मुस्कुरा दें तो समृद्धि का।
- और यदि शांत रहें तो आशीर्वाद का।
जीवन की कठिनाइयां
कुमारी देवी का स्थान पूजनीय जरूर है, लेकिन जीवन आसान नहीं। वे अन्य बच्चों की तरह खेल-कूद नहीं सकतीं और हर कदम परंपराओं और नियमों से बंधा होता है। छोटी उम्र में भी उन्हें अनुशासित जीवन जीना पड़ता है। यह जिम्मेदारी मानसिक और सामाजिक दोनों ही स्तर पर भारी होती है।
देवी का वास कब समाप्त होता है?
जैसे ही कुमारी को पहली बार मासिक धर्म होता है, माना जाता है कि देवी का वास उनके शरीर से निकल गया है। इसके बाद बच्ची को परिवार के पास लौटा दिया जाता है और वह सामान्य जीवन जीने लगती है। नेपाल सरकार या संबंधित संस्था की ओर से उसे सम्मान स्वरूप पेंशन दी जाती है। फिर एक नई कुमारी की खोज शुरू होती है।



Click it and Unblock the Notifications











