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अलर्ट! मई से जुलाई के बीच सक्रिय होगा विनाशकारी 'सुपर अलनीनो', IMD ने बताया क्यों डरा रहा है आने वाला समय
El Niño Effect in India 2026: मई के महीने में ही गर्मी का प्रचंड रूप लोगों को डरा रहा है। इसके अलावा सुपर अलनीनो ने लोगों के डर को बढ़ा दिया है। भारत समेत पूरी दुनिया के लिए आने वाले महीने मौसम के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस बार सामान्य अलनीनो नहीं, बल्कि 'सुपर अलनीनो' विकसित होने की प्रबल संभावना बन रही है। अमेरिका की मौसम एजेंसी NOAA और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) दोनों ने संकेत दिए हैं कि 2026 के अंत तक समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर मानसून, गर्मी और वैश्विक मौसम प्रणाली पर पड़ेगा। अनुमान है कि मई से जुलाई 2026 के बीच अलनीनो सक्रिय हो सकता है और इसका प्रभाव फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। इसके चलते भारत में भीषण गर्मी, सामान्य से कम बारिश, सूखे जैसी स्थिति और कई इलाकों में बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह सुपर अलनीनो मजबूत हुआ, तो यह पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ सकता है। ऐसे में लोगों को अभी से गर्मी और मौसम संबंधी जोखिमों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

क्या है अलनीनो और क्यों बढ़ती है चिंता?
अलनीनो ENSO (El Niño Southern Oscillation) जलवायु चक्र का गर्म चरण होता है। इसमें प्रशांत महासागर के सतही पानी का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। भारत में इसका सबसे बड़ा प्रभाव मानसून पर देखने को मिलता है। अलनीनो मजबूत होने पर अक्सर मानसून कमजोर पड़ जाता है और बारिश कम होती है।
IMD ने मानसून को लेकर जताई चिंता
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक 2026 में मानसून केरल में सामान्य से पहले पहुंच सकता है, लेकिन पूरे सीजन में बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका जताई गई है। IMD के अप्रैल 2026 के पूर्वानुमान के अनुसार इस साल मानसून दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 92% रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अलनीनो मानसून के मुख्य महीनों में मजबूत हुआ, तो खेती और जल संसाधनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
NOAA का नया अनुमान क्यों डराने वाला है?
NOAA के जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने हालिया रिपोर्ट में बताया कि अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच सुपर अलनीनो बनने की संभावना लगभग 65% तक पहुंच गई है। वहीं मई से जुलाई के बीच इसके सक्रिय होने की संभावना 82% बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार समुद्र की सतह का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिसे बेहद शक्तिशाली स्थिति माना जाता है।
सुपर अलनीनो से क्या-क्या हो सकता है असर?
कई राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी
मानसून कमजोर पड़ने की आशंका
सूखा और जल संकट बढ़ सकता है
फसलों और कृषि उत्पादन पर असर
कुछ क्षेत्रों में बाढ़ और अत्यधिक बारिश
बिजली की मांग और हीटवेव का खतरा बढ़ेगा

2023-24 भी बना था रिकॉर्ड गर्म
विशेषज्ञों के अनुसार 2023-24 का अलनीनो भी दुनिया के सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहा था। अब यदि 2026-27 का सुपर अलनीनो अधिक शक्तिशाली साबित होता है, तो 2027 वैश्विक तापमान के नए रिकॉर्ड बना सकता है।
लोगों को किन बातों का रखना होगा ध्यान?
दोपहर में तेज धूप से बचें
पर्याप्त मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट लें
हल्का और तरल भोजन करें
हीटवेव अलर्ट पर नजर रखें
बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें
गर्मी के दिनों में अनावश्यक यात्रा से बचें
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
बच्चे और बुजुर्ग
गर्भवती महिलाएं
हार्ट और बीपी के मरीज
बाहर काम करने वाले लोग
डिहाइड्रेशन की समस्या से जूझ रहे लोग
हीटवेव के दौरान दिखें ये लक्षण तो तुरंत सतर्क हो जाएं
भीषण गर्मी से बचने के लिए इन चीजों का करें सेवन
नारियल पानी
छाछ और लस्सी
बेल का शरबत
नींबू पानी
खीरा, तरबूज और खरबूजा
मौसमी फल और हल्का भोजन
भीषण गर्मी से बचने के लिएइन चीजों से करें परहेज
ज्यादा तला-भुना खाना
बहुत मसालेदार भोजन
कैफीन और ज्यादा चाय-कॉफी
शराब और सॉफ्ट ड्रिंक्स
बाहर का बासी भोजन
शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए बेस्ट ड्रिंक्स
147 साल पहले अलनीनो ने ली थी 5 करोड़ लोगों की जान, क्या इतिहास दोहराएगा?
वैज्ञानिकों ने इतिहास के सबसे खतरनाक अलनीनो में से एक 1877 के सुपर अलनीनो का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी है कि आने वाला मौसम चक्र बेहद विनाशकारी साबित हो सकता है। वर्ष 1876 से 1878 के बीच आए शक्तिशाली अलनीनो ने दुनिया के कई हिस्सों में भीषण सूखा, फसल बर्बादी और भयानक अकाल पैदा कर दिया था। ऐतिहासिक रिपोर्ट्स के अनुसार उस जलवायु आपदा में करीब 5 करोड़ लोगों की जान चली गई थी। इसे आज भी मानव इतिहास की सबसे भयावह प्राकृतिक त्रासदियों में गिना जाता है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बार सुपर अलनीनो अत्यधिक मजबूत हुआ, तो दुनिया को रिकॉर्ड गर्मी, कमजोर मानसून, खाद्य संकट और चरम मौसम की घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है।



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