Latest Updates
-
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख -
कौन हैं 'हनुमान अंश' की 21 साल की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर? विदेश की नौकरी छोड़ बनाई ब्लॉकबस्टर फिल्म
Kasuri methi: कभी घोड़ों का चारा हुआ करती थी, अब इसके स्वाद का पूरी दुनिया में बजता है डंका
The Origin of Kasuri Methi : खाने को जायकेदार और खुश्बूदार बनाने के लिए तकरीबन हर घर में कसूरी मेथी का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी खास तरह की खुशबू ही हर तरह की सब्जी का जायका बदल देती है। यही वजह है कि नागौर में उगने वाली यह हरी सूखी पत्तियां आज देश ही नहीं विदेशों में भी खाने के शौकीनों को मुरीद कर चुकी है। आइए जानते हैं कसूरी मेथी का इतिहास।
पाकिस्तान आई कसूरी मेथी
कसूरी शब्द पाकिस्तान के कसूर प्रांत से आया है, जहां इसकी खेती की जाती है। शेफ कुणाल ने बताया कि कसूरी मेथी का नाम पाकिस्तान के कसूर से आया है, जहां मूल रूप से इसकी खेती की जाती है। कसूर में इस मेथी की खेती होने की वजह से ही इसका नाम कसूरी मेथी पड़ा।

देश में एकमात्र नागौर में ही होती है खेती
देश में सिर्फ नागौर में ही कसूरी नाम से फेमस मेथी की खेती की जाती है। कुछ दूसरी जगहों पर भी इसकी खेती होती है, लेकिन ऐसा अरोमा और टेस्ट वहां मेथी में नहीं आ पाया। कृषि वैज्ञानिक इसके लिए केवल नागौर की जलवायु और मिट्टी को ही अनुकूल मानते हैं।
सैकड़ों साल पहले हुई शुरुआत
नागौर में सैकड़ों सालों से मेथी की खेती की जा रही है। पहले इसे घोड़ों के चारे के तौर पर उगाया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे इसकी खुशबू ने लोगों को आकर्षित किया। घरों में लोग उपयोग करने लगे। फिर यह लोकल बाजार तक पहुंची, लेकिन आजादी से कुछ साल पहले एमडीएच कंपनी के धर्मपाल गुलाटी ने इसे पहचाना और फिर यहां के किसानों से खरीदना शुरू किया, बाद में उन्होंने खुद की कंपनी एमडीएच की प्रोसेसिंग यूनिट यहां लगाई। इसके बाद यह जायका देश के कोने-कोने तक पहुंचने लगा।



Click it and Unblock the Notifications
