Tipu Sultan Sword: लूटी गई टीपू सुल्तान की तलवार ‘सुखेला’ 140 करोड़ में हुई नीलाम, जानें इसकी खासियतें

टीपू सुल्तान की तलवार की इन दिनों काफी चर्चा हो रही है। 18वीं सदी में मैसूर के शासक की तलवार की ब्रिटेन में नीलामी हुई है। इस निलामी ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। टीपू सुल्तान की तलवार 140 करोड़ रुपये में नीलाम हुई है जो किसी भारतीय वस्तु की नीलामी का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। टीपू सुल्तान अंग्रेजों के खिलाफ युद्धों में अपनी बहादुरी के लिए जाने जाते हैं। मैसूर के सुल्तान हैदर अली के बेटे टीपू सुल्तान 1782 में अपने पिता की मृत्यु के बाद राजगद्दी पर बैठे थे।

Tipu Sultan Sword

जानते हैं इस तलवार के बारें में- (Tipu Sultan Sword)
-जानकारी के अनुसार, लंदन के बोनहम्स के लिए ये नीलामी हुई थी, जिसमे टिपू सुल्तान की तलवार नीलाम हुई।

-टीपू सुल्तान की तलवार उनके बेडरूप से मिली थी।

-इस तलवार का नाम सुखेला है। ये तलवार सोने और स्टील से तैयार की गई है।

-टीपू सुल्तान की इस शानदार तलवार के ब्लेड में 'शासक की तलवार' गुदा है।

-ये तलवार 16वीं शताब्दी में आए जर्मन ब्लेड के मॉडल के बेस पर बनाई गया थी।

Tipu Sultan Sword


-इस तलवार पर सोने की कैलिग्राफी उकेरी गई है।

-ईस्‍ट इंडिया कंपनी ने जब टीपू सुल्‍तान की सेना को हराया था तब श्रीरंगपट्टनम वाले महल से इस तलवार को भी लूटा था।

-इस तलवार को ब्रिटिश सेना के मेजर जनरल डेविड बेयर्ड को ईनाम के तौर पर तोहफे में दिया गया था।

बोन्हाम्स इस्लामिक और भारतीय कला के प्रमुख नीमा साघरची ने बताया कि तलवार का एक शानदार इतिहास है। इसका बेजोड़ शिल्प है।

Tipu Sultan Sword

विजय माल्या ने तलवार को खरीदने के बाद बताया था अनलकी
2004 में भारतीय बिजनेसमैन विजय माल्‍या ने इसे करीब 1.5 करोड़ रूपये में खरीदा था। लेकिन साल 2016 में उन्‍होंने इस तलवार को ये कहते हुए वापस किया कि तलवार की वजह से उनका खराब समय शुरू हुआ था।

कौन थे टीपू सुल्तान
टीपू सुल्तान मैसूर के सुल्तान हैदर अली के सबसे बड़े बेटे थें, जो हैदर अली की मौत के बाद 1782 में शासक बनें। टीपू सुल्तान ने अपने पिता की तरह की अंग्रेजों के साथ युद्ध जारी रखा। साल 1799 में अंग्रेजों के साथ एक लड़ाई के दौरान टीपू सुल्तान की मृत्यु हो गई।

Tipu Sultan Sword

टीपू सुल्तान ने बनाया था दुनिया का पहला रॉकेट
एक शासक के रूप में, उन्होंने कई नई चीजों को लागू किया। जिसमें लौह-आधारित मैसूरियन रॉकेट भी था। इसे दुनिया का पहला रॉकेट कहा जाता है। टीपू सुल्‍तान ने 18 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों के विरुद्ध पहला युद्ध जीता था।

Image Courtesy- Twitter

Desktop Bottom Promotion