Latest Updates
-
High Protein Breakfast Egg Bhurji Paratha Recipe: स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल -
Vinayak Chaturthi 2026: प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
Aaj Ka Rashifal 18 June 2026: गुरुवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा, जानें अपना भाग्य -
Dhaba Style Egg Curry Recipe: घर पर बनाएं ढाबे जैसी मसालेदार अंडा करी -
नसों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं सोनू निगम, हो रहे MRI-CT स्कैन लेकिन फिर भी करेंगे लाइव परफॉर्म -
गर्मियों में कई समस्याओं के लिए रामबाण है लीची की तरह दिखने वाला ये फल, जानें इसके फायदे -
Lohri Special Energy Til Pinni Recipe: सर्दियों में शरीर को गर्म रखने का आसान तरीका -
International Men's Health Week: पुरुषों की फर्टिलिटी बढ़ा सकते हैं ये 5 योगासन, जानें अभ्यास का तरीका -
डायबिटीज के मरीजों को किशमिश खानी चाहिए या नहीं? जानें कैसे और कितना करें सेवन -
लंबे-घने और मजबूत बालों का सीक्रेट है मेथी, इन 3 तरीकों से हेयर केयर रूटीन में शामिल
सिख धर्म में 'तनखैया' का क्या है मतलब, सुखबीर सिंह बादल से पहले अकाल तख्त कई दिग्गजों को सुना चुका है सजा
बुधवार सुबह अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में शिरोमणि अकाली दल चीफ सुखबीर सिंह बादल पर एक शख्स ने अचानक से जानलेवा हमला करने की कोशिश की, जिसके बाद मंदिर परिसर में हडकंप मच गया। हालांकि इस हमले में सुखबीर सिंह बादल बाल-बाल बच गए। गौर करने वाली बात यह है कि सुखबीर सिंह बादल पर यह हमला तब हुआ जब वह यहां सेवादार बन अपनी गलती का प्रायश्चित कर रहे थे।
दरअसल अकाल तख्त के पांच सिंह साहिबान द्वारा बादल सरकार में हुई गलतियों के लिए धार्मिक सजा सुनाते हुए पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और उनके कैबिनट में रहे कई नेताओं को 'तनखैया' करार दिया था।
इस सजा के दौरान बादल सहित कई नेताओं को गुरुद्वारे में शौचालय साफ करने से लेकर झाडू लगाना, बर्तन साफ करने को कहा गया था। यहीं नहीं सजा के दौरान उन्हें गले में तख्ती भी लटकाकर रखने के निर्देश दे गए थे। आइए जानते हैं आखिर सिख धर्म में 'तनखैया' का क्या मतलब होता है और किन-किन लोगों को यह सजा मिल चुकी हैं।

तनखैया का मतलब क्या है?
सिख धर्म में "तनखैया" उस व्यक्ति को कहा जाता है जिसने धार्मिक गलती की हो। इसका निर्णय सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था, अकाल तख्त, करती है। तनखैया का अर्थ है सिख धर्म से निष्कासित व्यक्ति, जिसे समाज से अलग कर दिया जाता है। साधारण भाषा में इसे "हुक्का-पानी बंद" करना कहा जाता है, जिसमें दोषी का पूरी तरह बहिष्कार किया जाता है।
अगर कोई सिख धर्म से जुड़ा व्यक्ति गलती करता है, तो उसे पास की सिख संगत के सामने पेश होकर अपनी गलती स्वीकार करनी होती है। संगत गलती की जांच के बाद सजा तय करती है। सजा में गुरुद्वारे में जूते साफ करना, फर्श या बर्तन धोना, या आर्थिक दंड शामिल हो सकता है। इन सजाओं का उद्देश्य सेवा भाव और गलती सुधारना है।
इन लोगों को मिल चुकी है सजा
सुखबीर सिंह बादल पहले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें "तनखैया" घोषित किया गया है। इससे पहले भी कई बड़े नेताओं को यह सजा मिल चुकी है। सिख धर्म और पंजाब के राजनीतिक इतिहास में तनखैया की सजा का एक विशेष महत्व है। इसकी गंभीरता के चलते पंजाब के महाराजाओं, मुख्यमंत्रियों और यहां तक कि राष्ट्रपति तक को अकाल तख्त के सामने अपना सिर झुकाना पड़ा है।
पंजाब में सिख साम्राज्य की नींव रखने वाले महाराजा रणजीत सिंह, पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, पूर्व गृहमंत्री बूटा सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुरजीत सिंह बरनाला को भी "तनखैया" घोषित किया जा चुका है। इस दंड का उद्देश्य धार्मिक सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करना और गलती स्वीकार कर सुधार करना है।

महाराजा रणजीत सिंह को मिली थी कोड़े बरसाने की सजा
शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह धार्मिक प्रवृत्ति के थे, लेकिन मुस्लिम नृतकी मोरा के आग्रह पर उसके घर जाने के कारण उन्हें "तनखैया" करार दिया गया। इस पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार, अकाली फूला सिंह, ने उनकी पीठ पर कोड़े बरसाए और हर्जाना भी वसूला। माफी के बाद महाराजा को दोबारा सिख संगत में स्वीकार किया गया। यह घटना सिख धर्म में अनुशासन की सख्ती को दर्शाती है।
ज्ञानी जेल सिंह को दे दी गई थी माफी
ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भारत के राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह पर हरिमंदिर साहिब में जूते पहनकर और छाते के नीचे खड़े होकर बातचीत करने का आरोप लगा। यह घटना सिख संगत को अपमानजनक लगी। ऑपरेशन के अगले दिन जैल सिंह ने स्वर्ण मंदिर का दौरा किया, जिसे कांग्रेस के बचाव और सांत्वना देने की कोशिश समझा गया। इसके चलते 2 दिसंबर 1984 को उन्हें तनखैया घोषित किया गया, मगर ज्ञानी जेल सिंह ने अख्ल तख्त को लिखित में माफी मांगी, जिसके बाद उनकी सजा माफ कर दी गई थी।
बूटा सिंह की मां की मौत में नहीं आया ग्रंथी
इंदिरा और राजीव गांधी के करीबी रहे केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह को भी 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद अकाल तख्त क्षतिग्रस्त होने के बाद तनखैया करार दे दिया गया था। इसके बाद वह उन्होंने अपना लंदन का दौरा अधूरा छोड़ अकाल तख्त की कार सेवा में जुट गए। जब कोई ग्रंथी कार सेवा के लिए राजी नहीं तो बूटा सिंह पटना से एक ग्रंथी ले आए। कुछ ही दिन बाद जब मां की मौत हुई तो कोई भी ग्रंथी पाठ करने के लिए राज़ी ना हुआ।
सजा पूरी होने के बाद क्या?
सिख धर्म में सजा पूरी होने पर व्यक्ति तनखैया नहीं रहता, यानी वह धार्मिक और सामाजिक जीवन में पुनः शामिल हो सकता है। सिख संगत माफी देने में कठोर नहीं होती, परंतु आरोपी को सजा स्वीकार करनी होती है और कोई बहसबाजी नहीं करनी चाहिए। अरदास के साथ यह प्रक्रिया पूरी होती है। जैसे, पूर्व गृहमंत्री बूटा सिंह ने तनखैया घोषित होने के बाद माफी मांगी और उन्हें गुरुद्वारा बंगला साहिब में जूते साफ करने की सजा दी गई।, जो कि पश्चाताप के भाव को दर्शाता हैं।



Click it and Unblock the Notifications