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PM मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन को तोहफे में दी झारखंड की सोहराई पेटिंग, जानें इसकी खासियत
What is Sohrai Painting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति पुतिन को बेहद स्पेशल गिफ्ट दिया। तोहफे में उन्होंने झारखंड की प्रसिद्ध 'सोहराई पेंटिंग' दी थी। जिसके बाद से ही सोहराई पेंटिंग के बारे में चर्चा हो रही है। आपको बता दें कि झारखंड के हजारीबाग जिले की 'सोहराई पेंटिंग', इस क्षेत्र की संस्कृति का हिस्सा रही है।
सोहराई पेंटिंग प्राणियों के शासक पशुपति को समर्पित हैं। यह एक आदिवासी कला है। सोहराई पेंटिंग को ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) आइटम के रूप में मान्यता प्राप्त है। आइए जानते है आखिर सोहराय पेंटिंग क्या होती है?

क्या है सोहराय पेंटिंग?
झारखंड की सोहराय पेंटिंग एक पारंपरिक और सांस्कृतिक कला है जो विशेष रूप से आदिवासी समुदायों द्वारा बनाई जाती है, विशेष रूप से संथाल, उरांव, और मुंडा जनजातियों द्वारा। यह कला मुख्य रूप से दीवारों पर की जाती है और इसका संबंध फसल कटाई और सोहराय पर्व से होता है, जो एक प्रकार का फसल उत्सव है। इस पेंटिंग का उद्देश्य घरों को सजाना और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करना होता है। सोहराई पेंटिंग्स में मुख्यत: लाल और काली रेखाएं होती हैं, लाल रेखाएं पूर्वजों के रक्त का प्रतिनिधित्व करती हैं और काली रेखा शाश्वत मृत्यु या भगवान शिव को दर्शाती है। इसके अलावा इसमें पीली और दूधी मिट्टी का भ इस्तेमाल होता है। आज भी झारखंड के हजारीबाग और आसपास के इलाके में 13 समुदाय के लोग अलग- अगल स्टाइल में यह पेंटिंग करते हैं और इस इलाकों में आज भी पर्व-त्योहार और शादी में महिलाएं अपने घरों में यह कलाकृतियां बनाती है।
सोहराय पेंटिंग की खासियत
प्राकृतिक रंगों का प्रयोग : सोहराय पेंटिंग में मुख्य रूप से प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जाता है जो मिट्टी, लकड़ी की राख, और पेड़ों की छाल से बनाए जाते हैं। सफेद, काला, लाल, पीला, और हरा रंग प्रमुख होते हैं।
पशुओं और प्राकृतिक तत्वों का चित्रण: इन पेंटिंग्स में अक्सर पशुओं, जैसे कि बैल, घोड़े, और पक्षियों का चित्रण किया जाता है, साथ ही वृक्ष, फूल, सूर्य और अन्य प्राकृतिक तत्वों को भी शामिल किया जाता है। इन चित्रों के माध्यम से पशुओं और प्रकृति के प्रति प्रेम और सम्मान को दर्शाया जाता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक: सोहराय कला में कई धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक होते हैं जो गांव की संस्कृति और मान्यताओं को दर्शाते हैं। यह चित्रण पारंपरिक तौर पर महिलाएं करती हैं, जो पीढ़ियों से इस कला को संजोती आ रही हैं।
पैटर्न और ज्यामितीय आकृतियाँ: सोहराय पेंटिंग में विविध प्रकार के पैटर्न और ज्यामितीय आकृतियाँ होती हैं, जैसे गोल, वर्गाकार, तिरछी रेखाएँ, जो चित्रों में सुंदरता और संतुलन लाती हैं।
झारखंड की सोहराय पेंटिंग कला न केवल उनके धार्मिक और सांस्कृतिक विचारों का प्रतीक है, बल्कि यह आदिवासी जीवन के एक अभिन्न अंग को भी उजागर करती है।



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