बांग्लादेश की पहली प्रधानमंत्री खालिदा जिया कौन थीं? जिन्होंने 80 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

Who Is Khaleda Zia: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष खालिदा जिया का निधन हो गया है। उन्होंने 80 साल की उम्र में ढाका के एवरकेयर अस्पताल में अंतिम सांस ली। खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और देश की राजनीति में दशकों तक एक मजबूत चेहरा बनी रहीं।

उनके निधन की खबर से बांग्लादेश की राजनीति जगत में हलचल मच गई है। आइए जान लेते हैं कि खालिदा जिया कौन हैं, उनकी राजनीतिक जर्नी कैसी रही और कैसे उनका निधन हुआ।

कौन थीं खालिदा जिया

खालिदा जिया बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक नेता और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। वे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष रहीं और तीन बार प्रधानमंत्री बनीं। खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को हुआ था। उनके पति जियाउर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति और BNP के संस्थापक थे। 1981 में पति की हत्या के बाद खालिदा जिया ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और पार्टी की कमान संभाली।

पति की हत्या के बाद राजनीति में रखा कदम

खालिदा जिया के पति जियाउर रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के संस्थापक थे। साल 1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद खालिदा जिया सक्रिय राजनीति में आईं। इसके बाद 1984 में वे BNP की अध्यक्ष बनीं और धीरे-धीरे देश की सबसे प्रभावशाली नेताओं में शुमार हो गईं।

अगस्त 2024 में जेल से हुई थीं रिहा

खालिदा जिया भ्रष्टाचार के मामलों में सजायाफ्ता थीं और जेल में थीं। लेकिन अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया। इलाज के लिए वे जनवरी 2025 में लंदन गईं और तबीयत में सुधार के बाद मई 2025 में वापस लौटीं। रिपोर्ट के अनुसार, खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच दशकों तक चली राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बांग्लादेश की राजनीति की पहचान बन गई। दोनों नेताओं के बीच सत्ता संघर्ष ने देश की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।

तीन बार बनीं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री

खालिदा जिया ने कुल तीन बार बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। उनका पहला कार्यकाल मार्च 1991 से फरवरी 1996 तक रहा। दूसरा कार्यकाल 1996 में कुछ हफ्तों के लिए रहा और तीसरा कार्यकाल अक्टूबर 2001 से अक्टूबर 2006 तक रहा। वे बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और मुस्लिम दुनिया में बेनजीर भुट्टो के बाद दूसरी महिला प्रधानमंत्री थीं। साल 1982 में सैन्य तख्तापलट के जरिए लेफ्टिनेंट जनरल हुसैन मुहम्मद इरशाद सत्ता में आए। इस दौर में खालिदा जिया ने लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष किया और विपक्ष की मजबूत आवाज बनकर उभरीं।

गंभीर बीमारियों से जूझते हुए निधन

खालिदा जिया लंबे समय से लिवर सिरोसिस, किडनी, फेफड़ों और दिल की बीमारी से पीड़ित थीं। 23 नवंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वो 11 दिसंबर से वे वेंटिलेटर पर थीं। आज सुबह करीब 6 बजे उनका निधन हो गया और अब बांग्लादेश की राजनीति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने विदेश इलाज की सलाह दी थी, लेकिन हालत नाजुक होने के कारण उन्हें बाहर नहीं ले जाया जा सका।

बेटे और पोती की राजनीति में एंट्री

खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे और BNP की कमान संभाली। वहीं उनकी पोती जायमा रहमान भी राजनीति में उतरने की तैयारी कर रही हैं।

Story first published: Tuesday, December 30, 2025, 10:52 [IST]
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