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कौन हैं रासेश्वरी देवी? जिन्होंने World Meditation Day पर की 1500 सीटों वाले मेडिटेशन और वेलनेस सेंटर की घोषणा
Who Is Raseshwari Devi: विश्व मेडिटेशन दिवस 2026 के अवसर पर आध्यात्मिक गुरु और ब्रज गोपिका सेवा मिशन (BGSM) की संस्थापक रासेश्वरी देवी ने भारत में ध्यान, योग और आंतरिक कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो बड़े आध्यात्मिक कार्यक्रमों की घोषणा की। इन घोषणाओं में ओडिशा में विशाल योग और मेडिटेशन सेंटर का निर्माण और अगले महीने हरिद्वार में आयोजित होने वाला एक सप्ताह का मेगा ध्यान शिविर शामिल है। संस्था का कहना है कि इन पहलों का मकसद लोगों को योग, ध्यान और मानसिक शांति से जोड़ना है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भावनात्मक संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य के साधन के रूप में ध्यान पर वैश्विक स्तर पर चर्चा बढ़ रही है।

ओडिशा में बनेगा विशाल योग और मेडिटेशन हॉल
संस्था के अनुसार, ओडिशा के खुर्दा जिले के टांगी क्षेत्र में एक बड़ा योग और मेडिटेशन हॉल बनाया जा रहा है। यह स्थान भुवनेश्वर के पास स्थित है। इस हॉल में एक समय में 1500 से ज्यादा लोग ध्यान और योग कर सकेंगे। संस्था का दावा है कि यह केंद्र आने वाले समय में ध्यान, योग शिक्षा, आध्यात्मिक रिट्रीट और वेलनेस गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनेगा। यहां लोगों को मानसिक शांति, योग और आध्यात्मिक जीवनशैली से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
हरिद्वार में लगेगा मेगा मेडिटेशन कैंप
11 जून से 17 जून 2026 तक हरिद्वार में एक सप्ताह का विशाल मेडिटेशन कैंप आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।इस कार्यक्रम में लगभग 2500 लोगों के शामिल होने की संभावना है। इस दौरान ध्यान, योग, मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवनशैली से जुड़े सत्र होंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को तनाव से दूर कर मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति की ओर प्रेरित करना बताया गया है।
कौन हैं रासेश्वरी देवी?
रासेश्वरी देवी एक प्रसिद्ध भारतीय आध्यात्मिक गुरु, सनातन वैदिक दर्शन की प्रचारक और ब्रज गोपिका सेवा मिशन की संस्थापक हैं। वे ध्यान, योग और भक्ति के जरिए लोगों को मानसिक शांति और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने साल 1998 में ब्रज गोपिका सेवा मिशन की स्थापना की थी, जिसके माध्यम से आध्यात्मिक कार्यक्रम, मेडिटेशन कैंप और समाज सेवा से जुड़े कई काम किए जाते हैं। उनके प्रवचनों की खास बात यह मानी जाती है कि वे प्राचीन भारतीय ज्ञान को आज की जीवनशैली और युवाओं की सोच से जोड़कर पेश करती हैं।
आध्यात्म की राह कैसे चुनी?
रासेश्वरी देवी का जन्म छत्तीसगढ़ के भिलाई में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई के दौरान उन्होंने गणित और अंग्रेजी साहित्य जैसे विषयों का अध्ययन किया, लेकिन बाद में उनका झुकाव पूरी तरह आध्यात्मिक जीवन की ओर हो गया। बताया जाता है कि धार्मिक माहौल में पले-बढ़े होने की वजह से बचपन से ही उनकी रुचि भक्ति और भारतीय दर्शन में थी। साल 1988 में उन्होंने जगद्गुरु स्वामी श्री कृपालु जी महाराज के मार्गदर्शन में आध्यात्मिक जीवन अपनाया। इसके बाद उन्होंने लोगों के बीच भक्ति, योग और आत्मिक शांति से जुड़ी शिक्षाओं का प्रसार शुरू किया।
आसान भाषा में देती हैं जीवन से जुड़ी सीख
रासेश्वरी देवी की पहचान ऐसे आध्यात्मिक वक्ता के रूप में बनाई जाती है, जो कठिन धार्मिक और दार्शनिक बातों को बेहद सरल तरीके से समझाती हैं। उनके प्रवचनों में केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि रिश्ते, आत्मविश्वास, मानसिक तनाव, अनुशासन और सकारात्मक सोच जैसे विषय भी शामिल रहते हैं। यही वजह है कि युवा वर्ग भी उनकी बातों से जुड़ाव महसूस करता है।
युवाओं और बच्चों के लिए चलाती हैं कार्यक्रम
उनकी संस्था कई वर्षों से बच्चों और युवाओं के लिए संस्कार और व्यक्तित्व विकास से जुड़े शिविर आयोजित करती आ रही है। इन कार्यक्रमों में भारतीय संस्कृति, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों पर विशेष जोर दिया जाता है।
समाज सेवा के कामों में भी सक्रिय
आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ-साथ ब्रज गोपिका सेवा मिशन शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सहायता से जुड़े काम भी करता है। संस्था जरूरतमंद लोगों की मदद और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने के लिए अलग-अलग अभियान चलाती रहती है।
आधुनिक जीवन से जोड़ती हैं आध्यात्मिकता
रासेश्वरी देवी अपने प्रवचनों में अक्सर बताती हैं कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ध्यान और आध्यात्मिकता मानसिक शांति देने में कैसे मदद कर सकते हैं। उनकी शिक्षाएं श्रीकृष्ण भक्ति, भक्ति योग और भारतीय वैदिक परंपरा पर आधारित मानी जाती हैं।



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