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Hathras Stampede: कौन है भोले बाबा' जिनके सत्संग में भगदड़ मचने से गई 121 की जान, टाई और चश्मा के हैं शौकीन
Who is 'Bhole Baba' : उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले स्थित फुलरई गांव में एक धार्मिक सत्संग के दौरान अचानक से मची भगदड़ में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए हैं। यह हादसा नारायण साकार हरि या साकार विश्व हरि उर्फ 'भोले बाबा' के सत्संग के समापन पर हुआ।
खबरों के मुताबिक भोले बाबा आसपास के इलाको मे इस कदर लोकप्रिय हैं कि इनके सत्संग सुनने के लिए लगभग ढ़ाई लाख लोगों की भीड़ उमड़ी थी। आइए जानते हैं आखिर ये 'भोले बाबा' कौन हैं?

कौन हैं भोले बाबा?
नारायण हरि उर्फ भोले बाबा का असली नाम सूरजपाल है। वह मूल रूप से कासगंज जिले के बहादुर नगर का रहने वाला है। वह बचपन से ही अपने पिता के साथ खेती का काम किया करता था। बाद में उनकी भर्ती इंटेलीजेंस ब्यूरों में कॉन्स्टेबल पद पर हो गई। लगभग 18 साल तक नौकरी करने के बाद उन्होंने VRS यानी स्वैच्छिक सेवानिवृति ले ली।
जानकारी के अनुसार सूरजपाल का शुरुआत से ही अध्यात्म की तरफ झुकाव था लेकिन 1990 के दशक में पुलिस विभाग की नौकरी छोड़ने के बाद वह पूरी तरह से इसमें ढ़ल गए और सत्संग कराना शुरू कर दिया। भोले बाबा ऊर्फ नारायण साकार शिव हरि नाम के संत की प्रसिद्धि केवल पश्चिमी यूपी में ही नहीं बल्कि उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली में भी है।
सूट-बूट में आते हैं नजर
पुलिस विभाग से स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने के बाद नारायण हरि को सत्संग के समय हमेशा सफेद सूट, रंगीन चश्मे और नीली टाई पहने देखा जाता है। नारायण हरि उर्फ भोले बाबा अनुसूचित जाति समाज से संबंध रखते हैं। इस वजह से वह प्रतीक के तौर पर इन विशेष रंगों को पहने दिखाई देते हैं। उनकी पत्नी अक्सर उनके साथ सत्संग के दौरान मंच पर देखा जाता है।
सुरक्षा के लिए खुद की तैयार की आर्मी
आज के समय में उनके लाखों अनुयायी हैं। वह सुरक्षा के लिए वॉलिंटेयर्स को रखते हैं, जो उनके सत्संग की सुरक्षा का पूरा इंतजाम करते हैं। जिन्हें भोले बाबा की आर्मी कहा जाता है। इन्हें सेवादार कहा जाता है। जो श्रद्धालुओं के भोजन-जल के अलावा ट्रैफिक व्यवस्था भी देखते हैं।
30 एकड़ में फैला आश्रम
बाबा का आश्रम 30 एकड़ में फैला हुआ है। इस आश्रम में किसी देवता की मूर्ति नहीं है। बताया जाता है कि नारयण हरि मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं और इनकी गहरी पैठ गांव-गांव तक है। अनुयायी इन्हें भगवान शिव की तरह पूजते है। यह वजह है कि लोग इन्हें भोले बाबा कहने लगे।
सोशल मीडिया से दूर
गौर करने वाली बात यह है कि अन्य साधु संतों और कथावाचकों से अलग भोले बाबा सोशल मीडिया से दूर रहते हैं। सोशल मीडिया में उनके नाम पर कोई जानकारी नहीं मिलती है।



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