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ऊंटों को क्यों खिलाया जाता है जिंदा सांप? हकीकत जान चौंक जाएंगे आप!
जस्थान का नाम लेते ही सबसे पहले रेगिस्तान का जहाज कहे जाने वाले ऊंट की छवि दिमाग में उतर जाती हैं। ऊंट को देखकर अपने आप ही रॉयल फीलिंग आने लगती हैं। ऊंट बेहद ही शांत स्वभाव के प्राणी होते हैं। ये पत्ते, पौधे, फल-फूल आदि खाकर अपना पेट भरता हैं। आपको मालूम होगा कि ऊंट लंबे समय तक बिना पानी पिएं जीवित रहता है। दरअसल ऊंट के शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कूबड़ होता है। वही जो ऊपर की ओर उठा हुआ होता है।
ऊंट यहीं पर चर्बी को स्टोर करके रखते हैं ताकि भीषण गर्मी में उन्हें कुछ खाने-पीने को नहीं मिले तो वे इसी चर्बी के सहारे जिंदा रहते हैं। इसके अलवा ऊंट एक बार में ही 100 से 150 लीटर पानी पी लेते हैं और यह पानी उनके पेट में बनी थेली में स्टोर रहता है जिसके सहारे रेगिस्तान में भी ये प्राणी सरवाइव कर लेता हैं।

इससे भी एक रोमांचक बात शायद आपको ऊंट के बारे में पता नहीं हो कि ऊंट को जिंदा सांप खिलाया जाता है। जी हां, रेगिस्तानी इलाकों में अरब या राजस्थान में ऊंटों को जिंदा सांप खिलाने की परांपरा है। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह-
इस बीमारी से बचाने के लिए किया जाता है ऐसा
ऊंट को एक खतरनाक बीमारी होती है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस बीमारी से बचने के लिए 'जिंदा सांप निगलना' होता है। जिससे उसे बचाने के लिए ऐसा किया जाता है। इस बीमारी का नाम हयाम है।
इस बीमारी के वजह से ऊंट अपनी जान गंवा सकते हैं। किसी ऊंट को अगर ये बीमारी हो जाती है तो उसका मुंह खोलकर जिंदा कोबरा सांप या पायथन जैसे जहरीले सांप उसके मुंह में छोड़ दिया जाता है।
अकड़ने लगता है ऊंट का शरीर
ऊंट जब हयाम नामक इस बीमारी की चपेट में आते हैं तो वे खाना-पीना छोड़ देते हैं। उनका शरीर भी अकड़ने लगता है। इस वजह से सुस्ती, सूजन, बुखार और एनीमिया जैसे कई तरह के लक्षण पैदा हो जाते हैं। अरब देशों या मिडिल ईस्ट में माना जाता है कि अगर ऊंट को यह बीमारी जकड़ लें तो उसे जहरीला सांप खिलाना चाहिए। इस बीमारी का यही एक इलाज है। ऐसे में ऊंट के मुंह को खोलकर उसमें सांप डाल दिया जाता है। इसके बाद पानी डाल दिया जाता है ताकि सांप अंदर पेट में चला जाए। इससे सांप का जहर ऊंट के शरीर में फैल जाता है। जब असर कम होने लगता है तो ऊंट भी कुछ दिनों में ऊंट भी पूरी तरह से ठीक हो जाता है।

साइंस नहीं है इसका कुछ लेना-देना
हालांकि वैज्ञानिक अभी तक ऊंटों में होने वाली इस बीमारी के बारे में ज्यादा पता नहीं जानते हैं और न ही सांप खिलाने के लॉजिक को लेकर कोई लॉजिक है। कुछ पशु चिकित्सकों के मुताबिक रेगिस्तान में पाए जाने वाले विशेष कीड़े के काटने से ऊंटों में ये बीमारी होती है। कई बार ऊंटों की मौत हो जाती है तो कभी गर्भवती ऊंटनी का इस बीमारी से गर्भपात भी हो जाता है। ऊंटों में Trypanosomiasis यानि स्लीपिंग सिकनेस हो जाती है। उसके दिमाग में सूजन आने लगती है जिससे उसका सिरदर्द और बुखार शुरु हो जाता है लेकिन डॉक्टर इस बीमारी में सांप खिलाने को सिर्फ मिथक मानते है।



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