Latest Updates
-
Rajasthani Village Style Besan Kadhi Recipe: पारंपरिक स्वाद वाली कढ़ी अब घर पर बनाएं -
Nautapa 2026: 25 मई से शुरू हो रहा नौतपा, भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए जरूर अपनाएं ये असरदार उपाय -
कॉफी से चेहरा कैसे साफ करें? कॉफी में मिलाकर लगाएं ये 5 चीजें तो निखर उठेगी त्वचा -
Traditional Rajasthani Bajra Roti Recipe: सर्दियों के लिए सेहतमंद और स्वादिष्ट रोटी बनाने का आसान तरीका -
Brother's Day 2026 Wishes: बचपन की शरारतें...ब्रदर्स डे पर अपने भाई को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 24 May 2026: रविवार को इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन लाभ के साथ मिलेगी बड़ी खुशखबरी -
Sunday Morning to Night Nihari Recipe: धीमी आंच पर पकाएं और पाएं रेस्टोरेंट जैसा लजीज स्वाद -
Kainchi Dham जाने का है प्लान तो रुकने की टेंशन करें खत्म, जानिए कहां मिलेंगे सबसे सस्ते और बेस्ट होटल्स -
Happy Brother's Day 2026 Shayari: प्यारा भाई यह मेरा, ब्रदर्स डे पर अपने भाई को भेजें ये शायरियां -
Restaurant Style Papdi Chaat Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसी चटपटी और कुरकुरी चाट
सुखदेव सिंह गोगामड़ी की हत्या के बाद चर्चा में आया गोगामेड़ी मंदिर, जहां प्रसाद में चढ़ाया जाता है प्याज
Gogamedi Mandir : राजस्थान में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या होने के बाद हर कोई जानना चाहता है कि वो कौन थे और कहां से संबंध रखते थे? इसी बीच राजस्थान का जग विख्यात गोगामेड़ी मंदिर एकदम से सुर्खियों में आ गया है। आइए जानते हैं कि इस मंदिर का और सुखदेव सिंह के नाम से क्या कनेक्शन था और इस अनूठे मंदिर की क्या खासियत हैं।

क्या है नाम का मंदिर से कनेक्शन
सुखदेव सिंह गोगामेड़ी का असली नाम सुखदेव सिंह शेखावत था। वो राजस्थान के हनुमानगढ़ के गोगामेड़ी जगह से ताल्लुक रखते थे। यहीं जग विख्यात गोगामेड़ी मंदिर भी स्थित हैं। राजपूत समुदाय मे कई लोग अपने पैतृक गांव या स्थान का नाम उपनाम की तरह भी इस्तेमाल में लेते हैं।
लोकदेवता गोगा जी का मंदिर है गोगामेड़ी
राजस्थान में गोगा जी को लोक देवता माना जाता है। गोगा जी का जन्म राजस्थान के चुरू जिले के दादरेवा गांव में चौहान वंश के राजपूत शासक के घर में हुआ था। गुरु गोरखनाथ के गोगाजी शिष्य थे। राजस्थान के लोग गोगाजी को जाहिर वीर, जाहर पीर, सर्प का देवता और गुग्गा वीर जैसे नामों से जानते थे। यहां ऐसी मान्यता थी कि अगर सर्प दंष से प्रभावित व्यक्ति को गोगाजी के मंदिर ले जाएं तो वो सर्प विष से मुक्त हो जाता है।
प्याज चढ़ाए जाते हैं जाते हैं प्रसाद में
राजस्थान के गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) में स्थित गोगामेड़ी अनूठा मंदिर करीब 950 वर्ष पुराना है। इस मंदिर में यहां के देवता गोगाजी को प्याज और दाल चढ़ाने की अनोखी परंपरा है। प्याज को तामसी भोजन माना जाता है इसलिए भारत का कोई ऐसा मंदिर नहीं है जहां प्याज को दान या प्रसाद के तौर पर चढ़ाया जाता है। लेकिन इस मंदिर में चढ़ावे के तौर पर आए प्याज का सालभर ढेर लगा रहता है। यहां इन प्याज को बेचकर गौशाला और भंडारा का आयोजन किया जाता है।

हिंदु-मुस्लिम एकता का प्रतीक हैं यह मंदिर
बताया जाता है कि करीब एक हजार साल पहले यहां गोगाजी और मोहम्मद गजनवी के बीच युद्ध हुआ था। गोगाजी ने विभिन्न स्थानों से सेनाएं बुलाई थीं। सैनिक अपने साथ रसद में प्याज और दाल भी लेकर आए थे। युद्ध में गोगाजी वीरगति को प्राप्त हुए। वापसी में सैनिकों ने प्याज और दाल गोगाजी की समाधि पर ही अर्पित कर दिए। तभी से इस जगह प्याज और दाल चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई। बुजुर्ग उनके घोड़े के लिए भी दाल चढ़ाने की बात कहते हैं। यहां हवन में भी प्याज की आहुति दी जाती है। मुस्लिम समाज गोगाजी को जहर पीर के नाम से बुलाता है। गोगाजी का मंदिर राजस्थान हिंदु-मुस्लिम एकता का प्रतीक हैं।
हर साल लगता है यहां महीने
इस मंदिर में हर साल एक महीने तक मेला चलता है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मंदिर में गोगानवमी मनाई जाती है। कहां उत्तरप्रदेश गोगाजी का ससुराल कहा जाता है। ससुराल पक्ष के लोग पीले वस्त्र लेकर आते हैं और भोग में खास तौर पर प्याज और दाल का चढ़ावा चढ़ाते हैं।



Click it and Unblock the Notifications