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Chand Par Shayari: शायरों की पहली पसंद है चांद, उसकी खूबसूरती को बयां करती चुनिंदा शायरी पढ़ें यहां
चांद के प्रति इंसानों का आकर्षण कभी काम नहीं हुआ। हर उम्र के लोग चांद से कितनी मोहब्बत करते हैं ये बताने की जरूरत नहीं। विज्ञान की मदद से आज इंसान चांद पर जा पहुंचा है तो वहीं साहित्य, कविताओं और शायरी के जरिये लोग चांद का जिक्र करना नहीं छोड़ते हैं।
उर्दू शायरी की बात करें तो 'चांद' हमेशा से ही लोकप्रिय विषय रहा है। महबूब अपनी प्रियतमा की झलक चांद में देखता है तो कभी अपने दिलरुबा की खूबसूरती की तुलना ही चांद से कर बैठता है।

गौरतलब है कि 14 जुलाई 2023 को चंद्रयान 3 को इसरो ने श्रीहरिकोटा से लांच किया था और अब 41 दिनों के बाद 23 अगस्त को वो दिन आ गया है जब पूरा देश चंद्रयान के चांद पर लैंडिंग के लिए दुआएं कर रहा है। इन दुआओं के दौर के साथ आइये चांद पर लिखी कुछ मशहूर नज्मों और शायरी को पढ़ा जाए और चांद के प्रति अपने अगाथ प्रेम को ताजा किया जाये।
1.
इतने घने बादल के पीछे
कितना तन्हा होगा चाँद
परवीन शाकिर
2.
वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा
तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से मैं
फ़रहत एहसास
3.
फूल गुल शम्स ओ क़मर सारे ही थे
पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत
मीर तक़ी मीर
4.
गुल हो महताब हो आईना हो ख़ुर्शीद हो मीर
अपना महबूब वही है जो अदा रखता हो
मीर तक़ी मीर
5.
रात के शायद एक बजे हैं
सोता होगा मेरा चाँद
परवीन शाकिर
6.
कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए
तुम्हारे नाम की इक ख़ूब-सूरत शाम हो जाए
बशीर बद्र
7.
इक दीवार पे चाँद टिका था
मैं ये समझा तुम बैठे हो
बशीर बद्र
8.
दूर के चाँद को ढूँडो न किसी आँचल में
ये उजाला नहीं आँगन में समाने वाला
निदा फ़ाज़ली
9.
शाम के साए बालिश्तों से नापे हैं
चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में
गुलज़ार
10.
बे-सबब मुस्कुरा रहा है चाँद
कोई साज़िश छुपा रहा है चाँद
- गुलज़ार
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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