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Padma Awards 2023: इन हस्तियों को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए किया गया सम्मानित
25 जनवरी को केंद्र सरकार ने इस वर्ष के पद्म सम्मानों की घोषणा की। देश भर के ऐसे सम्मानित लोगों जिन्होंने समाज कल्याण, कला, संस्कृति, शिक्षा, विज्ञान आदि अलग अलग क्षेत्रों में अपना बहुमूल्य योगदान दिया हो, उन्हें हर साल सरकार पद्म पुरस्कारों से सम्मानित करती है।
इस वर्ष 15 लोगों को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में पद्मश्री और पद्म भूषण सम्मानों से सम्मानित किया गया है। जानते हैं कौन वे लोग जो इस वर्ष साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपने अति बहुमूल्य कार्यों के लिए पहचान मिली और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित हुए-

एस एल बैरप्पा- पद्म भूषण
कर्नाटक के एस एल बैरप्पा को साहित्य में उनके योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उन्होंने कन्नड़ भाषा में दर्शनशास्त्र, इतिहास में उपन्यास लिखें। उनको साहित्य अकादमी अवार्ड से भी पुरुस्कृत किया जा चुका है। 5 से अधिक दशकों के उनके लेखन करियर में उन्होंने आवरण, पर्व, दाटू, धरमश्री जैसे उपन्यास लिखें।
कपिल कपूर - पद्म भूषण
पिछले 60 सालों से पढ़ा रहे और भारतीय चिंतन पर लिख रहे कपिल कपूर को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। कपिल कपूर ने इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिंदुइज्म के एक से लेकर 11 संस्करणों का संपादन किया है। भारत के प्राचीन इतिहास, हिन्दुइज़्म के बारे में कपिल कपूर ने जीवनभर शोध किया और पढ़ाया।
राधा चरण गुप्त - पद्मश्री
उत्तर प्रदेश के झांसी में जन्मे राधा चरण गुप्त भारत के नामी गणितज्ञ हैं। गणित के क्षेत्र में उनका कार्य उल्लेखनीय रहा। उन्होंने अपने जीवन में गणित के क्षेत्र में करीब 500 शोध पेपर और 80 से अधिक किताबें लिखीं। उनको प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय सम्मान केनेथ ओ मे (KENNETH O MAY) अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है, यह अवॉर्ड पाने वाले वह एकमात्र भारतीय हैं।
सीआई इसाक़ - पद्मश्री
भारतीय दृष्टी से इतिहास लिखने वाले 71 वर्षीय केरल के सीआई इसाक़ को इतिहास के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए इस वर्ष पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने अपने 4 दशक लम्बे करियर में सामाजिक सुधार के साथ साथ 10 पुस्तकें भी लिखीं।
रतन सिंह जग्गी - पद्मश्री
पंजाबी और हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए पंजाब के रतन सिंह जग्गी को इस वर्ष पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने रामचरितमानस का पंजाबी अनुवाद भी किया। उन्होंने संक्षिप्त रूप में गुरु ग्रन्थ विश्वकोष भी तैयार किया।
आनंद कुमार - पद्मश्री
प्रसिद्ध शिक्षक और गणितज्ञ आनंद कुमार को भी इस वर्ष पद्मश्री से सम्मानित किया गया। बिहार में वे सुपर 30 नाम का शिक्षण संस्थान चलाते हैं जहां गरीब छात्रों को IIT-JEE की मुफ्त ट्रेनिंग दी जाती है। आनंद कुमार के संघर्षपूर्ण जीवन पर मशहूर बॉलीवुड फिल्म 'सुपर 30' भी बनी है।
प्रभाकर भानुदास मांडे - पद्मश्री
डॉ. प्रभाकर भानुदास मांडे मराठी भाषा के प्रसिद्ध लोकगीत लेखक हैं। इस वर्ष उनको मराठी लोक साहित्य में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।
अन्तर्यामी मिश्रा - पद्मश्री
अपना पूरा जीवन ओड़िया साहित्य और जगन्नाथ संस्कृति के विषय पर शोध करने और लिखने के लिए अन्तर्यामी मिश्रा को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने पिछले 54 वर्षों में 37 किताबें लिखीं। ओड़िया समाज में ओड़िया भाषा और जगन्नाथ संस्कृति के संरक्षण और विकास में उनका योगदान बहुमूल्य माना जाता है। विशेष रूप से दिव्यांग अन्तर्यामी मिश्रा जी ने कई जगहों की यात्रा और गहन शोध के बाद ओड़िसा की संस्कृति और साहित्य पर विस्तार ढंग से लिखा।
रमेश पतंगे - पद्मश्री
संघ विचारक, लेखक और विवेक समूह की मातृ-संस्था हिंदुस्थान प्रकाशन संस्था के अध्यक्ष रमेश पतंगे का सम्पूर्ण जीवन ही संघमय और राष्ट्र चिंतन से जुड़ा रहा है।
बी रामकृष्ण रेड्डी - पद्मश्री
तेलंगाना के भाषावैज्ञानिक बी रामकृष्ण रेड्डी को साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से पुरुस्कृत किया गया है। उन्होंने दक्षिण भारतीय और आदिवासी भाषाओं के संरक्षण लिए कड़ी मेहनत की।
मोहन सिंह - पद्मश्री
जम्मू कश्मीर के साहित्यकार मोहन सिंह को डोगरी भाषा में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। मोहन सिंह की अब तक 39 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें 32 मूल पुस्तकें हैं जबकि सात संपादित एवं अनुवादित पुस्तके शामिल हैं।
प्रकाशचन्द्र सूद - पद्मश्री
भौतिकी विज्ञान के प्रोफेसर प्रकाशचंद्र सूद को पद्मश्री से पुरस्कृत किया गया है। वे बीएचयू के भौतिकी विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। भारत में भौतिक शास्त्र और उससे संबंधित शोध में प्रो. सूद का योगदान सराहनीय रहा है।
विश्वनाथ प्रसाद तिवारी - पद्मश्री
हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार, आलोचक और शिक्षक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी का योगदान साहित्य के क्षेत्र में बहुमूल्य रहा है। वे गोरखपुर विश्वविद्यालय में हिंदी के विभागाध्यक्ष और साहित्य अकादमी के अध्यक्ष भी रहें। उनके शोध व आलोचना के 11 ग्रंथ, 7 कविता संग्रह, दो यात्रा संस्मरण, लेखकों का संस्मरण व एक साक्षात्कार पुस्तक प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने हिन्दी के कवियों, आलोचकों पर केन्द्रित 16 पुस्तकों का सम्पादन किया है।
धनीराम टोटो - पद्मश्री
टोटो जनजाति से आने वाले पश्चिम बंगाल के धनीराम टोटो को इस वर्ष जनजातीय साहित्य, इतिहास और संस्कृति के संरक्षण में किये गये उनके प्रयासों के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। तिब्बत से प्रस्थान की गई इस जनजाति के इतिहास और संस्कृति को मिशनरियों से बचाने और संरक्षित रखने के लिए धनीराम टोटो ने अपना पूरा जीवन संघर्ष में लगाया है।
जनम सिंह सोय - पद्मश्री
झारखंड के जनम सिंह सोय को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में पुरस्कृत किया गया है। उन्होंने झारखंड की स्थानीय और जनजातीय भाषाओं और उनके साहित्य में अपना योगदान दिया। वे पिछले चार दशकों से झारखंड की स्थानीय और जनजातीय भाषाओं के संवर्धन में लगे हुए हैं। उन्होंने अब तक 6 पुस्तकें लिखी हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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