पूरी जिंदगी एक ही इंसान से सेक्‍स करके नहीं गुजारी जा सकती हैं... ये है उसकी 'नारीवादी' सोच

By Lekhaka

एक व्‍यक्ति के साथ शादी करके पूरी जिंदगी उसके साथ बित‍ाना इस रिवाज या प्रथा को मोनोगेमी कहा जाता है जिसे दुनिया के हर कोने में ए‍क अच्‍छी नजर से देखा जाता हैं। पर पहली बार मैंने कुछ ऐसा सुना जो अजीब था और तब से मेरा आपसे भरोसा उठ गया क्‍योंकि ये बात आपसे सुनी थी। कैफेटेरिया में आप मेरे सामने दूसरी टेबल पर बैठी हुई थीं और मेरा ऑफिस में पहला दिन था। मैं दिल आप से कुछ कहना के लिए खुजला सा रहा था कि कहना चाह रहा था आप जो कह रही हैं, मेरी उसमें बिल्‍कुल दिलचस्‍पी नहीं हैं। शायद आप अपनी जिदंगी में दूसरों से अटेंशन पाने के लिए ऐसा करती हैं या कहती हैं।

नारीवाद की कैसी परिभाषा?

नारीवाद की कैसी परिभाषा?

कोई भी महिला ऐसा नहीं करती है। ये ठीक भी नहीं है। आप मेरी सीनियर हैं और आप हमेशा ऐसे लोगों को नीचा दिखाने की कोशिश करती हैं या नीचा देखती हैं जो अमेरिकन एक्‍सेंट में इंग्‍लिश में बात नहीं करते हैं। आपकी ऐसी अजीबो-गरीब सोच पर मेरी प्रतिक्रिया बहुत ही सरल और सहज होगी, कुछ फिर ऐसा होगा कि आप अपने पैरों तले कुचल देंगी। लेकिन मुझे भाषा और शब्‍दों का इस्‍तेमाल करना पसंद है, जोकि आप जानती हैं, लोग समझते हैं क्‍योंकि मैं आत्‍म-केंन्द्रित नहीं हूँ। हालांकि, मैं आपकी समस्‍या को भली-भांति जानता हूँ; सामान्‍य लोग आपसे सम्‍मान के लायक भी नहीं करते हैं। लेकिन आप एक नारीवादी है.. क्‍या नहीं हैं? मुझे अपने मित्र की वास्‍तविक तस्‍वीर आपको दिखानी है, आप सभी से ये लाउडली कह सकती हैं, ‘मैं कभी वन मैन वुमैन नहीं बन सकती हूँ।' ऐसा कहने से आप एक सशक्‍त नारीवाद नहीं बन जाती हैं, इससे सिर्फ आप अपनी छवि को धूमिल करती हैं।

कमिटमेंट फोबिया..

कमिटमेंट फोबिया..

डियर, तुम्‍हारे साथ एक दिक्‍कत है जिसे ‘कमिटमेंट फोबिया' कहा जाता है वैसे तो इसे S***ism भी कहते हैं। मुझे गलत मत समझना, लेकिन समाज में किसी भी महिला का ये रूप बहुत ही निराश करने वाला होता है जो इस तरह की बात करे।

फेमिनिस्‍ट या ?

फेमिनिस्‍ट या ?

आप अपने आपको फेमिनिस्‍ट बुलाती हैं। क्‍या आपको इसका मतलब भी पता है? फेमिनिस्‍ट यानि नारीवाद का अर्थ, महिला के अधिकार और पुरूष लिंग से समानता के लिए किया जाता है - ऐसी चीजें करना जो कि महिला के ह़क में नैतिक रूप से सही हों। और आपको ऐसा बोलकर लगता है कि आप सही हैं और आप महिलाओं के ह़क में काम कर रही हैं। नहीं, आप सिर्फ ‘बिगलैड़ या वेबफा' लड़कियों की तरफ होकर ये सब बोल रही हैं। आप कहती हैं कि एक ही इंसान के साथ जिदंगी भर रहना, शादी करना, जिस्‍मानी सम्‍बंध बनाना यानिक मोनोगैमी अप्राकृतिक हैं। आपके लिए ऐसा करना संभव नहीं है। आपका ऐसा मानना ही आपके रवैये को बयां करता है; आपको लगता है कि आप वैज्ञानिक रूप से इसे समझ चुकी हैं और प्रूव भी कर सकती हैं। शायद इन्‍हीं कारणों और रवैये के कारण आप अभी तक सिंगल हैं और अपने प्रिंस चार्मिंग से दूर हैं, जबकि आपकी उम्र 30 पार कर चुकी है। इन सब कारणों से आप फ्रस्‍टेट रहती हैं और अपनी झुंझलाहट लोगों पर उतार देती हैं।

नम्‍बफोमैनिया

नम्‍बफोमैनिया

मूल रूप से आप लोगों पर अपनी हताशा को थोपती हैं जब वो बैठे होते हैं और आपको देखकर आपके बारे में वॉव जैसा सोच रहे होते हैं। वह अपने नम्‍बफोमैनिया के बारे में बहुत अच्‍छी तरह से जानती हैं और वो बहादुर भी काफी है। आप चिन्‍ह् छोड़ सकती हैं, आप निश्चित रूप से ऐसा कर सकती हैं। मैंने कम से कम 20 लोगों से आपके बारे में सुना है और उन सभी का कहना है कि आपके विचार बहुत गहन हैं। आपको इस बारे में गर्व महसूस करना चाहिए। मिशन पूरा हुआ। लेकिन मैं अभी भी दुविधा में हूँ, क्‍या आप वाकई में ऐसा मानती हैं कि मोनोगैमी जैसी चीज़ दुनिया में नहीं होता है? वर्तमान समय में, कम से कम, अकेले रहने का जीवन भर का विकल्‍प आपके पास हमेशा है।

समानता और भेद

समानता और भेद

अगर बात सिर्फ शरीर की संतुष्टि की है तो कई लोगों से सम्‍बंध बनाना जरूरी है ऐसे में किसी एक के साथ कमीटमेंट की क्‍या जरूरत? क्‍यों किसी के इर्द-गिर्द ही अपनी सारी दुनिया बसा लेना चाहिए? मुझे पता है कि आपको ऐसा लगता है कि मोनोगैमी, किसी एक पुरूष के लिए बिल्‍कुल अलग है, शायद इसी बात से आपके नारीवाद में छुपे हाइपोक्रेट फॉर्म का पता चलता है। आप लिंग समानता में विश्‍वास करती हैं लेकिन आप लिंग भेद में भी भरोसा करती हैं। आप कुछ इसी तरह की इंसान हैं। इसीलिए आपने मान लिया कि आप अलग किस्‍म की इंसान हैं, इसीलिए आपको लगता है कि अगर कोई पुरूष कई लोगों से सम्‍बंध बनाता है तो वो इसे कैजुअल लेता है क्‍योंकि वो आदमी है जबकि वो खुद अपने पार्टनर को किसी और के साथ नहीं देख सकता है, आप महिलाओं के लिए भी ऐसा ही माहौल या सोच चाहती हैं जो आपकी लिंग समानता और भेद को लेकर अलग सोच साफ दिखाता है।

वक्‍त के साथ बदलाव

वक्‍त के साथ बदलाव

आप कहती हैं, मैं एक पुरूष को डेट कर रही हूँ लेकिन उससे शादी नहीं की। वो अभी भी इसे रिश्‍ते को परमानेंट रिलेशन बनाने के लिए आतुर है। आप जानते हैं क्‍यों? क्‍योंकि उसके पास दिल भी है। वो एक महिला को प्रेम करता है जो उसके लिए वफादार है। उसे लगता है कि आप दोनों एक दूसरे के साथ सहज हैं, आप एक साथ उम्र बिता सकते हैं और सपोर्ट कर सकते हैं। उम्र के हर पड़ाव पर आप एक-दूसरे का साथ दे सकते हैं।

मोनोगेमी, स्‍टूपिड सी सोच

मोनोगेमी, स्‍टूपिड सी सोच

हालांकि, आपने जो कुछ भी कहा है उसमें कुछ सच्‍चाई भी हो सकती है। आपका कहना है कि मोनोगैमी, स्‍टुपिड और अनरियलिस्‍टक है। आपने तो इसे अवास्‍तविक तक बता दिया। आप सही है, यह हर किसी के बस की बात नहीं है, कि वो प्‍यार कर सके, प्रतिबद्ध हो सके या त्‍याग कर सहे। जीवन में ये परिस्थितियां, आपकी इच्‍छा शक्ति की मांग करती हैं, ताकि आप इनसे हर तरीके से डील कर सकें। जो भी आपसे कहता है कि जीवन सरल है, मेरे ख्‍़याल से पूरी तरह से गलत बात है। जीवन सरल नहीं बल्कि कठिन जंग है। इसमें फन से ज्‍यादा मुश्किलें हैं। पर आपको बहुत से उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं जो आपके दृढ़ और मजबूत बनाते हैं और यही खुशियां बन जाती हैं। वहीं दूसरी ओर, आप अपनी स्‍मार्ट शब्‍दावली से लोगों पर हावी हो जाती है जोकि गलत है। प्‍यार में पड़ना एक सागर की तरह होता है जोकि बिन पानी का हो, अगर मोनोगैमी अस्तित्‍व में न होती।

कैसी सोच

कैसी सोच

ये बता तो वैसी ही हो गई कि रात में सोई किसी और के साथ, सुबह उठने पर कोई और मिला। ठीक वैसे ही जैसे आपके पास रॉल्‍स रॉयस है लेकिन आप बाजू वाले की बीएमडब्‍ल्‍यू देखकर रो रही हैं। मैं कल्‍पना भी नहीं कर सकता हूँ कि आप ये क्‍या सोच रही हैं।

शादी भटकाव नहीं हैं..

शादी भटकाव नहीं हैं..

शादी एक परंपरा कहिए या रिवाज, जिस रिश्‍ते को आपने कभी निभाया नहीं, उसके बारे में आप ऐसा कैसे कह सकती हैं, और लोगों को भी भटका रही हैं। आपकी सोच, विषैली है जोकि आसानी से लोगों के दिमाग पर चढ़ जाती हैं। अगर आप किसी प्रतिबद्ध रिश्‍ते में बंधना नहीं चाहती हैं तो जिदंगी भर अकेले रह लें, ये आपकी समस्‍या है। अपने जीवन में लोगों को इस बात की सलाह न दें कि वो ऐसा ही करें। मेरी तरह, सामान्‍य लोगों को सामान्‍य जीवन ही रास आता है, उन्‍हें आदत होती है हर सुबह एक ही चेहरा देखने की, इससे हमें गिल्‍ट महसूस नहीं होता है और न ही बुरा लगता है।

रिश्‍तों से डर

रिश्‍तों से डर

मुझे उस इंसान में अपनी जिदंगी भर की कमाई नज़र आती है, उस भरोसा बनता है, एहसास होता है कि हर पल कोई साथ है। मेरे दिल में आपके लिए अभी जो फीलिंग है उसे जानकर आपको बुरा लगा सकता है लेकिन सच ये है कि आपको किसी साइकोलॉजिस्‍ट को दिखाना चाहिए। आप किसी भी रिश्‍ते को निभाने में कायर और डरपोक हैं। आप डरकर भागती हैं और शायद इसी वजह से ऐसी बातें करती हैं।

ये फैक्‍ट कभी नहीं बदल सकता है, आपको बुरा लगा हो तो माफी चाहता हूँ लेकिन सच सही है। मेरी बात को सुनने के लिए शुक्रिया!

Story first published: Monday, February 26, 2018, 17:00 [IST]
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