Latest Updates
-
जुबिन नौटियाल ने उत्तराखंड में गुपचुप रचाई शादी, जानें कौन है सिंगर की दुल्हन -
Mango Varieties In India: तोतापुरी से लेकर बंगीनापल्ली तक, जानें भारत की प्रसिद्ध आम की किस्में और इनकी पहचान -
Heatwave Alert: दिल्ली समेत कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट, जानें भीषण गर्मी का सेहत पर असर और बचाव के टिप्स -
Guru Bhairavaikya Mandira: कर्नाटक का गुरु भैरवैक्य मंदिर क्यों है इतना खास? जिसका पीएम मोदी ने किया उद्घाटन -
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर भूलकर भी न खरीदें ये 5 चीजें, दरवाजे से लौट जाएंगी मां लक्ष्मी -
डायबिटीज में चीकू खाना चाहिए या नहीं? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट -
Aaj Ka Rashifal 16 April 2026: सर्वार्थ सिद्धि योग से चमकेगा तुला और कुंभ का भाग्य, जानें अपना भविष्यफल -
Akshaya Tritiya पर किस भगवान की होती है पूजा? जानें इस दिन का महत्व और पौराणिक कथा -
Parshuram Jayanti 2026 Sanskrit Wishes: परशुराम जयंती पर इन संस्कृत श्लोकों व संदेशों से दें अपनों को बधाई -
कौन हैं जनाई भोंसले? जानें आशा भोसले की पोती और क्रिकेटर मोहम्मद सिराज का क्या है नाता?
मुझे मेरी बेटी के कमरे से कंडोम मिला, अब मुझे इस बात की चिंता सताती है..
मैं 52 वर्षीय एक मां हूँ और मेरी बेटी बहुत ही चुलबुली है। मैंने स्वयं अकेले उसे पाला-पोसा है और उसका भी मुझसे बहुत लगाव है। वो थोड़ी हटकर है और उसमें जिज्ञासा बहुत ज्यादा है। मैंने उसके लिए कभी कोई सीमा निर्धारित नहीं की है। जहां तक मेरा मानना था कि मैं एक कूल पैरेंट थी। कोई और न कहे लेकिन मेरी बेटी का ऐसा मानना था। एक दिन मैंने अपनी बेटी के वार्डरोब से कंडोम का एक पैकेट पाया। मुझे बहुत गुस्सा आया और मैं अपना आपा खो बैठी। मैंने उस दिन से पहले कभी भी ऐसा नहीं किया था और वो आखिरी दिन था जब मेरी बेटी ने मुझे कूल मानना बंद कर दिया।

अब मेरे लिए जवान हो गई थी..
मैं उसे अब 24 साल ही जवान बेटी की तरह देखने लगी थी और सोच रही थी कि आखिर मेरी परवरिश में क्या कमी रह गई थी। मैं और मेरी बेटी; दोनों बहुत क्लोज थे और वो मुझसे एक-एक बात शेयर करती थी। यहां तक कि क्लास में लड़कों के साथ वो क्या शैतानियां करती है उसे भी वो खुलकर बताती थी। देर शाम पार्टी और ड्रिंक के लिए भी वो मुझे बताकर ही जाती थी। लेकिन शायद मैं ही बेवकूफ थी जो समझ बैठी कि शायद वो इससे आगे नहीं बढ़ेगी। मैंने कभी उसे सेक्स के लेवल तक जाते हुए नहीं सोचा था।
पर मेरी बेटी ने अपना बचाव करते हुए अपनी बात रखी कि अगर वो सेफ सेक्स करती है तो इसमें क्या बुराई है। मैंने उसे बताया कि ये सब गलत है और वो जो भी कर रही है वो बंद करना ही होगा। उसके बाद अलगे कुछ दिनों तक हमारी कोई बात नहीं हुई क्योंकि वो बहुत जिद्दी है और मैं उससे बहुत गुस्सा थी।

संकीर्ण सोच की
मेरी बात बहुत साधारण थी। वो कंडोम का इस्तेमाल कर सकती है लेकिन मुझे नहीं लगता कि उसने सही तरीके से सेक्स किया होगा। मुझे पता है कि जो लोग इस आर्टिकल को पढ़ रहे होंगे वो यही सोच रहे होंगे; खासकर यंग जेनरेशन के लोग कि मैं बहुत संकीर्ण सोच वाली हूँ या छोटी विचारधारा की हूँ। लेकिन मैं आपसे विनती करती हूँ कि मेरी बात और प्वाइंट को पूरा समझे बिना निष्कर्ष पर न पहुँचें।

सही से नहीं रख पाई बात
मैं अपनी बात उसके सामने सही तरीके से नहीं कह पा रही हूँ, शायद उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि मैं सोचती हूँ कि अगर कुछ हुआ तो मैं अपने स्वर्गीय पति को दिए गए वादे का पालन कैसे करूंगी? यह हमेशा एक प्रयास रहता है उन्हें इस बात का जिम्मेदार न ठहराया जाये कि वह हमें इतनी जल्दी क्यूँ छोड़कर चले गए। ऐसे में जब भी कुछ ऐसा होता है तो मुझे अपने ऊपर ही शक होने लगता है कि शायद मैं अच्छी मां नहीं हूँ। ये एक मां का कर्तव्य होता है कि वो अपने बच्चे को सही और गलत का फर्क करना सिखाये। मैं ज्यादा चिंता में इसलिए और रहती थी क्योंकि मैं एक बेटी की मां हूँ और जिसे असुरक्षित होने से बचाना है। क्योंकि हम ऐसे देश में रहते हैं जहां अगर कोई लड़की अपने पुरूष मित्र के साथ अकेली है तो उसे बलात्कार के लिए खुला ऑफर मान लिया जाता है और उसकी इज्जत को तार-तार कर दिया जाता है। ये चीजें ही मुझे मेरी बेटी की सुरक्षा के प्रति ज्यादा सवेंदनशील बनाती हैं और मैं यह जानकार डर गई कि इन दिनों मेरी बेटी, सेक्सुअल रिलेशनशिप में एक्टिव है।

उसे अहसास नहीं
मेरी बेटी, मेरे इस रवैये को एक विद्रोही या क्रांतिकारी की तरह महसूस कर सकती है क्योंकि वो हमेशा रूढिवादिताओं को तोड़ने और बिना नियमों के अपनी जिंदगी जीना चाहती थी। लेकिन उसे इस बात का एहसास भी नहीं है कि वह किसी भी चीज़ के वश में नहीं है। उसे लगता है कि कंडोम का इस्तेमाल करने से वो अनचाहे गर्भ से छुटकारा पा लेगी, उसके कोई यौन संक्रमण नहीं होगा पर वो गलत है।

खुलकर करनी चाहिए बात
कंडोम के इस पैकेट से उसे जो आनंद मिलता है वो एक झूठा आनंद है। असली आनंद तब ही मिलता है जब आप उस पुरूष के साथ होते हैं जो आपके साथ हर पल का साथ निभाने को तैयार हो। मुझे नहीं पता कि उसे किस तरह से इस बात को समझाया जाये। फिर मैंने इस "प्रेम पत्र" को पढ़ा। जैसाकि इस आर्टिकल में लिखा था ठीक वैसे ही मैं करना चाहती थी। मैं ऐसा घृणा के साथ नहीं बल्कि असलियत के साथ बताना चाहती थी। जब मैंने ‘हुक-अप' कंडीशन के बारे में बहुत विस्तार से पढ़ा और जाना तब मुझे एहसास हुआ कि अब मुझे मेरी बेटी से खुलकर बातचीत करनी चाहिए; बल्कि उससे ही नहीं उसकी उम्रदराज़ सभी लड़कियों से इस बारे में बात करना चाहिए। मेरी बात को समझने की कोशिश करें।
मैं आप सभी युवा लोगों से एक सवाल पूछती हूँ - युवा लोग अपने आप को बहुत ज्यादा आत्मनिर्भर और शक्तिशाली क्यूँ समझते हैं, क्या आप इसमें वाकई खुश हैं? क्या आप ऐसे तरीके से खुश हैं जहां आपको कोई भी विवरण नहीं देना पड़ता, आप पर कोई बंधन नहीं लगे हुए हैं जिसके साथ आप सेक्स करते हैं? क्या आप जिस इंसान के साथ ऐसे रिश्ते बनाते हैं वो आपके सही है? क्या आप वाकई में उस इंसान से सच्चा प्यार करते हैं?

प्यार कहां हैं?
आप सभी युवाओं की सोच बहुत सीमित हैं और आपको लगता है कि एक रबर का कवर आपकी सुरक्षा कर रहा है। जबकि किसी भी गैर इंसान के साथ जिस्मानी रिश्ते आपको अंदर ही अंदर खोखला बना देते हैं। मुझे बताइए, अगर आप इंसान हैं तो अपने आप को इस तरह अनजाने इंसान के साथ कैसे जोड़ सकते हैं? रिश्ता बनाने के बाद आप उसके साथ शारीरिक तौर पर अलग हो जाते हैं लेकिन मन में हमेशा वो ही खटकता रहता है। जब आप किसी के साथ सम्बंध बनाने जा रहे होते हैं तो वो सिर्फ आपके बीच की दूरी को कम करने का एक असंतोषजनक तरीका होता है।
एक वास्तविक, दूर-से निभाये जाने वाले रिश्ते भी चुनौती भरे होते हैं लेकिन उनमें प्यार होता है, उनमें क्षमता और इच्छा होती है उसे करते हुए आपको किसी बात का डर नहीं रहता है।

क्या कंडोम ही सुरक्षा है?
वैसे तो आप लोग हर दिन जिम जाते हैं, लो-कार्ब डाइट लेते हैं और शरीर को हेल्दी व ग्लोइंग रखने के लिए न जाने क्या-क्या करते हैं लेकिन जब बात सेक्स की आती है तो आप हेल्थ और ग्लो को भूल जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आप सिर्फ उतना ही स्वीकार करते हैं जिसमें आपको कोई बंदिश न लगी। आप दिखावे में आकर सेक्स को एंजाय करने की सोचते हैं जो आपकी सोच और मन दोनों को अंदर ही अंदर खराब बना देता है। सच्चाई ये है कि आपको मन को स्वस्थ रखने के लिए सोचना होगा। अब मुझे बताएं - क्या वाकई में कंडोम का इस्तेमाल, आपकी सुरक्षा है?

सोचना चाहिए इस बारे में?
इस तरह के कैजुअल सेक्स से आपके अंदर की इंसानियत कम होने लगेगी, आपकी भावनाएं न के बराबर रह जाएगी। ये आपकी एक रोजमर्रा आदत बन जाएगी जिसे आप कभी भी गंभीरता से नहीं लेंगे। लेकिन अगर आपको किसी से सच्चा प्यार हो जाता है और आप तब उसके साथ ऐसे सम्बंध में आते हैं तो आपमें कई सकारात्मक भावनाएं आएगी। किसी के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ना, शरीर को स्वस्थ बनाता है। आप खुद सोचिए, विचार कीजिए और अपने मन को हेल्दी रखने के लिए सही पार्टनर का चयन कीजिए। इंसान की तरह सोचिए, यहां ताकि जानवर भी हर किसी के साथ सेक्स करने के लिए तैयार नहीं होते बल्कि उनके भी पार्टनर अलग होते हैं। सोचो कि हमें क्या हो गया हैं? आगे की पीढ़ी में क्या होगा?

इमोशन होना चाहिए
आप सभी को आपके माता-पिता प्यार करते हैं, जिनका आपके साथ भावनात्मक लगाव होता है। ऐसे में आप प्रेमरहित न हो जाएं, भावनाओं को नष्ट न करें। मैं पिछले 16 सालों से विधवा हूँ और मैं कहती हूँ कि प्रेम (अच्छा सेक्स) वास्तव में पूरे जीवनकाल तक चलता है, और रिश्ते जोकि जरूरी नहीं कि शादी हो, वो जीवन की सबसे खूबसूरत चीज़ होती है।



Click it and Unblock the Notifications











