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Mother's Day 2026: मिलिए उन 7 जांबाज 'सुपर मॉम' से जिन्होंने बच्चों के साथ क्रैक किया UPSC, बनीं IAS
Mother's Day 2026: आज यानी 10 मई 2026 को मदर्स डे मनाया जा रहा है जो केवल मां के त्याग को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि उस अदम्य साहस को सलाम करने का मौका है, जिसके दम पर महिलाएं असंभव को संभव बनाती हैं। यूपीएससी (UPSC) जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा, जहां युवा एकांत में सालों तपस्या करते हैं, वहां इन महिलाओं ने घर, नौकरी और छोटे बच्चों की जिम्मेदारी के बीच सफलता का परचम लहराया। किसी ने नवजात के जन्म के 17 दिन बाद मुख्य परीक्षा दी, तो किसी ने अपने कलेजे के टुकड़े से दूर रहकर अपनी रैंक सुरक्षित की। ये 7 कहानियां केवल सफलता की दास्तां नहीं, बल्कि हर उस महिला के लिए उम्मीद की किरण हैं जो जिम्मेदारियों के बोझ तले अपने सपनों को दबा देती हैं। आइए मदर्स डे के खास दिन पर हम उन 7 महिलाओं की सफलता की कहानी सुनते व पढ़ते हैं जिन्होंने वो कर दिखाया जिसके बारे में लोग सोचते रह जाते हैं।

1. IAS अनु कुमारी: ममता का त्याग और AIR 2 का सफर
हरियाणा की अनु कुमारी की कहानी मानसिक मजबूती की मिसाल है। तैयारी के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि छोटे बेटे के साथ रहकर 100% फोकस करना नामुमकिन है। भारी मन से उन्होंने खुद को बेटे से दूर किया। सुबह 4 बजे से देर रात तक पढ़ाई और भावनात्मक उतार-चढ़ाव के बीच उन्होंने हार नहीं मानी। परिणाम स्वरूप, उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल कर देश को चौंका दिया।
2. IAS मालविका जी नायर: मातृत्व के 17वें दिन परीक्षा हॉल में
मालविका जी नायर ने जज्बे की नई परिभाषा लिखी है। उन्होंने अपने बेटे को जन्म देने के महज 17 दिन बाद UPSC मेन्स की कठिन परीक्षा दी। शारीरिक कमजोरी और नवजात की जिम्मेदारी के बावजूद वह परीक्षा केंद्र पहुंचीं। परिवार केंद्र के बाहर बच्चे को लेकर बैठा रहता था ताकि अंतराल में वह उसे फीड करा सकें। उनकी इस जांबाजी का इनाम उन्हें AIR 45 के रूप में मिला।
3. IAS निसा उन्निराजन: सुनने की अक्षमता और 7 साल का कड़ा संघर्ष
केरल की निसा ने साबित किया कि बाधाएं केवल मन में होती हैं। सुनने में परेशानी, दो छोटे बच्चे और 35 साल की उम्र में तैयारी शुरू करना चुनौतियां पहाड़ जैसी थीं। छह बार असफल होने के बाद भी वह नहीं रुकीं। सातवें प्रयास में उन्होंने UPSC 2024 पास किया। उनकी बेटियों का साथ ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
4. IAS पुष्पलता यादव: गांव की बहू से ऑफिसर बनने तक
रेवाड़ी (हरियाणा) के एक छोटे से गांव की पुष्पलता ने शादी और बच्चे के बाद अपनी पढ़ाई शुरू की। उनका संघर्ष ग्रामीण परिवेश की हर उस महिला का है जो चूल्हा-चौका संभालते हुए ऊंचे सपने देखती है। जब वह पढ़ती थीं, तब पति बच्चे को संभालते थे। दो बार की असफलता के बाद तीसरे प्रयास में उन्होंने AIR 80 हासिल कर समाज की रूढ़ियों को तोड़ दिया।
5. IAS मिननू पीएम जोशी: बिना कोचिंग और नौकरी के साथ मिली जीत
केरल की मिननू की जिंदगी संघर्षों की किताब रही है। कम उम्र में शादी और फिर मां बनने के बाद उन्होंने अपने पिता का सपना पूरा करने की ठानी। बिना किसी कोचिंग के, नौकरी और मातृत्व के बीच संतुलन बिठाते हुए उन्होंने 6 साल तक निरंतर मेहनत की और 150वीं रैंक के साथ IAS अधिकारी बनीं।
6. IAS पूनम दलाल दहिया: 3 महीने के बच्चे के साथ यूपीएससी क्रैक
पूनम दलाल दहिया की कहानी मल्टीटास्किंग का बेहतरीन उदाहरण है। जब उन्होंने 2015 में यूपीएससी क्लियर किया, तब उनका बेटा महज 3 महीने का था। एसबीआई में पीओ (SBI PO) की नौकरी और एक नवजात की देखभाल के साथ उन्होंने जिस तरह से समय निकाला, वह हर कामकाजी मां के लिए एक सबक है।
7. IAS पद्मिनी नारायण: प्रेगनेंसी और करियर के बीच संतुलन
पद्मिनी नारायण ने अपने सपनों को तब उड़ान दी जब वह जीवन के सबसे नाजुक दौर यानी प्रेगनेंसी पीरियड से गुजर रही थीं। गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के शुरुआती महीनों के कठिन समय में भी उन्होंने किताबों का साथ नहीं छोड़ा। उनकी अटूट निष्ठा ने उन्हें अंततः सिविल सेवा के उच्चतम सोपान तक पहुंचाया।
सुपर मॉम्स की सफलता के 3 बड़े मंत्र (Success Mantras)
मजबूत सपोर्ट सिस्टम: इन सभी कहानियों में एक बात कॉमन है परिवार (खासकर पति) का अटूट सहयोग।
समय का प्रबंधन: बच्चों के सोने के बाद रात में पढ़ना या सुबह 4 बजे जागना ही इनकी सफलता की कुंजी रही।
कभी हार न मानने वाला जज्बा: इनमें से अधिकांश ने पहले प्रयास में सफलता नहीं पाई, लेकिन मातृत्व ने इन्हें और भी धैर्यवान बनाया।



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