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वीर्य स्खलन से जुड़ी इन 5 तरह की समस्याओं से पीड़ित रहते हैं पुरुष
खराब लाइफस्टाइल और खानपान के कारण पुरुषों में स्खलन से जुड़ी समस्याएं काफी तेजी से बढ़ रही हैं और अधिकतर मामलों में तो लोगों को यह पता भी नहीं रहता कि वे इस तरह की किसी बीमारी के शिकार हैं।
कुछ मामलों में शरीर के अंदर चल रही किसी अंदुरुनी बीमारी की वजह से भी स्खलन से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। आकंड़ो के अनुसार लगभग 88% पुरुष ईजैक्यूलेट वॉल्यूम रिडक्शन के मरीज होते हैं। उसी तरह 62% मरीज डिलेड ईजैक्यूलैशन (देरी से वीर्य स्खलन) के मरीज होते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको ईजैक्यूलैशन से जुड़ी सभी समस्याओं के बारे में बता रहे हैं।

प्रीमैच्योर ईजैक्यूलैशन
सेक्स करते समय जब स्खलन समय से पहले हो जाता है तो इसे ही प्रीमैच्योर ईजैक्यूलैशन कहा जाता है। आकंड़ो के अनुसार हर तीन में से एक पुरुष स्थायी या अस्थायी रूप से इस बीमारी से पीड़ित रहता है।

डिलेड ईजैक्यूलैशन
कई बार सेक्स करते समय तक बहुत देर तक सेक्स करने के बावजूद भी वीर्य स्खलित नहीं होता है। यह भी एक तरह की समस्या है और लगभग 3-4% पुरुष इस समस्या से पीड़ित रहते हैं। ऐसे लोगों को सेक्स करने के बाद स्खलन करने के लिए हस्तमैथुन करना पड़ता है।

एनइजैक्यूलैशन
इस बीमारी से पीड़ित मरीज कभी भी सेक्स के दौरान स्खलित ही नहीं हो पाते हैं। हालांकि बहुत कम लोग इस बीमारी से पीडित होते हैं लेकिन अगर आपको ऐसे कोई लक्षण दिखे तो बिना देरी किये डॉक्टर से अपनी जांच करवाएं।

रेट्रोग्रेड इजैक्यूलैशन
यह एक ऐसी अवस्था है जब स्खलन के दौरान निकलने वाला वीर्य वापस ब्लैडर में चला जाता है और बाद में यह वीर्य पेशाब के साथ बाहर निकल जाता है। हालांकि यह कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन फिर भी आप अपनी जांच ज़रूर करवा लें।

डिक्रीज्ड फ़ोर्स
ये समस्या उम्रदराज लोगों में ज्यादा होती है। इसमें जिस फ़ोर्स के साथ वीर्य बाहर निकलता है वो फ़ोर्स कम हो जाता है जिस वजह से उस तेजी के साथ वीर्य बाहर नहीं निकल पाता है। इसके अलावा इससे पीड़ित मरीजों के वीर्य की मात्रा भी कम हो जाती है।



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