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बच्चे के गले में फंसी जेली बन गई मौत की वजह! अब एक्सपर्ट ने दी जरूरी चेतावनी
बीते दिनों मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई। यहां डेढ़ साल के एक मासूम बच्चे की दम घुटने से मौत हो गई। परिजनों ने उसे खाने के लिए जेली दी थी, जो उसके गले में फंस गई। इससे अचानक उसकी सांस रुक गई और उसकी जान नहीं बच सकी।
यह कोई पहली या आखिरी घटना नहीं है। ऐसा हादसा कभी भी, किसी भी परिवार में हो सकता है। इसलिए छोटे बच्चों की देखभाल करते समय विशेष सतर्कता बरतना बेहद जरूरी होता है, खासकर जब बात खाने की हो।
छोटे बच्चों को क्या खिलाएं और क्या नहीं? किन चीजों से चोकिंग (गले में फंसने) का खतरा ज्यादा होता है और अगर कभी ऐसी स्थिति आ जाए तो तुरंत क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं...

छोटे बच्चों को किन चीजों से दूर रखना चाहिए?
पेडियाट्रिशन डॉ. विवेक शर्मा बताते हैं कि छोटे बच्चों में हर चीज को मुंह में डालने की प्रवृत्ति होती है, फिर चाहे वो खाने की चीज हो या खिलौना। यह आदत उन्हें चोकिंग, इन्फेक्शन और प्वॉइजनिंग के खतरे में डाल देती है।
इन चीजों को बच्चों से दूर रखें
- जेली, च्युइंग गम, पॉपकॉर्न और टॉफी: ये आसानी से गले में फंस सकते हैं।
- ड्राई फ्रूट्स (खासकर साबुत बादाम, काजू, मूंगफली): छोटे बच्चों के लिए खतनाक हैं।
- साबुत अंगूर, चेरी या चेरी टमाटर: इन्हें छोटे टुकड़ों में काटे बिना न दें।
- नट्स, बीज और हार्ड कैंडीज: निगलने में परेशानी हो सकती है।
- खिलौने, सिक्के, बटन, छोटे प्लास्टिक आइटम: ये नॉन-फूड आइटम अक्सर बच्चे मुंह में डालते हैं और चोकिंग का कारण बनते हैं।
क्या बच्चों को देने चाहिए किड्स फ्रेंडली स्नैक्स?
बाजार में मिलने वाले 'किड्स फ्रेंडली' टैग वाले स्नैक्स हमेशा भरोसेमंद नहीं होते। कुछ में शुगर या नमक की मात्रा ज्यादा होती है, कुछ में हार्ड या चिकनी बनावट होती है जिससे गला फंस सकता है। इसलिए:
- हमेशा पैकेजिंग पढ़ें और देखें कि वह किस उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त है।
- बच्चे को अकेला छोड़कर खाना न दें।
- घर पर बना ताजा और नरम खाना हमेशा बेहतर विकल्प होता है।
क्या 6 महीने से 3 साल तक के बच्चों के लिए सेफ फूड गाइडलाइन है?
- WHO, CDC, NHS जैसी संस्थाएं बच्चों के पोषण और सुरक्षा को लेकर गाइडलाइन जारी करती हैं:
6 महीने: मां के दूध के साथ नरम प्यूरी या दलिया दें।
8 से 12 महीने: मैश किया हुआ फल, सब्जी, खिचड़ी दें।
1 से 2 साल: छोटे-छोटे, नरम और आसानी से चबाने योग्य टुकड़ों में खाना दें।
- तली-भुनी, बहुत मीठी, नमकीन या प्रोसेस्ड चीजें न दें।
- हर नया खाना धीरे-धीरे दें ताकि एलर्जी की पहचान की जा सके।
- खाना साफ हाथों से तैयार और परोसा जाए।
बच्चे को खाना देने से पहले किन सावधानियों की जरूरत है?
- बच्चे को बैठाकर खाना खिलाएं, लेटकर या चलते-फिरते खाना न दें।
- खाना छोटा-छोटा और नरम हो, ताकि बच्चा चबा और निगल सके।
- हमेशा बच्चे के पास रहें, निगरानी करें।
- खिलाने से पहले खुद चेक करें कि खाना बहुत गर्म तो नहीं।
- फोकस बनाकर खाना खिलाएं, टीवी या मोबाइल से ध्यान भटक सकता है।

अगर बच्चा चोकिंग कर जाए तो क्या करें?
- शांत रहें, घबराएं नहीं।
- बच्चे की पीठ पर हल्के थपकी दें (back blows)।
- अगर सांस पूरी तरह रुक गई हो तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं या 108/EMRI जैसे इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।
- CPR देना आता हो तो तुरंत शुरू करें।



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