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नवजातों में पीलिया होने का कारण और बचाव

कारण-
बच्चे के खून में बिलीरुबिन (पीला पित्त वर्णक) के बढ़ जाने कि वजह से उन्हें पीलिया होता है। खून के दा्रा जब यह बिलीरुबिन शरीर की स्किन में इकठ्ठा हो जाता है तब शिशु की चमड़ी का रंग पीला हो जाता है। इसके अलावा नवजात शिशुओं में अपरिपक्व जिगर होने की वजह से बिलीरुबिन को खून से अलग न कर पाने की वजह भी पीलिया होने का खतरा होता है। अगर बिलिरुबिन मल दा्रा नहीं निकाला जाता है तो वह आतों दा्रा सोंख लिया जाता है और यही पीलिया का सबसे बड़ा कारण बनता है। खास बात जो आपको पता होनी चाहिए वह यह कि पीलिया होने का मुख्य कारण शिशु का समय से पहले जन्म होना, अपरिपक्व जिगर या फिर स्तनपान होता है।
उपचार-
फोटोथैरेपी एक तरह की विधि है जो नवजात शिशुओं में पीलिया को कम करती है। इस विधि के दा्रान बच्चे को एक या दो दिन के लिए गर्म प्रकाश की किरणों के अंतर्गत रखा जाता है ताकि पीलिया कम हो जाए। यह शिशु के अंदर अतिरिक्त बिलिरुबिन को लूमिरुबिन में बदलकर उसे आसानी के साथ शरीर से पित्त या पेशाब के दा्रा बाहर निकाल देती है। इसकी किरणें इतनी तेज़ होती हैं कि इनसे निकलने वाली रौशनी बच्चे कि आखों को नुक्सान न पहुंचा सकती हैं इसलिए उन्हें गौगल पहनाए जाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, बच्चे को खूब सारा तरल पदार्थ यानी की दूध पिलाना चाहिए।
अगर इस प्रक्रिया से बच्चे का बिलिरुबिन का स्तर नीचे नहीं गया तो हॉस्पिटल में फाइबर ऑपटिक ब्लैंकेट जो फाइबर शीट की बनी होती है, उसके दा्रा शिशु का इलाज किया जाता है।



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