Latest Updates
-
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी -
Imran Khan Net Worth: भारत छोड़ने के आदेश के बाद इमरान खान की संपत्ति का क्या होगा? जानें कितनी है नेटवर्थ -
ग्रेटर नोएडा के इस गांव में आज भी होती है रावण की पूजा, दशहरे पर दहन बल्कि शोक मनाते हैं लोग -
Shardiya Navratri 2026 Day 6: नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
National Boss Day 2026 Wishes: कभी गाइड करते...बॉस डे पर अपने बॉस का दिल से कहें शुक्रिया, भेजें ये खास संदेश -
क्रिएटिनिन क्या होता है? जानें स्वस्थ किडनी के लिए क्रिएटिनिन का नॉर्मल लेवल कितना होना चाहिए -
Durga Puja Pandals in Delhi NCR: ये हैं दिल्ली-एनसीआर के टॉप 10 दुर्गा पूजा पंडाल, इस नवरात्रि जरूर करें दर्शन -
बारिश में बाल झड़ना कैसे रोकें: कारण, देखभाल और जरूरी पोषक तत्व -
Ashtami Navami 2026 Date: अष्टमी और नवमी कब है? जानें सही तिथि, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और महत्व
ऑक्सीमेट्री से बचेगी हृदय रोग संबंधी शिशुओं की जान
ब्रिटेन के वैज्ञानिको ने दावा किया है कि अब एक नई तकनीक से नवजात बच्चों में हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं को पहचाना जा सकता है। उनका दावा है कि पल्स ऑक्सीमेट्री नामक इस तकनीक से सैकड़ों नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकती है।

प्रतिवर्ष दुनिया भर में पैदा हुये शिशुओं को गंभीर हृदय समस्यायें होती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यदि उनकी सर्जरी न कराई जाये तो शिशुओं की जान को भी खतरा रहता है। कभी कभी इन समस्याओं के बारे में जानकारी नहीं मिलती। शिशुओं के बहुत बीमार पड़ने पर ही उनके मां बाप को इसके बारे में जानकारी मिलती है।
अभी मौजूद अल्ट्रासाउंड और चिकित्सीय तकनीकों से सिर्फ आधे मामलों में ही इन समस्याओं को पहचाना जाता है। प्रसिद्ध लांसेट जर्नल में छपे लंदन विश्वविद्यालय के इस शोध में कहा गया है कि दो मिनट में की जाने वाली पल्स ऑक्सीमेट्री जांच इस आंकड़े को 75 प्रतिशत तक पहुंचा सकती है।
इस जांच में नवजात के पंजे में एक क्लिप लगाई जाती है जिससे उसके शरीर में रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा को मापा जा सकता है। ऑक्सीजन के कम स्तर वाले शिशुओं को अन्य परीक्षण के लिये भेजा जाता है। डॉ शकीला थंगरतीनम ने कहा कि आमतौर पर शिशुओं में हृदय संबंधी समस्याऐं कम होती हैं पर उनके प्रभाव बहुत भयंकर हो सकते हैं।



Click it and Unblock the Notifications
