Latest Updates
-
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के उपाय -
CJP के बाद किसने शुरू की E20 जनता पार्टी? सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों फॉलोअर्स, जानें क्या है मांग -
कौन हैं Indian Idol 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? कैंसर मरीजों को देती थीं थेरेपी, अब है ये सपना -
Bank Holidays August 2026: अगस्त में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
APJ Abdul Kalam Death Anniversary: सपनों को पूरा करने का हौसला देते हैं डॉ. कलाम के ये 10 प्रेरणादायक विचार -
Jaya Parvati Vrat Katha: जया पार्वती व्रत में जरूर करें इस व्रत कथा का पाठ, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद -
Jaya Parvati Vrat 2026: जया पार्वती व्रत आज से शुरू, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व -
National Parents Day 2026 Wishes: आपकी उंगली पकड़कर चलना सीखा...पेरेंट्स डे पर माता-पिता को भेजें ये खास संदेश -
Kargil Vijay Diwas 2026 Wishes: तिरंगे की शान...कारगिल विजय दिवस के मौके पर अपनों को भेजें ये शुभकामना संदेश
ऑक्सीमेट्री से बचेगी हृदय रोग संबंधी शिशुओं की जान
ब्रिटेन के वैज्ञानिको ने दावा किया है कि अब एक नई तकनीक से नवजात बच्चों में हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं को पहचाना जा सकता है। उनका दावा है कि पल्स ऑक्सीमेट्री नामक इस तकनीक से सैकड़ों नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकती है।

प्रतिवर्ष दुनिया भर में पैदा हुये शिशुओं को गंभीर हृदय समस्यायें होती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यदि उनकी सर्जरी न कराई जाये तो शिशुओं की जान को भी खतरा रहता है। कभी कभी इन समस्याओं के बारे में जानकारी नहीं मिलती। शिशुओं के बहुत बीमार पड़ने पर ही उनके मां बाप को इसके बारे में जानकारी मिलती है।
अभी मौजूद अल्ट्रासाउंड और चिकित्सीय तकनीकों से सिर्फ आधे मामलों में ही इन समस्याओं को पहचाना जाता है। प्रसिद्ध लांसेट जर्नल में छपे लंदन विश्वविद्यालय के इस शोध में कहा गया है कि दो मिनट में की जाने वाली पल्स ऑक्सीमेट्री जांच इस आंकड़े को 75 प्रतिशत तक पहुंचा सकती है।
इस जांच में नवजात के पंजे में एक क्लिप लगाई जाती है जिससे उसके शरीर में रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा को मापा जा सकता है। ऑक्सीजन के कम स्तर वाले शिशुओं को अन्य परीक्षण के लिये भेजा जाता है। डॉ शकीला थंगरतीनम ने कहा कि आमतौर पर शिशुओं में हृदय संबंधी समस्याऐं कम होती हैं पर उनके प्रभाव बहुत भयंकर हो सकते हैं।



Click it and Unblock the Notifications