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ऑक्सीमेट्री से बचेगी हृदय रोग संबंधी शिशुओं की जान
ब्रिटेन के वैज्ञानिको ने दावा किया है कि अब एक नई तकनीक से नवजात बच्चों में हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं को पहचाना जा सकता है। उनका दावा है कि पल्स ऑक्सीमेट्री नामक इस तकनीक से सैकड़ों नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकती है।

प्रतिवर्ष दुनिया भर में पैदा हुये शिशुओं को गंभीर हृदय समस्यायें होती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यदि उनकी सर्जरी न कराई जाये तो शिशुओं की जान को भी खतरा रहता है। कभी कभी इन समस्याओं के बारे में जानकारी नहीं मिलती। शिशुओं के बहुत बीमार पड़ने पर ही उनके मां बाप को इसके बारे में जानकारी मिलती है।
अभी मौजूद अल्ट्रासाउंड और चिकित्सीय तकनीकों से सिर्फ आधे मामलों में ही इन समस्याओं को पहचाना जाता है। प्रसिद्ध लांसेट जर्नल में छपे लंदन विश्वविद्यालय के इस शोध में कहा गया है कि दो मिनट में की जाने वाली पल्स ऑक्सीमेट्री जांच इस आंकड़े को 75 प्रतिशत तक पहुंचा सकती है।
इस जांच में नवजात के पंजे में एक क्लिप लगाई जाती है जिससे उसके शरीर में रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा को मापा जा सकता है। ऑक्सीजन के कम स्तर वाले शिशुओं को अन्य परीक्षण के लिये भेजा जाता है। डॉ शकीला थंगरतीनम ने कहा कि आमतौर पर शिशुओं में हृदय संबंधी समस्याऐं कम होती हैं पर उनके प्रभाव बहुत भयंकर हो सकते हैं।



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