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बेबी के स्टूल के बारे में जरूरी जानकारियां
यहां तक कि आपको उसकी पॉटी पर भी ध्यान देना होता है क्योंकि बच्चे को सही स्टूल न आने का अर्थ है कि उसके स्वास्थ्य में कुछ न कुछ समस्या है।
जब आपकी संतान का जन्म होता है तो आपको बच्चे और साथ ही साथ अपने बारे में बहुत सी बातों को सीखना व समझना होता है। आप पूरी तरह से अलग तरह के व्यक्ति बन जाते हैं।
पहले आपको जिन बातों की कोई फिक्र नहीं होती थी, अब आपको उन बातों का ध्यान रखना होता है। छोटी से छोटी बात का ध्यान भी बहुत सतर्कता से रखना पड़ता है ताकि आपसे कोई चूक न हो जाएं।
पैरेंट बनने के बाद, लाइफ का पूरा फोकस बच्चे के ऊपर हो जाता है। बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता सबसे ज्यादा सताती है। यहां तक कि आपको उसकी पॉटी पर भी ध्यान देना होता है क्योंकि बच्चे को सही स्टूल न आने का अर्थ है कि उसके स्वास्थ्य में कुछ न कुछ समस्या है।

इसलिए हर अभिभावक को अपने बच्चे के स्टूल की जांच समय-समय पर करती रहनी चाहिए।बच्चे के स्टूल को लेकर आपको निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए:
क्या आपका बेबी सही से भोजन करता है?
आपके बेबी की उम्र क्या है?
क्या आपके बेबी ने सॉलिड फूड लेना शुरू किया है?
जब भी बेबी की पॉटी को लेकर मन में कुछ सवाल आएं तो सबसे पहले इन तीन सवालों के जवाब अपने मन में रखिए। इसके बाद बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में जानना शुरू कर दीजिए। बच्चे के स्टूल को लेकर कुछ प्रश्न और उनके उत्तर कुछ इस प्रकार है:

आपके बेबी को कितनी-कितनी देर पर पॉटी होती है?
वैसे तो बच्चों के लिए कोई सामान्य आवृत्ति नहीं तय है। लेकिन यह बच्चे को दी जाने वाली खुराक पर निर्भर करता है। यदि बेबी, मां का दूध पीता है तो उसे एक दिन में चार स्टूल तक हो सकते हैं, जोकि सामान्य सीमा है। यदि आपके बेबी को फॉर्मूला फीड कराया जाता है ताे उसे कब्ज भी हो सकता है। दूध से सॉलिड फूड देने के दौरान भी ऐसा होता है।

नवजात शिशु को कैसे स्टूल होते हैं?
एक नवजात के स्टूल में एमनियोटिक फ्लूड, बाल, मस्कस और अन्य अवशेष होते हैं तो उसके शरीर में गर्भ में मौजूद होते थे। बेबी को होने वाला पहला स्टूल गाढ़ा हरा या नीला होता है जो कि घबराने वाली बात नहीं है। ऐसा स्टूल होना इस बात का संकेत देता है कि बच्चे का स्वास्थ्य बिलकुल सही है।

फॉर्मूला फीड कराने वाले बेबी का स्टूल कैसा होगा?
यदि आपके बेबी को फॉर्मूला फीड करवाया जाता है ताे स्टूल थोड़ा गाढ़ा आता है। जबकि मां का दूध पीने वाले बच्चों का स्टूल थोड़ा पतला होता है। यह गाढ़ा पीला होता है और इसमें गंदी बदबू आती है। यदि बच्चे को चार दिन से ज्यादा बदबूदार और बहुत गाढ़ा स्टूल आये तो आपको डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।

सॉलिड फूड लेने की शुरूआत पर बेबी को कैसे स्टूल आते हैं?
जब बच्चा सिर्फ दूध पीता है तो उसे ऊपर बताए गए हिसाब से स्टूल होता है लेकिन जब वो सॉलिड फूड लेना शुरू करता है जैसे कि पालक की प्यूरी, दाल आदि तो स्टूल का रंग भी उसी फूड के अनुसार बदल जाता है। गाजर खाने पर स्टूल गुलाबी और पालक खाने पर हरा हो सकता है। ऐसे में आप देखकर घबराये नहीं। जब बच्चे को भोजन देना शुरू करें तो कोशिश करें कि उसे फाइबरयुक्त आहार दें। इससे बच्चे का विकास अच्छी तरह होगा और उसका स्टूल कुछ ही समय में वयस्क लोगों की तरह रंगत और बदबू में हो जाएगा।



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