ऐसे बनाइये अपनी प्रेगनेंसी को सफल

By Super

कुछ माँयें गर्भावस्था के लिये कई वर्ष पूर्व से ही योजना बनाती हैं। प्रसव विशेषज्ञ या पारिवारिक सलाहकार माँ बनने में मदद कर सकते हैं और जीवनशैली में विशेष बदलाव कर गर्भावस्था के दौरान माँ और शिशु दोनों को सेहतमन्द रख सकते हैं।

अपनी गर्भावस्था में स्वस्थ रहने तथा स्वस्थ शिशु को जन्म देने के लिये कुछ उपाय नीचे दिये गये हैं।

मोटापा कम करें

मोटापा कम करें

मोटापे के कारण न केवल गर्भ धारण करना कठिन हो जायेगा बल्कि गर्भावस्था भी मुश्किलों भरी हो सकती है। सामान्य भार वाली महिलाओं की अपेक्षा मोटापा युक्त महिलाओं में जटिलताओं का खतरा ज्यादा रहता है।

गर्भावस्था में व्यायाम जारी रखें

गर्भावस्था में व्यायाम जारी रखें

क्या आप योग से प्यार करती हैं? गर्भवती महिलाओं के लिये सामान्य व्यायाम जारी न रख पाने की कोई वजह नहीं हैं जब तक कि व्यायाम खतरे वाला न हो।

अधिक कैलोरी के लिये स्वस्थ भोज्य पदार्थ लें

अधिक कैलोरी के लिये स्वस्थ भोज्य पदार्थ लें

गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 300 अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यक्ता होती है, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप वसा और शर्करा युक्त भोजन लें। अतिरिक्त कैलोरी का स्रोत शुद्ध प्रोटीन हो सकते हैं। कुछ माँयें प्रोटीन संपूरक लेकर गर्भावस्था के पूर्व का आहार जारी रखती हैं।

भोजन की स्वच्छता का ध्यान रखें

भोजन की स्वच्छता का ध्यान रखें

कुछ भोज्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिन्हें गर्भावस्था को दौरान ना ही खाना सुरक्षित होता है। इन भोज्य पदार्थों से आपके शिशु को स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरे रहते हैं। लिस्टेरिऑसिस लिस्टेरिया जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है। हलाँकि इसकी सम्भावना कम ही होती है और सामान्यतः आपके स्वास्थ्य के लिये खतरनाक नहीं होता। लेकिन इससे गर्भावस्था में या जन्म के समय जटिलतायें हो सकती हैं। लिस्टेरिऑसिस से गर्भपात भी हो सकता है।

अपना विटामिन डी पाने के लिये पर्याप्त दूध पियें

अपना विटामिन डी पाने के लिये पर्याप्त दूध पियें

यह आपके और बच्चे, दोनो के दाँतों और हड्डियों के बनने के लिये सहायक है। कैल्शियम की 1000 मिलीग्राम मात्रा प्रतिदिन की आवश्यकता होती है। दूध के अलावा विटामिन डी के अन्य स्रोत दही, पनीर, सूर्य प्रकाश, मोटी मछलियाँ और अण्डे हैं। यदि आप मछलियों को विटामिन डी के स्रोत के रूप में लेने की सोच रही हों तो कम पारे वाली मछलियों का चयन करें।

फोलिक ऐसिड लेना सुनिश्चित करें

फोलिक ऐसिड लेना सुनिश्चित करें

फोलिक ऐसिड को ग्रहण करें। फोलिक ऐसिड बच्चे की रीढ़ की हड्डी के विकास में सहायक होता है और तन्त्रिका नलिकाओं को स्वस्थ रखता है। अतिरिक्त लाभ के रूप में यह पोषक तत्व आपकी उंगलियों और बालों के स्वस्थ विकास में भी सहायक है। फोलिक ऐसिड पालक, अण्डे, फलियों और यकृत जैसे भोज्य पदार्थों में भी पाया जाता है।

पर्यावरण और भावनात्मक तनाव के कारणों पर नजर रखें

पर्यावरण और भावनात्मक तनाव के कारणों पर नजर रखें

धूम्रपान करने वाले लोगों के साथ काम करना, रसायन और वायुप्रदूषण माँ और बच्चे दोनों के लिये हानिकारक होते हैं। इसके साथ ही जीवन के भवनात्मक तनाव गर्भावस्था के दौरान डिप्रेशन के खतरे को बढ़ा देते है।

धूम्रपान और मद्यपान जैसी आदतें छोड़ें

धूम्रपान और मद्यपान जैसी आदतें छोड़ें

इस बात में किसी लाग लपेट की जरूरत नहीं है। गर्भावस्था से पूर्व धूम्रपान से कैंसर हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान से कैंसर हो सकता है। गर्भावस्था के बाद भी धूम्रपान से कैंसर हो सकता है। गर्भवती महिला को अपनी तथा अपने बच्चे की सेहत के लिये धूम्रपान त्याग देना चाहिये। धूम्रपान के अलावा मदिरा से गर्भस्थ शिशु को फीटल ऐल्कोहॉल सिंड्रोम के कारण अपरिवर्तनीय हानि हो सकती है।

कैफीन की मात्रा कम करें

कैफीन की मात्रा कम करें

कॉफी, चाय, कोला और ऊर्जा पेय हल्के उत्तोजक होते हैं। इस बात की आशंका है कि कैफीन की अधिक मात्रा से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि कैफीन की अधिक मात्रा से आपके होने वाले बच्चे का भार कम हो सकता है।

पानी अधिक पियें

पानी अधिक पियें

प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन गर्भावस्था के दौरान शरीर में पानी को रोक कर उसे फुलाता है। इस प्रक्रिया से प्राकृतिक रूप से लड़ने के लिये गर्भवती महिलाओं को ज्यादा पानी पीना चाहिये। अधिक जल शरीर के सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिये वैसे भी अच्छा होता है।

रातों में भरपूर सोयें

रातों में भरपूर सोयें

गर्भवती माँ का शरीर उसे तथा उसके पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने के लिये अतिरिक्त कार्य करता है। नींद बहुत आवश्यक है, यहाँ यह बताना जरूरी हो जाता है कि गर्भावस्था के बाद शायद ही आपको भरपूर नींद मिल पाये। गर्भवती महिलाओं को हर रात 6 से 8 घण्टे अवश्य सोना चाहिये। दिन में भी थोड़ा सोने पर थकावट से राहत मिलेगी।

जन्म से पूर्व चिकित्सीय सावधानियों पर ध्यान दें

जन्म से पूर्व चिकित्सीय सावधानियों पर ध्यान दें

चिकित्सा के सम्बन्ध में बार-बार डॉक्टर से मिलना पहले तो खराब लगता है लेकिन पेशाब की छोटी-छोटी जाँचें और हृदय की धड़कनों की जाँच द्वारा बच्चे तथा गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के बारे में अनुमान लगाया जाता है। कभी-कभी हार्मोन के अचानक उतार-चढ़ाव से प्रसव विशेषज्ञ आपमें किसी समस्या के प्रति आगाह हो सकती हैं जबकि चिकित्सीय सावधानी न बरते जाने पर यह बात कभी भी पकड़ में नहीं आयेगी।

बचावकारी सावधानियाँ जारी रखें

बचावकारी सावधानियाँ जारी रखें

गर्भावस्था के दौरान आँख और दाँत के डॉक्टर से सम्भावित बीमारी से बचाव के लिये मिलना जारी रखें। मानव में गर्भावस्था 10 महीने की होती है। इस दौरान बच्चे की देखभाल के कारण माँ की देखभाल को बन्द नहीं किया जाना चाहिये।

रोजाना विटामिन की गोलियाँ लें

रोजाना विटामिन की गोलियाँ लें

गर्भावस्था की शुरूआत में फोलिक ऐसिड बहुत महत्वपूर्ण है इसलिये ज्यादातर महिलायें इसी से शुरुआत करती हैं। प्रतिदिन उसी समय वे निर्देशों के अनुसार विटामिन लेती हैं। जैसे-जैसे गर्भावस्था का समय बीतता जाता है विटामिन के प्रति समर्पण खो जाता है और दैनिक आपा-धापी में विटामिन कहीं छूट जाता है। इन विटामिनों को माँ के सम्पूर्ण स्वास्थ्य की दृष्टि से बनाया जाता जिससे इनका कुछ अंश बच्चे को भी मिल जाता है।

 सकारात्मक सोचें

सकारात्मक सोचें

हाल ही के तथ्यों के अनुसार मानसिक सोच और अच्छे बने रहने से स्वास्थ्य विकास पर असर पड़ता है। उदाहरण के लिये, यदि कोई महिला यह सोचती है कि किसी प्रकार की पोषण प्रणाली से उसका मोटापा कम हो जायेगा तो वास्तव में यह होता है। यही बात गर्भवती महिला पर भी लागू होती है। यदि वह सोचती है कि उसकी गर्भावस्था सफल होगी तो ऐसा अवश्य होगा।

थोड़ा आराम करें

थोड़ा आराम करें

शुरू के कुछ महीनों में जो आप थकावट महसूस करती हैं वह आपके शरीर में दौड़ रहे गर्भावस्था के उच्च हार्मोन स्तर के कारण होता है। लेकिन बाद में यह आपके शरीर के बताने का तरीका होता है कि आपको कुछ मन्द पड़ने की आवश्यकता है। अगर आप रात में पर्याप्त नींद न ले पायें तो दिन में उसे पूरा करने की कोशिश करें।

Story first published: Saturday, July 6, 2013, 15:08 [IST]
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