गर्भावस्था के दौरान इन 7 चीजों से रहें दूर

By Super

गर्भावस्था के दौरान आपको इस बात का विशेष ध्यान रखना पड़ता है कि आप क्या खाते हैं? कई बार आप सही दिशा में होते हैं, पर कई बार आप गलती भी कर जाते हैं। प्रेगनेंसी डाइट से थोड़ा बहुत समझौता चलता है, पर इसके पीछे एक मजबूत तर्क होना चाहिए।

आज हम आपको कुछ ऐसे भोजन के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें गर्भावस्था के दौरान वर्जित माना गया है। पुरूष प्रजनन क्षमता : मधुमेह ग्रसित पुरूषों के लिए सावधानियां

 कैफीन :

कैफीन :

अगर आप कैफीन लिए बिना कोई काम नहीं कर सकते तो दिन मे सिर्फ दो कप कैफीन ही लें। सबसे अच्छा यह है कि आप कॉफी से पूरी तरह दूरी बना लें। मुंबई की आहार विशेषज्ञ दीपशिखा अग्रवाल कहती हैं, ''गर्भावस्था के दौरान ज्यादा मात्रा में कैफीन लेना, खासकर पहले तीन महीने के दौरान, मिसकरेज और भ्रूण की दूसरी समस्याओं को जन्म दे सकता है। बेहतर होगा कि आप इसका सेवन संयमित मात्रा में करें।''

कच्चा पोल्ट्री और मछली :

कच्चा पोल्ट्री और मछली :

आपने पहले भी यह सुना होगा कि कच्चा पोल्ट्री, मछली और अंडा को गर्भवती महिला की डाइट में शामिल नहीं करना चाहिए। दीपशिखा कहती हैं, ''बिना पके सीफूड से मां को कई तरह का इंफैक्शन हो सकता है। कच्चा अंडा और मांस मां बनने वाली महिला में कई तरह के परजीवी बीमारी को जन्म देता है। अगर मां को किसी तरह का इंफैक्शन या परजीवी ​बीमारी हो जाए तो इसके भ्रूण तक पहुंचने की भी संभावना रहती है। इससे बच्चे का जन्म समय से पहले हो सकता है। साथ ही बच्चे का मानसिक विकास भी बाधित हो सकता है।''

बिना पाश्चरीकृत वाला पनीर और दूध :

बिना पाश्चरीकृत वाला पनीर और दूध :

गर्भावस्था के दौरान डेरी उत्पाद का सेवन अच्छा रहता है। यह आपकी कैल्सियम की जरूरतों को पूरा करता है। पर बिना पाश्चरीकृत किए हुए पनीर और दूध से दूर ही रहें। दीपशिखा कहती हैं कि ऐसे उत्पाद में बैक्टीरिआ बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं जो भ्रूण तक पहुंचकर मिसकरेज का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए सुरक्षित रहने के लिए दूध और पनीर का लेबल जरूर चेक करे लें। एफडीए ने दूध और पनीर पर पाश्चरीकृत लिखना अनिवार्य कर दिया है। अगर उनपर पाश्चरीकृत नहीं लिखा है तो ऐसे उत्पाद को न खरीदें।

स्ट्रीट फूड :

स्ट्रीट फूड :

गर्भवती महिलाओं के लिए सभी स्ट्रीट फूड खराब नहीं होते हैं। पर इसे बनाने में इस्तेमाल किया गया पानी और साफ-सफाई सबसे बड़ी चिंता होती है। दीपशिखा कहती हैं कि स्ट्रीट फूड से इंफैक्शन का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप ऐसे भोजन खाकर बीमार पड़ जाते हैं तो आपको दवाई का सहारा लेना पड़ेगा। सारे दवाई गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए अच्छे नहीं होते हैं। इसलिए जहां तक हो सके स्ट्रीट फूड से दूर ही रहें। इतना ही नहीं गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का इम्युनिटी आमतौर पर सामान्य से कम हो जाता है। इससे वे बड़ी आसानी से इंफैक्शका का शिकार हो जाती हैं।

शराब :

शराब :

शराब का यदा-कदा सेवन करने से कोई परेशानी नहीं होती है। पर अगर आप ज्यादा मात्रा में शराब का सेवन करेंगे तो आपको इससे होने वाली समस्या से सावधान रहना चाहिए। दीपशिखा महिलाओं को चेताते हुए कहती हैं कि गर्भावस्था के दौरान बहुत अधिक मात्रा में शराब पीने से बच्चा और उनके दिमाग का विकास ठीक से नहीं होता है। साथ ही इससे बच्चे के चेहरे की बनावट भी प्रभावित होती है।

सिगरेट :

सिगरेट :

देखा जाए तो सिगरेट गर्भवती महिला के स्वास्थ पर बहुत ही बुरा असर डालता है। दीपशिखा कहती हैं, ''इसमें न सिर्फ निकोटीन पाया जाता है, बल्कि स्मोकिंग से गर्भ में पल रहा बच्चा भी निकोटीन, कार्बन मोनेआक्साइड और टार के संपर्क में आ जाता है। इससे बच्चे तक कम मात्रा में आक्सीजन पहुंचता है और बच्चा जन्मजात दोष का शिकार हो जाता है। बच्चे का वजन कम हो सकता है या फिर उनके तालू में समस्या हो सकती है।''

ग्रीन टी :

ग्रीन टी :

ग्रीन टी एक तरह का हर्बल है और यह स्वास्थ के लिए काफी फायदेमंद होता है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान इसके सेवन से बचना चाहिए। दीपशिखा कहती हैं, ''ऐसे कई प्रमाण हैं, जिससे साबित होता है कि ग्रीन टी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान इसे न लेने का एक कारण यह है कि इससे मेटाबॉलिक रेट काफी बढ़ जाता है। गर्भावस्था के दौरान मेटाबॉलिज्म लेवल वैसे ही काफी ज्यादा होता है। इसके और ज्यादा बढ़ जाने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है।'' ग्रीन टी में कुछ कैफीन भी पाया जाता है। इसलिए बहुत अधिक मात्रा में इसके सेवन से चाय जितना ही नुकसान होता है। साथ ही ग्रीन टी के ज्यादा सेवन से फालिक एसिड का एब्जाप्शर्न कम हो जाता है। ऐसे में बच्चे में फालिक एसिड की कमी से होने वाली बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

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