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सिजेरियन नहीं नॉर्मल डिलीवरी चाहती हैं तो ध्यान में रखें ये बातें
किसी भी महिला के जीवन में मां बनना एक सुखद अनुभव है। बच्चे को जन्म देने के बाद एक औरत खुद को पूर्ण महसूस करती है। गर्भावस्था के दौरान वो कई पड़ावों से गुज़रती है। वो अपने ही अंश को बढ़ता हुआ अनुभव करती है।
ऐसे समय में उसके दिल और दिमाग में भी कई तरह के सवाल चल रहे होते हैं। इनमें से एक बात जो हमेशा उसके ज़ेहन में बनी रहती है वो है उसकी डिलीवरी कैसी होगी, नॉर्मल या फिर सी-सेक्शन।

बच्चे को जन्म देना ही एक जटिल और असहनीय दर्दयुक्त प्रक्रिया है। यदि नॉर्मल डिलीवरी होती है और महिला तथा बच्चा दोनों स्वस्थ होते हैं तो ये लॉन्ग टर्म के लिए दोनों के लिए फायदेमंद होता है। वहीं अगर किसी कारणवश गर्भवती महिला को सिजेरियन डिलीवरी का चुनाव करना पड़ा तो उसे लंबे वक़्त तक इसके दुष्प्रभाव को झेलना पड़ता है। इस ऑपरेशन से उन्हें उबरने में काफी समय की ज़रूरत पड़ती है।
जो महिलाएं प्रसव पीड़ा के भयंकर दर्द से बचना चाहती हैं वो सी-सेक्शन करवाती हैं तो वहीं कुछ महिलाओं को परिस्थिति की वजह से ये ऑपरेशन चुनना पड़ता है। लेकिन आमतौर पर लोग नॉर्मल डिलीवरी को तरजीह देते हैं। अगर आप भी नए मेहमान को लाने की प्लानिंग कर रही हैं तो आप सी-सेक्शन के बजाय नॉर्मल डिलीवरी के लिए प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों पर ध्यान दें।


खान-पान का उचित ध्यान
गर्भावस्था के दौरान खुद को हाईड्रेट रखना बहुत ज़रूरी है। आप उचित मात्रा में पानी पिएं। कैफीन जैसे उत्पादों जैसे चाय, कॉफी का सेवन कम कर दें। डाइट में ऐसी चीज़ों को शामिल करें जिससे आपको और आपके बच्चे को पोषण मिले। आप डॉक्टर की मदद से डाइट चार्ट तैयार करवा लें।

करते रहें व्यायाम
प्रेगनेंसी के दौरान जटिलताओं से बचने के लिए एक्सरसाइज़ करते रहें। इस दौरान भारी भरकम मूव्स बिल्कुल ना करें। यदि आप हल्की फुल्की मूवमेंट बनाकर रखेंगे तो ये आपके और आपके होने वाले शिशु के लिए लाभदायक होगा। यदि आप एक्सरसाइज़ नहीं करना चाहते हैं तो घर के हल्के और आसान काम आप किसी की निगरानी में कर सकती हैं। आप सैर पर जाने का ऑप्शन भी अपना सकती हैं। ऐसा करने से आपके नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है।
इस बात का ध्यान रखें की आपने इस बारे में अपने डॉक्टर से सलाह ली हो। उनसे आप अपने लिए उपयुक्त कसरत के बारे में भी पूछ सकते हैं। अगर आपको एक्सरसाइज़ को लेकर किसी भी तरह की शंका हो या फिर एक्सरसाइज़ करते वक़्त आपको थोड़ा भी असहज लगे तो तुरंत ऐसा करना बंद कर दे और अपने डॉक्टर से सलाह लें।

खुद को स्ट्रेस से रखें दूर
प्रेगनेंसी के दौरान एक महिला में कई तरह के बदलाव आते हैं। वो शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी प्रभावित होने लगती है। वो एक पल के लिए बच्चे के आने की ख़ुशी से झूम उठती है तो कई बार शरीर में उठने वाले दर्द से वो परेशान हो जाती है। ऐसी स्थिति में किसी भी गर्भवती महिला को तनाव होना सामान्य है। पहली बार मां बनने वाली औरतों में ये परेशानी ज़्यादा देखने को मिलती है। मानसिक तौर पर परेशान रहने से महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान परेशानियां बढ़ जाती है और ये भी एक कारक है जिसकी वजह से सी-सेक्शन का चुनाव करना पड़ता है। इन नौ महीनों के दौरान महिला के परिवार और पार्टनर को उसे खुश रखने की पूरी कोशिश करनी चाहिए। आप भी कोशिश करें कि तनाव को दिमाग में बिठाने के बजाय उसकी चर्चा किसी के साथ कर लें।

मेडिटेशन में बिताएं समय
प्रेगनेंसी में महिलाओं को तनाव से बचने के लिए मेडिटेशन का सहारा लेना चाहिए। ये आपके स्ट्रेस लेवल को कम करता है। साथ ही आपके अंदर मौजूद नई ज़िंदगी तक ऑक्सीजन की सही मात्रा पहुंचाता है। मेडिटेशन आपकी नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को भी बढ़ाता है।

चुनें सही डॉक्टर
प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा डॉक्टर चुनें जो शुरूआती चरण से आपकी डिलीवरी तक आपका मार्गदर्शन कर सके और आपको सही जानकरी दे। मौजूदा दौर के कई डॉक्टर और हॉस्पिटल आपको सी-सेक्शन की सलाह दे देते हैं। नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में सिजेरियन डिलीवरी ज़्यादा खर्चीली होती है। आप ऐसे डॉक्टर का चुनाव करें जिस पर आपको भरोसा हो और उन्हें आप शुरुआत में ही बता दें कि आप नॉर्मल डिलीवरी चाहती हैं।



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