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सरोगेसी बिल हुआ पास, अब हर किसी को नहीं मिलेगी 'किराए की कोख'
सरोगेसी यानी किराए की कोख, पिछले एक दशक में ये टर्म बहुत फेमस हो गया है। इसका फेमस होने का मुख्य वजह 'फैशन सरोगेसी' यानी सेलिब्रेटियों का सरोगेसी के जरिए मां-बाप बनने के अलावा भारत का 'सरोगेसी हब' बनना भी था। काफी समय से देशभर में सरोगेसी पर लम्बी बहस चल रही थी। सरोगेसी को व्यवस्थित करने के लिए लोकसभा ने बुधवार को सरोगेसी बिल पास कर दिया।
इस बिल के तहत कमर्शियल सरोगेसी को प्रतिबंधित किया गया है। सिर्फ मदद के मकसद से करीबी रिश्तेदारों द्वारा सरोगेसी अपनाए जाने को ही कानूनी करार देने का प्रावधान इस बिल में है। बिल के मुताबिक, समलैंगिक, सिंगल पैरेंट और लिव-इन पार्टनर्स किराए की कोख नहीं ले पाएंगे। हालांकि, कुछ महिला सांसदों ने मांग की कि सिंगल पैरेंट सरोगेसी के जरिए माता या पिता बन सकें, इसके लिए बिल में प्रावधान होने चाहिए। आइए जानते है कि इस नए बिल के अनुसार सरोगेसी से जुड़े नए नियमों में क्या कुछ नया है।

सरोगेसी का मतलब क्या है?
सरोगेसी यानी किराए की कोख, मेडिकल कारणों के अलावा कपल इसमें बच्चे पैदा करने के लिए किसी महिला की कोख किराए पर लेते हैं। किराए की कोख देने वाली महिलाओं को सरोगेट मदर कहा जाता है। आईवीएफ टेक्नोलॉजी के जरिए पति के स्पर्म और पत्नी के एग्स से बना एंब्रियो तीसरी महिला की कोख में इंजेक्ट किया जाता है। इससे जो बच्चा जन्म लेता है उसका डीएनए, सरोगेसी कराने वाले कपल का ही होता है।

बिल लाने का मकसद?
पिछले कुछ साल से भारत ‘सरोगेसी हब' कहलाया जाने लगा था, क्योंकि यहां कम खर्च में किराए की कोख मिल जाती थी। ग्रामीण और गरीब तबके से आने वाली महिलाएं ज्यादात्तर सरोगेट मदर बन रही थी। एक अनुमान के मुताबिक, सेरोगेसी करवाने वाली महिलाएंआईवीएफ सेंटरों को 20 से 50 लाख रुपए तक देते हैं। लेकिन किराए पर कोख देने वाली महिलाओं को 40 से 50 हजार रुपए मिलते हैं। भारत में सरोगेसी की कीमत बहुत ही कम है। जहां भारत सरोगेसी हब बन गया है, वहीं यूएस, ब्रिटेन, नेपाल, थाईलैंड जैसे कई देश सरोगेसी को गैरकानूनी करार दे चुके हैं।

कौन करवा सकता है सरोगेसी
- सिर्फ वे कपल्स सरोगेसी करा पाएंगे जो किन्हीं कारणों से माता-पिता नहीं बन सकते।
- भारत में सरोगेसी करवाने वाले कपल का भारतीय होना जरुरी है, विदेशी कपल को भारत में सरोगेसी का फायदा नहीं मिलेगा।
- ऐसे कपल्स जिन्हें शादी के पांच साल बाद भी बच्चा नहीं हुआ हो।
- सरोगेट मदर का करीबी रिश्तेदार होना जरूरी है। वह एक ही बार सरोगेट मदर बन सकती है।
- सरोगेट मदर और उससे संतान चाह रहे कपल को सक्षम अधिकारी से एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट लेना होगा।

कौन नहीं ले सकेंगे सरोगेसी का सहारा?
सिंगल पैरेंट, लिव-इन कपल्स, होमोसेक्शुअल कपल्स और अनमैरिड कपल्स। बिल के मुताबिक, ऐसे मामलों के लिए नेशनल सरोगेसी बोर्ड और स्टेट सरोगेसी बोर्ड बनाए जाएंगे। इन्हीं के जरिए सरोगेसी को रेगुलेट किया जाएगा। जिन कपल्स को पहले से ही बच्चे हैं, वे सेरोगेसी नहीं करा सकते। हालांकि, उन्हें एक अलग कानून के तहत बच्चा गोद लेने का अधिकार है।

ये भी ध्यान रखने वाली बात
- सरोगेट मां की उम्र 25-35 साल के बीच ही हो सकती है। वो ज्यादा से ज्यादा सिर्फ एक बार सरोगेट बन सकती है।
- सरोगेसी से बच्चा पैदा करने की कोशिश कर रहे जोड़े की उम्र 23 से 50 साल (स्त्री) और 26 से 55 साल (पुरुष) होनी चाहिए। जोड़े का भारतीय नागरिक होना ज़रूरी है।
- अगर कोई इन सबके बावजूद कमर्शियल सरोगेसी में संलिप्त पाया जाता है तो उसे दस साल तक की जेल हो सकती है।



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