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Ileana D'Cruz ने पोस्टपार्टम डिप्रेशन को लेकर शेयर किए एक्सपीरियंस, कैसे करें नई माएं इसे हैंडल
Ileana D'cruz Talks On Postpartum Depression : एक्ट्रेस इलियाना डिक्रूज फिल्मों से दूर इन दिनों अपना मदरहुड पीरियड एन्जॉय कर रही हैं। एलियाना ने 1 अगस्त 2023 को बेटे को जन्म दिया था। अब इलियाना डिक्रूज ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने अपनी बिना मेकअप की तस्वीर शेयर की है जिसके कैप्शन में लंबा पोस्ट लिखा है।
उन्होंने इस पोस्ट के जरिए पोस्टमार्टम डिप्रेशन के बारे में कुछ खुलासे किए हैं और बताया है कि मां बनने के बाद उनकी जिंदगी में कैसे बदलाव आए और अब वो किस दौर से गुजर रही है।

आइए इसी बहाने जानते है कि पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या होता है?
यहां देखिएं इलियाना डिक्रूज का पोस्ट
इलियाना कैसे कर रही हैं हैंडल?
इस पोस्ट में इलियाना ने बताया है कि वो खुद को इस सिचुएशन को हैंडल करने के लिए रोज 30 मिनट एक्सरसाइज करती हैं, 5 मिनट शॉवर लेती हैं और उसके बाद हेल्दी डाइट लेती है।एक्ट्रेस ने बताया कि अब वो अपने लिए समय निकालने लगी है तोउन्हें अंदर से खुशी मिल रही है।
क्या होता है पोस्टपार्टम डिप्रेशन?
पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण डिलीवरी के बाद देखने को मिलते हैं। ये एक मानसिक समस्या है, जहां महिलाओं की सोचने समझने की क्षमता पर नकरात्मक प्रभाव पड़ता है। इसकी एक बड़ी वजह नवजात शिशु की देखभाल को लेकर बढ़ी चिंता होती है।
हालांकि, डिलीवरी के बाद शुरुआत दिनों में सामान्य तनाव व थकावट और पोस्टपार्टम डिप्रेशन के बीच अंतर को बता पाना मुश्किल होता है। गर्भावस्था के दौरान या उसके बाद थकावट, उदासी या निराशा की भावनाओं का अनुभव करना असामान्य नहीं है, लेकिन अगर भावनाएं आपको अपने दैनिक कार्यों को करने से रोकती हैं, या आपको उदासीन बनाती है, तो यह पोस्टपर्टम डिप्रेशन का संकेत हो सकता है।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन की वजह
गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के बाद हार्मोन बदलाव भी पोस्टपार्टम डिप्रेशन की मुख्य वजह बनता है। गर्भावस्था के समय, प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजेन हार्मोन का स्तर सामान्य से अधिक होते हैं। डिलीवरी के बाद जब यह लेवल अचानक सामान्य हो जाता है। इस अचानक से हुए हार्मोनल चैंजेज के वजह से महिलाओं में डिप्रेशन होता है।
इसके अलावा एक बड़ी मांओं की नींद पूरी नहीं होना होता है, जिस वजह से थकावट की वजह से महिलाएं चिड़चिड़ा हो जाती है। इस नाजुक समय में अगर महिलाओं को इमोशनल सर्पोट नहीं मिल पाता है, तो स्वाभाविक रुप से वो धीरे-धीरे अवसाद का शिकार होने लगती हैं।
लक्षण
- बेवजह चिड़चिड़ा हो जाना या गुस्से में रहना
- मूड स्विंग होना
- अनियंत्रित भूख लगना या खाने के प्रति इच्छा नहीं होना
- लगातार वज़न बढ़ना
- उदासी
- दर्द होना या बीमारी का अहसास होना
- बेवजह रोना
- बच्चे की जरुरत से ज्यादा चिंता करना या बच्चे की प्रति लापरवाह हो जाना
- सबके प्रति व्यवहार में रुखापन आना
- हर समय थकान सी लगना
- नींद न आना
बचाव
पोस्टपार्टम डिप्रेशन से बचाव के लिए महिलाओं को अपनी डॉक्टर या मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग लें। इसके अलावा अपने पार्टनर या किसी करीबी से खुलकर बात करें। इस समस्या को इग्नोर करने से समस्याएं बढ़ सकती है। इस समय पार्टनर और घर के सदस्यों को भी प्रसूता को खूब इमोशनल सपोर्ट देना चाहिए।



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