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कामकाजी मम्मियों के बच्चे होते हैं अस्वस्थ

यह बात ऐसोचैम की एक जीवन-शैली से संबद्ध रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि 56 फीसद कामकाजी महिलाओं के बच्चों को मोटापे जैसी समस्या है, जिसके कारण बड़े होने पर उन्हें हृदय रोग और जिगर में वसा जमा होने जैसी बीमारियां हो सकती हैं। जो महिलाएं अंशकालिक तौर पर काम करते हैं उनके बच्चों के साथ ऐसी दिक्कतें बहुत कम थीं। सिर्फ 28 फीसद ऐसी महिलाएं हैं जिनके बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी समस्या है।
ऐसोचैम डेवलपमेंट फाउंडेशन की रपट में कहा गया कि घर में रहने वाली महिलाओं के बच्चे इनके मुकाबले बेहतर होते हैं क्योंकि वे पिज्जा, बर्गर, पास्ता और साफ्ट डिंक जैसे जंक फूड पर कम आश्रित होते हैं। यह सर्वेक्षण दिल्ली, मुंबई, पुणे, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और चंडीगढ़ समेत विभिन्न शहरों के 25 स्कूलों के 2,000 छात्रों पर किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया कि महानगरों में पांच में से एक बच्चा वजन का शिकार है और सामान्य वजन वाले बच्चों के मुकाबले इन बच्चों को बड़े होने पर मोटापे और इससे जुड़ी बीमारियां मधुमेह, हृदय रोग और जिगर की बीमारियां होने की संभावना होती है।



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