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क्या बच्चों के विकास में पालतू जानवर मदद करते हैं?
क्या बच्चों के विकास में पालतू जानवर मदद करते हैं?
जिस घर में छोटे बच्चे और पालतू जानवर जैसे- कुत्ता या बिल्ली हो, तो उनकी आपस में अच्छी दोस्ती हो जाती है। बच्चा, उसे कितना भी मार लें, परेशान कर लें लेकिन जानवर उस बच्चे को बेहद प्यार करता रहता है। उसकी केयर भी करता है, इस बारे में नेवला और सांप वाली कहानी भी लिखी जा चुकी है जिसमें एक नेवला ने बच्चे की रक्षा के लिए सांप को मार डाला था। पर क्या ये पालतू जानवर, आपके बच्चे के विकास में सहायक साबित हो सकते हैं। बढ़ते बच्चों के लिये कैल्शियम वाले आहार
सभी पालतू जानवर बच्चे के मानसिक विकास में सहायक हो सकते है और अगर उन्हे बच्चे की केयर के लिए ट्रेंड किया जाएं। घर में पालतू जानवर के होने से बच्चे में भावानात्मक, ज्ञानात्मक, सामाजिक और व्यवहारिक विकास संभव होता है। केयरिंग जानवर बच्चों की बहुत अच्छे से देखभाल करते है। बच्चे और जानवर के बीच की बॉन्डिंग अच्छी होने की वजह से ऐसा संभव हो सकता है। पालूत जानवर निम्म तरीकों से बच्चे के विकास में सहायक हो सकते है :

1) दायित्व : आप अपने बच्चे को गार्डन में खिलाएं या बाहर किसी पार्क में। अपने कुत्ते के साथ उसे छोड़ दें। कुत्ता, बच्चे के साथ मजे से खेलेगा और उसकी केयर भी रखेगा। इस तरह बच्चे को उसी अंदाज में खेलने को भी मिलेगा।
2) सच्चा प्यार : जानवर जब भी प्यार करते है तो उनकी कोई कंडीशन नहीं होती है। वह सिर्फ प्यार करते है। ऐसे में उनके मन में बच्चे को चोट पहुंचाने या नुकसान पहुंचाने का ख्याल कभी भी मन में नहीं आएगा और बच्चा भी उनके जैसा लविंग होगा।
3) फिजिकल एक्टीविटी : आपका पालतू जानवर कभी भी बैठता नहीं है तो वह बच्चे को भी बैठने नहीं देगा, इससे बच्चे का शरीर ज्यादा मूव करेगा और ज्यादा एक्टिव रहेगा। इस तरह से बच्चे का शारीरिक विकास अच्छी तरह होगा। पालतू जानवर के साथ खेलने से बच्चे को टीवी देखने की लत भी नहीं लगेगी।
4) इंटेलिजेंस : जानवर और बच्चे के बीच का सम्बंध, कॉन्सटेन्ट रिर्सच पर आधारित होता है। कई अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि पालतू जानवर के होने से बच्चे के इंटेलिजेंस में सुधार आता है। बच्चे ज्यादा सोचते है और उनके सोचने का तरीका एक दिशा में नहीं होता है।
5) जीवन का पाठ : पालतू जानवर के होने से बच्चे को जानवर और मनुष्य में फर्क, उनके रहन-सहन, खान-पान आदि में बारे में पहले से भी पता रहता है, बाद में कुछ भी बताने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। उन्हे अपना दोस्त मिल जाता है और बच्चे चिड़चिड़े नहीं होते है।



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