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आपकी इस आदत का बच्चों को भुगतना पड़ता है खामियाज़ा
शराबी माता-पिता बच्चों के लिए एक भयावह वातावरण बनाते हैं। यह साबित हो चूका है कि अल्कोहल शराबी में चिड़चिड़ेपन के स्तर को बढ़ाता है, इसलिए गुस्सा, कठोरता और गाली-गलोच (यदि शारीरिक हिंसा न हो) का लगातार प्रयोग उन घरों में देखा जाता है, जहां शराबी माता-पिता रहते हैं। शराबी या तो शराब पी रहे होते हैं, या गंभीर ख्यालों में होते हैं या शराब पीने के बाद संतुलन में रहने की कोशिश करते हैं; उनकी प्राथमिकताओं का झुकाव सिर्फ दारू एवं बियर की बोतलों की ओर ही रहता है। यदि आपका जीवन-साथी शराबी है, तो उस पर रोक लगाने का समय आ गया है क्योंकि उनकी शराब की लत उनके अपने जीवन को तो बर्बाद कर ही रही है साथ ही ये आपके बच्चों को भी सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचा रही है।

शराब पीने की लत आपके बच्चों को कैसे प्रभावित करती है?
1. जिन बच्चों की परवरिश शराब का सेवन करने वालों के घर में या शराबी माता-पिता द्वारा होती है वे शुरू में पूरी तरह से परेशान रहते हैं और उनके लिए यह समझना मुश्किल होता है कि शराब के प्रभाव में आकर उनके माता/पिता क्या व्यवहार करते हैं।
2. धीरे-धीरे वे इस समस्या से निपटना सीख लेते हैं किन्तु, कई लोग अपने माता-पिता के व्यवहार के द्वारा पैदा हुई शर्मिंदगी के डर के कारण मिलनसार नहीं हो पाते हैं। ये आगे चलकर उनके व्यक्तित्व पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
3. ऐसे बच्चे चिंतामुक्त जीवन नहीं जी पाते, जैसे आम बच्चों को जीना चाहिए। वे अपनी भावनाओं को दबाते हैं और चिंता और डिप्रेशन की चपेट में आ जाते हैं।
4. शराबी माता-पिता द्वारा निर्मित घर का वातावरण उनके बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य, ज्ञान-संबंधी कौशल और मस्तिष्क कार्य को धीमा कर देता है।
5. ऐसे बच्चे आत्म-सम्मान के अभाव, असुरक्षा, अविश्वास और बहुत सारे तनाव के साथ बड़े होते हैं, जिससे उनका भविष्य भी उत्साहहीन हो सकता है।
माता-पिता होने के नाते आप बच्चों के लिए क्या कर सकते हैं?
यदि आपके जीवन-साथी को शराब या अन्य पदार्थों की लत लगी है तो माता-पिता होने के नाते आपका सबसे पहला कर्तव्य अपने बच्चों को इस तरह के प्रभाव से बचाना और दूर रखना है। शराब की लत एक बीमारी है, न की आपकी जीवनशैली। दिन के अंत में एक या दो पैग पीना आराम या तनाव दूर करने का एक तरीका हो सकता है लेकिन, अगर यह इससे अधिक है तो वह आपके घर के माहौल को प्रभावित करता है आपको इसे बदलने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है।
अपने साथी को डी-एडिक्शन सेंटर के बारे में बताएं और शराब के इलाज के लिए उपयुक्त योजना बना लें। यदि इससे समस्या का हल नहीं होता है और इलाज करवाने वाले व्यक्ति का व्यवहार वही रहता है, तो उसे पुनर्वास केंद्र में भेजें। यह आपके साथी के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ वित्तीय और व्यावसायिक विकास के लिए भी उचित है। यह आपके बच्चों के लिए भी सही रहेगा, जिनके लिए एक प्रेमपूर्ण और देखभाल करने वाला वातावरण बनाना आपकी ज़िम्मेदारी है।
यदि आपका जीवन-साथी पुनर्वसन के बाद भी ठीक नहीं हो पा रहा है तो इस स्थिति को आपको और आपके बच्चों को भुगतना नहीं चाहिए। कानून की सहायता लेने का यही सही समय है। आपको एक अलग राह चुननी चाहिए क्योंकि अब आपकी प्राथमिकताएं अलग हैं।



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