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कहीं आपके बच्चें को अचानक झटके तो नहीं लगते हैं, जानिए बच्चों में मिर्गी के लक्षण और वजह
मिर्गी एक गंभीर किस्म की बीमारी है जो वयस्कों के साथ हर 200 बच्चों में से एक बच्चें में देखने को मिलती है। हम में से हर कोई जानता है कि मिर्गी दिमाग की बीमारी है और इसमें दौरे पड़ते हैं। दिमाग इलेक्ट्रिकल नेटवर्क से बना हुआ है। इसमें लाखों करोड़ों नेटवर्क होते हैं और इन्हीं के बल पर पूरी शरीर अपना काम करता है। कभी-कभी जब इस इलेक्ट्रिक नेटवर्क में कुछ गड़बड़ी आ जाती है तो दिमाग का बैलेंस बिगड़ जाता है। तो व्यक्ति को दिमाग का दौरा पड़ता है। हर दौरे को मिर्गी का दौरा भी नहीं कहा जा सकता है। जब किसी बच्चे में इस तरह का मामला बार-बार होता है और अचानक से ही हो जाता है तो इसे मिर्गी कहते हैं।

बच्चों में मिर्गी के लक्षण
- मांसपेशियों में कठोरता
- अचानक मांसपेशियों में झटके लगना
- ऐंठन होना
- मांसपेशियों में मरोड़ आना
- मूत्राशय और मल पर नियंत्रण न रहना
बोलने में मुश्किल होना
- बार-बार एक ही गतिविधि करना जैसे- ताली बजाना या हाथों को रगड़ना

बच्चों में मिर्गी के कारण
कुछ बच्चों को मिर्गी की समस्या अनुवांशिक होती है। इसमें जीन्स किस तरह से मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं और किस तरह यह मिर्गी की वजह बनते हैं इसका पता नहीं लगाया जा सका है। सिर की चोट के बाद भी बच्चों को दौरे पड़ने लगते हैं। विशेष तरह की स्थितियां जैसे- बुखार, ब्रेन ट्यूमर, इन्फेक्शन आदि की वजह से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचना। बच्चों को धीरे-धीरे बढ़ने वाली समस्याएं जैसे एंगलमैन्स सिंड्रोम, न्यूरोफाईबरोमेटोसिस, डाउन सिंड्रोम और टूबेरौस स्क्लेरोसिस आदि होने पर भी मिर्गी की संभावनाएं बढ़ जाती है।

किसी भी उम्र में हो सकती है
मिर्गी किसी भी उम्र में हो सकती है। इसके लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता है। बच्चे के जन्म के पहले दिन भी किसी नवजात में मिर्गी के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई लोगों को बुढ़ापे में भी मिर्गी के मामले सामने आते हैं. यह भी जरूरी नहीं कि इसी समय में मिर्गी की बीमारी चालू हो, तकनीकी रूप से समझें तो किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में मिर्गी के लक्षण आ सकते हैं।

बचाव के तरीके
बच्चे को पर्याप्त नींद लेने दें, क्योंकि नींद की कमी बच्चों में दौरे का कारण होती है। बच्चे को सिर को चोट से बचाने के लिए उसके सिर पर स्कैट या साइकिल चलाते समय हेलमेट पहनाएं। बच्चे को रोजाना एक ही समय पर दौरों को कम करने वाली दवा देना ना भूलें। बच्चे को गिरने से बचाने के लिए उसको सावधानी से चलने के लिए कहें। किसी तेज रोशनी या अधिक शोर वाली जगह पर बच्चे को ना ले जाएं, क्योंकि ये भी कई बार दौरे पड़ने की वजह बनाते हैं।



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