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अंगुलियों पर गिनती करने वाले बच्चें होते हैं तेज, चुटकियों में हल कर देते हैं गणित के सवाल
बचपन में हम सभी ने गिनती, जोड़, भाग और गुणा करना अंगुलियों पर करना ही सीखा है। देखा जाए तो असल में किसी भी तरह की ट्रिक या कैलकुलेटर पर मुश्किल सवालों को हल करने से पहले हम सभी तरह की गणना अंगुलियों पर ही करते आए हैं। हाल ही में 'फ्रंटियर ऑफ एजुकेशन' नामक जर्नल में छपी एक रिसर्च में भी खुलासा हो चुका है कि अंगुलियों पर गणना करने की आदत बहुत अच्छी हैं और इससे बच्चे बुद्धिमान बनते है। छटपट अंगुलियों पर की जाने वाली गणित की इन गणनाओं को छोटे बच्चों को भी सीखाना आसान हैं। इसलिए जितना हो सके, अपने बच्चों को गणित के सवालों के दौरान अंगुलियों पर ही गणना करने दें। क्योंकि यह गणित सीखने का आसान और मूलभूत तरीका है।

क्या है रिसर्च
अंगुलियों पर की जाने वाली गणना बेहतर हैं, इसी तथ्य को साबित करने के लिए, इस रिसर्च में 137 विधार्थियों को शामिल किया। इन सभी बच्चों को गणति के कुछ सवाल हल करने को कहा गया। इस दौरान जिन बच्चों ने अंगुलियों पर सवाल की गणना की उन्होंने टेस्ट में बेहतर स्कोर किया। यह बच्चे बाकि बच्चों के मुकाबले सवालों को आराम से और तार्कसंगत रूप से सुलझा पाएं। इससे यह बात भी मान्य हो जाती है कि जब-जब कुछ नया सीखने या फिर पढ़ाई करने की बात होती हैं तो हमारी अंगुलियां हमारे लिए एक बेहतरीन टूल की तरह ही काम करती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चे जब अंगुलियों का इस्तेमाल करते हैं तो उनका दिमाग भी फुर्तीला हो जाता हैं। इसी वजह से बच्चे आसानी से काम कर पाते हैं।
इसलिए होता है ऐसा
शरीर के बाकि अंगों की तरह ही अंगुलियां भी दिमाग से एक एक्टिव नर्व के साथ जुड़ी हुई होती हैं। न्यूरोबायोलॉजी की मानें तो, जब हम अंगुलियों का इस्तेमाल करते हैं तो सोमेटोसेंसरी कॉर्टेक्स (somatosensory cortex, दिमाग का एक हिस्सा जो किसी भी तरह के स्पर्श को समझता हैं) में कुछ हरकत होती हैं। इस तरह की हलचल या फिर हरकत तभी होती हैं जब हमें किसी तरह की गर्मी, दर्द, रगड़ महसूस हो या फिर हम अंगुलियों का इस्तेमाल करते हैं।
इस रिसर्च के दौरान 6-10 साल के उन बच्चों के दिमाग को स्केन किया, जिन्होंने मध्यम से लेकर हाई लेवल तक के सवालों को हल किया था। जिसमें सामने आया कि जिन बच्चों ने गणित के सवालों को अंगुलियों पर किया उनका दिमाग में बाकि बच्चों के मुकाबले ज्यादा सुधार हुआ। बीतते वक्त के साथ हमारा दिमाग अंगुलियों के इस्तेमाल का इतना आदि हो चुका होता है कि वह कई बार डबल चेक करने के लिए अपने आप अंगुलियों को गणना करने का ऑर्डर दे देता है।



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