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कब भेजें अपने बच्चे को प्रीस्कूल?, जानें सही वक्त और उम्र
क्या आप भी उन लोगों में शामिल है, जिनका रूझान इस समय देश-दुनिया की खबरों से ज्यादा अपने बच्चे के लिए अच्छे प्रीस्कूल के बारे में जानने में ज्यादा है। लेकिन क्या आप जानते है अपने लाडले को प्रीस्कूल में भेजने की एक निश्चित उम्र होती है, साथ ही एक निश्चित परिस्थिति के बाद ही बच्चे को प्रीस्कूल भेजना सही माना जाता है। देखा जाए तो पेरेंट्स अक्सर ये सोचते हैं कि बच्चे की ढाई-तीन साल उम्र होने पर ही उन्हें प्री स्कूल (Play school) में भेजना सही है। क्यूंकि यहां जाकर बच्चा कुछ सीख जाएगा और किसी बड़े स्कूल में एडमिशन में होने वाले इंटरव्यू के लिए वो जल्दी तैयार हो जाएगा। लेकिन, एक रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है कि बच्चों को समय से पहले स्कूल भेजने से उसके बिहेवियर पर बुरा इफेक्ट पड़ता है। यहां हम आपको बच्चे को प्री-स्कूल भेजने का सही समय बताने के साथ ही प्री-स्कूल भेजने से होने वाले बेनिफिटस के बारे में बताने जा रहे है।

बच्चे को प्रीस्कूल भेजने का सही समय
हर पेरेंटस अपने बच्चे के भविष्य को लेकर चिंतित होते है। और एक पैरेंट के रूप में आप हमेशा अपने बच्चे के लिए सब कुछ बेस्ट करना चाहते हैं। लेकिन जब बात बच्चे को प्रीस्कूल भेजने की आती है, तो पेरेंटस सही उम्र को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं। वैसे ये बिल्कुल सामान्य बात है, क्यूंकि ज्यादातर प्रीस्कूल कम से कम ढाई साल की उम्र के बच्चों को लेने की परमिशन देते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं हुआ कि हर बच्चा जो इस उम्र तक पहुंच जाए, वह प्रीस्कूल जा सकता है। क्यूंकि हर बच्चा न केवल शारीरिक रूप से बल्कि सामाजिक और भावनात्मक रूप से भी अलग तरह से बढ़ता है। इसलिए, ये जरूरी है सभी कारकों पर विचार करके ही बच्चे को प्ले स्कूल भेजने जैसा महत्वपूर्ण निर्णय लेना चाहिए।
कैसे पता करें कि क्या आपका बच्चा प्रीस्कूल के लिए तैयार है?
प्रीस्कूल जाने वाले बच्चे को फिजिकली और इमोशनली स्ट्रांग बनाना बहुत जरूरी है। साथ ही बच्चे को कुछ बेसिक चीजें खुद से करने की जरूरत है, जैसे कि भोजन करना, पानी पीना, टॉयलेट जाना, खेलने के बाद हाथ धोना, अकेले सोना इत्यादि। दरअसल ये सब चीजें बच्चे के नॉर्मल रूटीन में होती है। घर पर भले ही ये सब काम करने के लिए आप उसके पास हो, लेकिन प्ले स्कूल में उसे ये सब खुद से करना होगा।
बच्चों को प्रीस्कूल भेजने के लाभ
- प्रीस्कूल जाने से बच्चों में सेल्फ सपोर्ट की भावना विकसित होती है और उसे अपनी खुद की पसंद की चीज को चुनने का अवसर मिलता है, बच्चों में ये स्किल भविष्य में उपयोगी साबित होती है।
- प्रीस्कूल जाकर बच्चा आत्मनिर्भर बन जाता है, क्यूंकि यहां उसको खाने, सोने, हाथ धोने जैसे रोजर्मरा के काम खुद से करते हैं।
- प्री-स्कूल जाने से बच्चा लोगों के बीच में बोलना सीख सकता हैं। प्रीस्कूल में बच्चों को कक्षा में कविता, कहानी, पार्थना, एक्टिंग जैसे विभिन्न वर्बल एक्टिविटीज में शामिल किया जाता है, ताकि बच्चे की पर्सनेलिटी को बेहतर बनाया जा सके।
- प्री-स्कूल में बच्चे सभी एक्टिविटीज ग्रुप में करते हैं। ऐसे में वो लोगों के सामने बिना किसी घबराहट या डर के अपनी मन की बात खुलकर रखने और दूसरों से बातचीत करने का हुनर भी सीख सकते हैं।
- प्रीस्कूल आपके बच्चे को सर्कल टाइम, स्टोरी टेलिंग, बुक रीडिंग आदि एक्टिविटीज के जरिए फोकस करना सिखाता है। बल्कि यहां अकादमिक लर्निंग के साथ-साथ प्ले टाइम का भी बैलेंस बनाकर रखा जाता है।
- प्री स्कूल में बच्चे कई एक्टिविटीज के साथ ही, डिसीप्लेन और टाइम मैनेजमेंट का पाठ भी सीख सकते हैं। यहां पर रहते हुए बच्चे को हर काम के लिए अपने टीचर की परमिशन लेनी होती है। इसके अलावा, उन्हें अपने टास्क को एक फिक्स टाइमलाइन में पूरा और खत्म करना भी होता है।



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