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‘पेरेंट्स का परफेक्ट होना है जरूरी’, जानें पेरेंटिंग से जुड़े और मिथक

दुनिया के हर महिला पुरुष की लाइफ में सबसे खुशी का पल माता-पिता बनना होता है। लेकिन एक बच्चे के साथ लाइफ जीना जितना मजेदार होता है, उससे कहीं ज्यादा ये चुनौतियों से भरा होता है। छोटे बच्चे की केयर से लेकर उनके बड़े होने तक जीवन के हर पहलू पर पेरेंट्स को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हर साल पेरेंटिंग के मायने हम बदलते हुए देखते हैं। क्योंकि हर साल आपके सामने आपके बच्चों को लेकर नई-नई चुनौतियां आती रहती हैं। ऐसे में हर पेरेंट्स के मन में पेरेंटिंग को लेकर कई तरह के सवाल आते हैं, क्योंकि हर किसी के परवरिश का तरीका अलग होता है। सभी माता-पिता अपने बच्चों के लिए एक परफेक्ट पेरेंट्स बनना चाहते हैं। लेकिन कई बार कुछ ऐसी बातें हैं, जो आप बच्चों की भलाई के लिए करते हैं, लेकिन वो बातें आपके बच्चों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ मिथकों के बारे में जिसे अधिकतर पेरेंट्स सच मानते हैं।

मिथक 1 - ‘बच्चों के साथ सख्ती से आए पेश’
बच्चे की पढ़ाई और करियरर को लेकर अक्सर पेरेंट्स उनके साथ सख्ती से पेश आते हैं। पेरेंट्स को लगता है कि उनके ऐसा करने से बच्चे पढ़ाई में अच्छा स्कोर कर पाएंगे और करियर पर भी पूरी तरह ध्यान लगा पाएंगे। आपकी सख्ती उन्हें कंट्रोल में रखेगी। लेकिन ये सोच बिल्कुल गलत है। बच्चों के गलत करने पर उन्हें डांटे, लेकिन कुछ गलतियों पर उन्हें डांटने की जगह आप प्यार से भी बच्चों को समझा सकते हैं। सिर्फ डांटने और सख्ती से बच्चा आपसे डरकर रहेगा और बच्चे की आपसे दूरी बनने लगेगी।

मिथक 2 -‘परफेक्ट पेरेंट्स होना जरूरी’
दुनिया के हर माता-पिता को अपने आस-पास के लोगों से सिर्फ यहीं सुनने को मिलता हैं, कि हर पेरेंट्स का परफेक्ट होना जरूरी होता है। पेरेंट्स को ये कहा जाता है कि अगर बच्चे के सामने आपको कोई अच्छा एग्जांपल सेट करना है तो आपको परेफेक्ट पेरेंट्स बनना होगा। ये बात सच है कि बच्चे अपने माता-पिता से ही सीखते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं की आप खुद पर परफेक्ट पेरेंट्स बनने का दबाव डाले। दुनिया में कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता है। ऐसे में एक माता-पिता कैसे परफेक्ट हो सकते हैं। तो सबसे पहले आप अपने दिमाग से इस तरह की धारणा को निकाल दें, कि आपका परफेक्ट पेरेंट्स होना जरूरी है।

मिथक 3 -‘बच्चों को टोकना जरूरी’
बच्चों को टोकना जरूरी होता है, अक्सर हमने लोगों से ये बात सुनी है। लेकिन ऐसा करने से बच्चों पर गलत असर हो सकता है। दरअसल बार-बार बच्चों को टोकने से उनके मन में आपको लेकर डर बन जाता है। भले ही वो आपके मुताबिक काम करने लगे, लेकिन आपके ऐसा करने से उनके आत्मविश्वास में कमी आ जाती है। इतना ही नहीं बच्चे और आपके रिश्ते में भी दूरी भी बनने लगती है।

मिथक 4 -‘बच्चों के सामने घर की प्रॉब्लम डिस्कश करने से बचें’
कई बार घर में माता-पिता के अपनी बातों को एक दूसरे के सामने रखने में झगड़े की स्थिति में पहुंच जाती है। ऐसे में घर के बड़े उन्हें बच्चों को घर की बातों से दूर रखने की सलाह देते हैं। ताकि बच्चों पर इसका गलत असर न हों। लेकिन आप अपनी समस्या बच्चों के सामने ही सुलझाने की कोशिश करें। लेकिन इस दौरान कोशिश करें कि आप बच्चों के सामने समझदारी से अपनी प्रॉब्लम सुलझाएं। ताकि बच्चों को आपसे ये सीखने को मिले कि बिना तेज आवाज के अपनी बात किसी के सामने कैसे रखनी है। बच्चा ये भी सीख पाएं कि बिना झगड़े के अपनी परेशानी से कैसे निपटा जा सकता है, इस बात के लिए उनके सामने एक उदाहरण सेट करें।



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