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निप्पल पियर्सिंग के साथ शिशु को ब्रेस्टफीड करवाना सुरक्षित है या नहीं, जानें यहां
पियर्सिंग आमतौर पर ब्रेस्टफीडिंग को इफेक्ट नहीं करता हैं। निपल्स के पीछे स्तन के ऊतकों में स्थित स्तन ग्रंथि में दूध का उत्पादन होता है। लेकिन बच्चे को दूध पिलाते वक्त इससे बच्चे को जरुर परेशानी हो सकती हैं। निप्पल आपके शरीर के अधिकांश अन्य पियर्सिंग वाले क्षेत्रों की तुलना में ठीक होने में अधिक समय लेता है।
इसे पूरी तरह ठीक होने में 6 महीने तक का समय लग सकता है। यदि पियर्सिंग हाल ही में करवाई गई है या अभी पूरी तरह से वो एरिया हील नहीं हुआ है, तो संक्रमण, फोड़े या अन्य कॉम्प्लिकेशन भी हो सकता है। यदि आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं तो अपने निप्पल पियर्सिंग कराने के लिए कुछ समय इंतजार कर लें। आइए जानते हैं कि जिन मांओं ने पियर्सिंग करवाई हैं, उन्हें ब्रेस्टफीडिंग के साथ क्या समस्याएं हो सकती हैं।

इंफेक्शन का खतरा
निप्पल संवेदनशील ऊतक होते हैं और दूध नलिकाओं से जुड़े होते हैं। कुछ अन्य प्रकार के पियर्सिंग की तुलना में एक निप्पल पियर्स के संक्रमित होने की संभावना अधिक रहती है। किसी भी गैर-कीटाणुरहित उपकरण से पियर्सिंग कराने से एचआईवी, हेपेटाइटिस बी या सी, या टिटनस जैसे रक्त-जनित रोगों के संक्रमण का खतरा रहता है। जिन बच्चों को वैक्सीन नहीं लगा गया हो, पियर्सिंग की वजह से बच्चें में हेपेटाइटिस सी जैसे रोग शिशु को प्रेषित हो सकते हैं।
स्तनों पर हो सकते हैं फोड़े
पियर्सिंग से स्तन फोड़े का विकास हो सकता है जो कभी-कभी विकसित होने और दूध उत्पादन में बाधा आ सकती है।

मुंह में जाने का खतरा
निप्पल रिंग और अन्य स्टड समय के साथ खराब हो जाते है या स्तनपान के साथ ढीले हो सकते हैं और बच्चे के मुंह से होते हुए गले में जाने का खतरा रहता है, जिससे बच्चे का दम घुट सकता है।
दूध आने में रुकावट
आपके निप्पल रिंग दूध नलिकाओं को अवरुद्ध कर सकते है। दूध को बाहर आने में भी रुकावट कर सकते है। इसके अलावा निप्पल के आसपास काफी गहरा निशान भी बन सकता है।
( डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई सभी जानकारी और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। Boldsky Hindi इसकी पुष्टि नहीं करता है। इन चीजों पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। )



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