Latest Updates
-
SRH की मालकिन काव्या मारन की शादी हुई तय! कौन है दुल्हा, कब और कहां होगी वेडिंग, जानिए पूरी डिटेल्स -
Ashtami Kab Hai: 18 या 19 अक्टूबर, कब है अष्टमी? जानें सही तारीख, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और पारण का समय -
Shardiya Navratri 2026 Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग, आरती -
Navratri Day 7 Wishes: मां कालरात्रि का आशीर्वाद...इन संदेशों के साथ अपनों को भेजें महासप्तमी की शुभकामनाएं -
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी -
Imran Khan Net Worth: भारत छोड़ने के आदेश के बाद इमरान खान की संपत्ति का क्या होगा? जानें कितनी है नेटवर्थ -
ग्रेटर नोएडा के इस गांव में आज भी होती है रावण की पूजा, दशहरे पर दहन बल्कि शोक मनाते हैं लोग -
Shardiya Navratri 2026 Day 6: नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
National Boss Day 2026 Wishes: कभी गाइड करते...बॉस डे पर अपने बॉस का दिल से कहें शुक्रिया, भेजें ये खास संदेश
डिलिवरी के बाद होते भावनात्मक बदलाव
शिशु के जन्म के बाद कई महिलाओं में भावनात्मक बदलाव होते हैं। अतः आप तनाव को कम करने के लिए कई तरकीबें आजमा सकती हैं। प्रसव के बाद की उदासी काफी गंभीर हो सकती है, इसलिए मदद माँगने से ना घबराएँ। शिशु के जन्म के तुरंत बाद आप में कई परिवर्तन होने लगते हैं। अब जब आपका बच्चा आपके हाथों में है, तो शायद आप कुछ भावनात्मक बदलाव महसूस करती होंगे। ये नीचे दिए गए भावनात्मक बदलाव हो सकते हैं।
भावनात्मक तौर पर होने वाले बदलाव
बेबी ब्लूज़
कई महिलाएँ प्रसव के कुछ दिनों या हफ़्तों बाद चिड़चिड़ापन, उदासी, रोना या चिंता जैसे भाव अनुभव करती हैं। इन बेबी ब्लूज़ को अनुभव करना बहुत आम बात है और ये आपके शारीरिक परिवर्तनों के कारण हो सकते हैं (जैसे हार्मोनल बदलाव, थकावट, शिशु के जन्म के अनपेक्षित अनुभव आदि) और एक नए जीवन के आने से आपकी बदलती भूमिका के साथ भावनात्मक परिवर्तनों का ताल-मेल। कुछ हफ़्तों के बाद ये बेबी ब्लूज़ भी खत्म हो जाते हैं।

प्रसवोत्तर अवसाद (पी.पी.डी)
यह बेबी ब्लूज़ से ज्यादा गंभीर और लंबे समय के लिए रह सकता है, यह समस्या 10% से 25% नई माँओं में पाई गई है और इसे में मूड़ स्विंग, चिंता, दोष, निरंतर उदास रहने जैसे भाव उत्पन्न होते हैं। पी.पी.डी की पहचान बच्चे के जन्म के एक साल के भीतर की जा सकती है, और यह उन महिलाओं में बहुत आम है जो पहले कभी डिप्रेशन का शिकार रहीं हो, या जीवन की कई समस्याओं से तनाव में हो, या डिप्रेशन की समस्या परिवारिक हो।
इसके अतिरिक्त, जब बात यौन संबंध की हो, आप और आपके साथी की इच्छाएं अलग- अलग हो सकती हैं। आपका साथी आपके साथ एक और संबंध बनाना चाहता है जो गर्भअवस्था के दौरान कहीं छूट गया था, जबकि आप यह नहीं चाहती- ना शारीरिक रुप से ना भावनात्मक रुप से- जबकि आपकी इच्छा केवल एक अच्छी नींद पाने की होती है। डाक्टर कई बार महिलाओं को डिलिवरी के कुछ हफ्तों तक सेक्स ना करने की सलाह देते हैं क्योंकि यह घावों के भरने के लिए बहुत जरुरी है।
उपचारात्मक क्रिया
जितना समय आपके शरीर को एक शिशु पैदा करने में लगता है, उतना ही समय आपको ठीक होने में लगता है। अगर आपकी डिलिवरी सीजेरियन सेक्शन(सी-सक्शन) से हुई है, तो आपको ठीक होने में ज्यादा समय लगेगा क्योंकि सीजेरियन से हुई डिलिवरी को ठीक होने में अधिक समय लगता है। अगर यह अनपेक्षित था, तो इसे भावनात्मक समस्याएँ भी हो सकती हैं।
आपके शरीर को पूरी तरह ठीक होने में समय लगता है। संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए, अधिक रक्ततस्राव और उपचारात्मक टिशू को फिर से खुलने से रोकने के लिए डाक्टर 4-6 सप्ताहों के लिए सेक्स ना करने की सलाह देते हैं।
अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की शुरुआत चुंबन, आलिंगन, या अन्य किसी क्रिया द्वारा अभिव्यक्त करें। शुरुआत में योनि स्नेहक थोडा सा कम होगा (जो हार्मोन के कारण थोडा सा अस्थाई होगा), अतः पानी आधारित स्नेहक काफी लाभदायक साबित होगा। यौन क्रियाकलाप दौरान ऐसी स्थिती में रहें जिसे आपके पीड़ादायक जगाहों पर कम दबाव पड़े और आपके लिए ज्यादा आरामदायक हो। अगर यौन क्रियाकलाप दौरान आपको दर्द या घबराह महसूस हो तो अपने साथी को बताएँ-इसके बारे में बात करके, आप दोनों की व्याकुलता थोडी कम होगी और यह आपकी यौन जीवन की नई शुरुआत करने में मदद करेगा।



Click it and Unblock the Notifications
