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प्रेगनेंसी के बाद शारीरिक बदलाव
अंततः आपका शिशु आपको मिल जाता है, और आप रोमांचित होती हैं- लेकिन आप भावनात्मक रूप से थकी हुई, बेचैन है तथा आश्चर्य भाव से भरी हैं कि क्या आप फिर से आपकी जींस आपके फिट आ पायेगी और आप उसे पहनने के लायक हो जायेंगी। चाइल्ड बर्थ क्लासेज ने आपको शिशु को जन्म देने के लिये तैयार किया था, लेकिन आप इन सब चीजों के लिये तैयार न थीं!
आपके शिशु के आने के पश्चात, आपको अपने अन्दर कुछ परिवर्तन दिखाई पड़ेंगे- शारीरिक व भावनात्मक दोनों प्रकार के। शारीरिक परिवर्तनों को आप महसूस कर सकती हैं:

दर्दभरे स्तन
आपके स्तनों में दूध उतरने पर कई दिनों तक वे दर्द से भरे रह सकते हैं, तथा आपके निपल्स में भी दर्द होता है।

कब्ज
प्रसवोत्तर कुछ दिन बाद मलत्याग होता है, तो संवेदनशील बवासीर, डाक्टर द्वारा प्रसव हेतु भगछेदन शल्य क्रिया तथा दुःखती मांसपेशियां इसे दर्दभरा बना देती हैं।

भगछेदन
आपका मूलाधार (योनि व गुदा के बीच का त्वचा क्षेत्र) यदि प्रसव के लिये चिकित्सक ने उसे काटा है, या वह जन्म देने के दौरान फट गया था, तो टांके लगे होने के कारण उठना-बैठना कष्टकारक हो सकता है। छींकते या खांसते समय भी इसमें दर्द हो सकता है।

हेमोरायड्स
हालांकि आमतौर पर बवासीर ( गुदा द्वार के समीप रक्त से भरी फूली रक्त वाहिनियां) सामान्यतः अप्रत्याशित होती हैं।

गर्म व ठंडा बदलाव
नये हार्मोनों के प्रति आपके शरीर का समायोजन तथा रक्त प्रवाह का स्तर आपके आंतरिक थर्मोस्टेट पर कहर बरपा सकता है।

मल-मूत्र पर संयम न रह पाना
प्रसव के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव की वजह से, खासकर लम्बे लेबर पेन्स के पश्चात हुये सामान्य योनि प्रसव की स्थिति में, खांसते, छींकते, हंसते या दबाव पड़ने पर आपको अपने मलमूत्र त्याग क्रिया पर नियंत्रण नहीं रह जाता है और अन्जाने में ही आपका मूत्र त्याग हो सकता है।

जन्म पश्चात दर्द
शिशु को जन्म देने के बाद कुछ दिनों तक आपका गर्भाशय संकुचन की प्रक्रिया में रहता है। ऐसा ज्यादातर देखने में आता है जब आप बच्चे की देखभाल करती हैं या रक्त बहाव को कम करने के लिये आपको दवा दी जाती है।

योनि स्राव (जेर)
शुरूआत में पीरियड्स से ज्यादा बड़े व थक्कायुक्त, योनि स्राव होता है जो धीरे-धीरे सफेद या पीला हो सकता है और फिर कुछ हफ्तों बाद यह रूक जाता है।

वजन
प्रसव बाद आपका वजन आपके सामान्य वजन से कम सम्भवतः 12 या 13 पौंड होता है(बच्चे का वजन,प्लेसेन्टा तथा एम्नियोटिक एसिड) कम हो जाता है। और अतिरिक्त पानी का वजन भी प्रथम सप्ताह में कम हो जाता है एवं आपका शरीर अपना संतुलन पुनः प्राप्त करने लगता है।



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