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डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में होते हैं ये बड़े बदलाव..
गर्भावस्था के दौरान गर्भवती के शरीर में अत्यधिक हार्मोनल चेंजेस की वजह से परिवर्तन होता है, लेकिन अधिकतर महिलाओं की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील हो जाती है, जिस के कारण उन्हें त्वचा संबंधी कई परेशानियों जैसे स्ट्रेच मार्क्स, खुजली, मुंहासे, पिग्मैंटेशन और प्रसव के बाद त्वचा का ढीला पड़ जाना आदि का सामना करना पड़ता है। कई महिलाओं को प्रसव के बाद या प्रसवोत्तर अवसाद यानि डिप्रेशन हो जाता है। मूड का बदलना, तनाव, चिंता आदि इस दौरान होना स्वाभाविक होता है।

नई मां को अपने ऊपर एकदम से बच्चे की जिम्मेदारी आ जाने से वह मन ही मन घबरा उठती है और उसे तनाव हो जाता है। इससे बचने के लिए आवश्यक है कि नई मां सही खुराक लें, अच्छे माहौल में रहें और बच्चे के साथ अच्छा समय बिताएं। हम आपको बोल्डस्काई के इस आर्टिकल में गर्भावस्था के कुछ शारीरिक परिवर्तनों के बारे में बता रहे हैं जो कि निम्न प्रकार हैं:

बेरंग त्वचा में सुधार होगा
गर्भावस्था के दौरान त्वचा के रंग में फर्क पड़ने लगता है और वह सामान्य नहीं रहती है। लेकिन प्रसव के बाद यह स्वाभाविक रंग में आने लगती है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में दाने होने वाली समस्या भी दूर हो जाती है।

कब्ज
गर्भावस्था के बाद कब्ज की समस्या हो सकती है, विशेष रूप से अगर प्रसव ऑपरेशन के द्वारा किया गया है। ऐसे मामलों में, फाइबर युक्त आहार का सेवन करें और खूब सारा पानी या जूस पिएं। दिन में दो गिलास दूध का सेवन भी अवश्य करें। इससे कब्ज में राहत मिलेगी।

ऊर्जा स्तर में बढ़ोत्तरी होना
गर्भावस्था के बाद कई महिलाओं के ऊर्जा स्तर में अचानक से बढ़ोत्तरी हो जाती है। यह शरीर में होने वाले परिवर्तन का ही हिस्सा है।

कमर में दर्द
गर्भावस्था के दौरान, शरीर बिल्कुल सीधा हो जाता है जिसका सबसे ज्यादा असर कमर और रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है। साथ ही शरीर का पूरा भार, कमर की मांसपेशियों पर आ जाता है। जिसके परिणामस्वरूप कमर में दर्द होने लगता है। कभी-कभार बेकार तरीके से बैठने से भी कमर में दर्द होने लगता है।

बालों का गिरना
सामान्य तौर पर प्रतिदिन 100 बालों का गिरना स्वाभाविक होता है। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान हारमोन्स में परिवर्तन होने के कारण बालों के गिरने में बढ़ोत्तरी हो सकती है। प्रसव के बाद शुरूआती 6 महीने में यह समस्या सबसे ज्यादा होती है।

स्ट्रेच मार्क
प्रसव के बाद पेट पर लाल रंग के स्ट्रेच मार्क पड़ जाते हैं जो बाद में सिल्वर कलर के हो जाते हैं और कुछ समय बाद त्वचा के समान ही हो जाते हैं

स्तनों का आकार बदलना
डिलवरी के 1-2 दिनों के बाद आपके ब्रेस्ट में सूजन हो जाएगी जो कि दूध से भरे हुए प्रतीत होंगे। ब्रेस्ट से दूध रिसने लगेंगे। आप जैसे ही स्तनपान करवाएंगी आपके ब्रेस्ट फिर से नार्मल हो जाएंगे।

योनि स्राव
प्रसव के बाद शीघ्र ही योनि स्राव शुरू हो जाता है जो कई हफ्तों तक लगातार होता रहता है। इस योनि स्राव में रक्त भी होता है जो गर्भाशय अस्तर से निकलता है।

पेट में परिवर्तन
प्रसव के बाद महिला का पेट थैले की तरह हो जाता है। लेकिन कुछ समय के बाद दैनिक जीवन की शुरूआत के साथ ही साथ पेट भी अपनी सामान्य अवस्था में आ जाता है। लेकिन पेट निकलने से बचाने के लिए महिला को व्यायाम करने की आवश्यकता होती है।

खूब पानी पीएं..
जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके पानी पीएं। प्रेगनेंसी के दौरान खून का बहाव तेजी से होता है। पानी शरीर के विभिन्न अंगों की कार्यप्रणाली को दुरुस्त रखेगा। नारियल पानी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। जिस दिन आपको पता चले कि आप प्रेगनेंट है, उस दिन से नारियल पानी पीना शुरू कर दें। नारियल पानी में ऐसे पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, जो आपके शरीर को ठंडा रखेगा। साथ ही इसमें कुछ ऐसे भी तत्व होते हैं जिसमें बड़ी मात्रा में एंटी-एजिंग इफैक्ट होता है। नारियल का पानी चूंकि ठंडा होता है, इसलिए यह मुहांसों को भी रोकता है। और तौ और, यह गर्भाशय को भी मजबूत बनाता है।

नेचुरल मास्क
केमिकल मास्क या क्रीम आपकी त्वचा द्वारा अवशोषित हो सकती है, जो आपके होने वाले बच्चे के लिए कतई अच्छा नहीं होगा। इसलिए जहां तक हो सके नेचुरल रहें। चेहरे की काली धारियों को हटाने के लिए उन पर नीम का पेस्ट लगाएं।

आहार
जहां तक हो सके मसालेदार भोजन न खाएं। मसाले से न सिर्फ मुहांसे को बढ़ावा मिलता है, बल्कि एसिडिटी की समस्या भी होती है।



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