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डिलीवरी के बाद क्यूं खिलाएं जाते है मां को गौंद के लड्डू, सर्दियों में भी करता है फायदा
हम जब कभी भी प्रेगनेंसी की बात करते हैं तो सबसे पहले दिमाग में उन 9 महीनें और उस दौरान ली जाने वाली डाइट के बारे में सोचने लग जाते है। ये जीवन का बहुत ही अहम पड़ाव होता है जिसे हम नजरअंदाज नहीं कर पाते हैं। मां बनना आसान नहीं होता है डिलीवरी के बाद एक नई मां का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। इस समय उन्हें अच्छी देखभाल के साथ पौष्टिक डाइट की भी जरुरत होती है।
हमारे देश में डिलीवरी के बाद नई मांओं को कुछ निश्चित तरह का आहार खिलाया जाता है ताकि डिलीवरी के 40 दिनों के अंदर उनकी शरीर में ताकत आने के साथ उन्हें पोषण मिल सकें। इन्हीं सुपरफूड में से एक होता है, गोंद का लड्डू।

होती है इसमें बहुत कैलोरिज
गोंद, देसी घी, चीनी, किशमिश और कई तरह के ड्रायफ्रूट्स से बनें इस लड्डू में बहुत मात्रा में कैलोरिज होती हैं। दरअसल इन लड्डूओं में जानकर कैलोरीज मिलाई जाती है ताकि मां के जरिए न्यू बॉर्न बेबी को पौष्टिकता मिलें। और माना जाता है कि ये लड्डू डिलीवरी के बाद पौष्टिकता देने के साथ ही नई मां को जल्द स्वस्थ करता है। हमारे यहां पराम्परा रही है कि सांस या दादी मां इन लड्डूओं को खासतौर पर बनाती हैं। सुश्रुत शास्त्र में भी गोंद के लड्डूओं के फायदों के बारे में पढ़ने को मिलता हैं। उत्तर भारत में डिलीवरी के अलावा सर्दियों में भी बहुत चाव से इस लड्डू को खाया जाता है।

होती है इसमें बहुत कैलोरिज
गोंद, देसी घी, चीनी, किशमिश और कई तरह के ड्रायफ्रूट्स से बनें इस लड्डू में बहुत मात्रा में कैलोरिज होती हैं। दरअसल इन लड्डूओं में जानकर कैलोरीज मिलाई जाती है ताकि मां के जरिए न्यू बॉर्न बेबी को पौष्टिकता मिलें। और माना जाता है कि ये लड्डू डिलीवरी के बाद पौष्टिकता देने के साथ ही नई मां को जल्द स्वस्थ करता है। हमारे यहां पराम्परा रही है कि सांस या दादी मां इन लड्डूओं को खासतौर पर बनाती हैं। सुश्रुत शास्त्र में भी गोंद के लड्डूओं के फायदों के बारे में पढ़ने को मिलता हैं। उत्तर भारत में डिलीवरी के अलावा सर्दियों में भी बहुत चाव से इस लड्डू को खाया जाता है।

स्तनपान कराने वाली मांए ही खाएं
गोंद के लड्डूओं की तासीर गर्म होती है और इन्हें गर्भवती महिलाओं को नहीं खिलाया जा सकता है लेकिन स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए ये बहुत ही फायदेमंद होते हैं। महाराष्ट्र में इसे 'डिंक' और गुजरात में इसे 'गुंडर' लड्डू के नाम से भी जाना जाता है। गोंद में बहुत ही पौष्टिक तत्व पाएं जाते है, ये कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होता है। शिशु के जन्म के बाद महिलाओं की रीढ़ की हड्डी में अत्यधिक दर्द होता है, इसके सेवन से दर्द में राहत मिलती है। यह लड्डू प्रसव के बाद हड्डियों को मजबूत बनाने और कमर दर्द को कम करने में मदद करता है।

शिशु को भी रखता है स्वस्थ
केवल एक गोंद का लड्डू पर्याप्त ऊर्जा प्रदान करता है, गोंद को स्तनो के दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है। इन लड्डुओं के सेवन से ये स्तनपान के माध्यम से शिशु तक पहुंचकर बच्चें को स्वस्थ बनाता है।


इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए खिलाया जाता है
गोंद के लड्डू, जोड़ों को लूब्रिकेंट करने मे मदद करते हैं और कमर दर्द के साथ जोड़ों के अन्य दर्द को कम करते हैं। यह स्तनपान कराने वाली मां के शरीर के पोषण के लिए उन्हें दिया जाता है। ये स्तनपान कराने वाली मांओं को इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए भी खिलाया जाता है।



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