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गर्भावस्था में दर्दनिवारक दवाएं अत्यंत हानिकारक

शोधकर्ताओं का कहना है कि पैरासीटामोल, एस्प्रिन और आईबूप्रोफेन जैसी दवाओं का लम्बे समय तक इस्तेमाल लड़कों में प्रजनन अंगों के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है। 'ह्यूमन रिप्रोडक्शन' जर्नल के मुताबिक करीब 50 प्रतिशत महिलाएं गर्भावस्था के दौरान अक्सर सिरदर्द से निजात पाने के लिए दर्दनिवारक दवाएं लेती हैं।
इन दवाओं के इस्तेमाल से लड़कों में बनने वाले शुक्राणुओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और जीवन के अंतिम दिनों में उन्हें वृषण कैंसर का खतरा हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि हाल के समय में पुरुषों में होने वाली प्रजनन संबंधी विकृतियों की मुख्य वजह दर्दनिवारक दवाएं हैं। इसके अलावा भ्रूण के हार्मोन असंतुलन के सम्पर्क में होने से भी विकृतियां होती हैं।
अध्ययन के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय एक से ज्यादा प्रकार की दर्दनिवारक दवाएं लेने वाली महिलाओं के बेटों में यह खतरा सात गुना तक बढ़ जाता है। चार से छह महीने की गर्भावस्था के दौरान दर्दनिवारक दवाएं लेना सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। इस दौरान केवल एक दर्दनिवारक दवा लेने से भी ये दवाएं न लेने वाली महिलाओं के बच्चों की तुलना में इन महिलाओं के बेटों में ये खतरा दोगुना हो जाता है।
पैरासीटामोल खतरे को दोगुना करती है जबकि एस्प्रिन या आईबूप्रोफेन चार गुना तक खतरा बढ़ा देती है। अध्ययन के मुताबिक चार से छह महीने की गर्भावस्था के दौरान एक साथ दो दर्दनिवारक दवाएं लेने से यह खतरा 16 गुना तक बढ़ जाता है। कोपेनहेगन के रिग्सहॉस्पिटल के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्ययनकर्ता हेनरिक लेफर्स कहते हैं कि दर्दनिवारक दवाएं भ्रूण में हार्मोन के प्रवेश को रोकती हैं।



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