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गर्भावस्था में मसूड़ों की उपेक्षा शिशु के लिए खतरा

मैक्स हेल्थकेयर में वरिष्ठ सलाहकार, दंतचिकित्सक डॉ अजय शर्मा ने कहा आज की महिलाएं पहले की तुलना में गर्भावस्था की जटिलताओं के बारे में अधिक जागरुक हैं लेकिन फिर भी यह ध्यान देना जरूरी है कि इस अवस्था में दांतों और मसूढ़ों की सही देखभाल न होने से न सिर्फ अजन्मे बच्चे के दांतों और मसूढ़ों पर असर पड़ता है बल्कि समय पूर्व प्रसव, जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना और उसके सीखने की क्षमता प्रभावित होने जैसी आशंकाएं रहती हैं।
आईएसआईएस फर्टिलिटी सेंटर की निदेशक डॉ शिवानी सचदेव गौर ने कहा गर्भावस्था के दौरान हार्मोन परिवर्तन के कारण मसूढ़ों और दांतों में कुछ समस्याएं हो सकती हैं और लार भी अधिक बन सकती है। वैसे तो यह समस्या प्रसव के बाद स्वत: ठीक हो जाती है लेकिन गर्भावस्था के दौरान शिशु पर इसका असर न पड़े, इसके लिए सावधानी जरूरी है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ बीना ग्रोवर ने कहा गर्भावस्था में मुंह की जांच करने से कुछ बीमारियों का पता लगाया जा सकता है इसलिए मसूढ़ों और दांतों की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉ बीना ने कहा सच तो यह है कि मुंह की कोशिकाएं और उतक बता सकते हैं कि क्या कोई गंभीर समस्या होने जा रही है। इस दौरान कई महिलाओं को मीठा खाने की इच्छा अधिक होती है। इससे भी बचना चाहिए क्योंकि मुंह की समस्याओं का एक कारण यह भी हो सकता है। डॉ शर्मा ने कहा गर्भावस्था में हार्मोन में परिवर्तन होते हैं जिसकी वजह से मसूढ़ों में जलन होती है और कई बार खून भी आता है। कई महिलाओं को यह समस्या हो जाती है। मसूढ़ों के तंतुओं में सूजन, खून आना, लालिमा को पेरीडेंटल कहा जाता है और इसका कारण संक्रमण होता है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशु का विकास बाधित हो सकता है।



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