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प्रसव पूर्व स्वास्थ्य कार्यक्रम के लाभ
हम सभी सामान्य और आसान प्रसव के लाभों के बारे में जानते हैं। परंतु इस तेज़ रफ़्तार के जीवन में तनाव और व्यायाम की कमी के कारण समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। प्रसवपूर्व स्वास्थ्य कार्यक्रम का विकल्प चुनें जिससे आपके लिए जन्म देने की प्रक्रिया आसान हो जायेगी। इस बारे में अधिक जानने के लिए विभिन्न उपचारों जैसे हिप्नोथेरेपी (सम्मोहन चिकित्सा), चिकित्सा और श्वसन तकनीक तथा योग द्वारा श्रोणि को मज़बूत बनाने वाली कसरतों के बारे पढ़ें।
हिप्नोथेरेपी
हिप्नोसिस एक विशेष मनोवैज्ञानिक मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति अल्पनिद्रा की स्थिति में होता है तथा सामान्य चेतना की स्थिति की तुलना में जागरूकता के एक विशिष्ट स्तर पर कार्य करता है। इस स्थिति में ग्रहणशीलता और जवाबदेही का एक विशेष स्तर होता है जिसमें आमतौर पर बाहरी वास्तविकता को दिए जाने वाले महत्व के स्थान पर आंतरिक अनुभवात्मक धारणा को महत्व दिया जाता है। मानव मस्तिष्क चार स्त्रोतों से संदेश प्राप्त करता है:
- बाहरी वातावरण
- हमारा शरीर
- चेतन मन
- अवचेतन मन

हिप्नोसिस का निर्माण संदेश इकाईयों के अधिभार, हमारे नाज़ुक मस्तिष्क को अव्यवस्थित करके, लड़ाई तंत्र को सक्रिय करके किया जाता है और जिसमें परिणामस्वरूप एक उच्च सम्मोहन स्थिति में पहुंचकर अवचेतन मन तक पहुंचा जा सकता है। कई प्रकार की तकनीकें हैं जिनके द्वारा अवचेतन मन तक पहुंचा जा सकता है। सबसे सुरक्षित और आसान तकनीकें श्वसन तकनीक, मेडिटेशन तकनीक और हिप्नोसिस इंडक्शन तकनीक है।
इसमें महिला को आराम से कुर्सी पर बिठाया जाता है या ज़मीन पर लिटाया दिया जाता। आरामदायक संगीत और मौखिक निर्देशों के द्वारा प्रथम चरण में केवल सांस लेने और छोड़ने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा जाता है। इसके बाद एक तालबद्ध पद्धति में तीन तक गिनकर सांस लेने और तीन तक गिनकर सांस छोड़ने के लिए कहा जाता है। इसके बाद सिर से पैर तक आराम दिया जाता है। इसके बाद कृत्रिम निद्रावस्था तकनीकों के माध्यम से महिला को अवचेतन मन का उपयोग करने में सहायता की जाती है। इसमें सबसे सामान्य तकनीक रिवर्स काउंटिंग (उलटी गिनती) तकनीक है। यहाँ महिला पूरी तरह से सम्मोहित (पूर्ण रूप से चौकस) अवस्था में पहुँच जाती है।
यहाँ हम दिमाग को स्वनियंत्रित निर्देशों पर कार्य करने के लिए प्रोग्राम करते हैं। मां और बच्चे को आपस में जोड़ते हैं। इससे मां और जन्म लेने वाले बच्चे के बीच भावनात्मक संबंध बनाने में सहायता मिलती है। अधिकांश माता पिता इसके बाद काफी राहत महसूस करते हैं। इसके बाद मां को यह महसूस करवाया जाता है कि वह सुरक्षित और स्वस्थ प्रसव पीड़ा से गुज़र रही है और वह आत्मविश्वास से भरी हुई है और बच्चे के जन्म की पीड़ा का सामना आसानी से कर रही है। इस प्रक्रिया के बाद मां स्वनियंत्रित निर्देशों की पुनरावृत्ति करती है तथा फिर मां को सम्मोहन से बाहर लाया जाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी 7 आहार
इस पूरी प्रक्रिया में 40 – 50 मिनिट का समय लगता है। मां को यह तकनीक एक बार सिखाकर तथा दो तीन बार अभ्यास करके वह यह इसे घर पर भी कर सकती है।
मेडिटेशन और श्वसन तकनीक
मेडिटेशन और श्वसन तकनीकें दिमाग, शरीर और आत्मा को जोड़ती हैं। यह बहुत आसान है परंतु इसका प्रभाव बहुत अच्छा होता है। यदि प्रतिदिन कुछ मिनिट तक मेडिटेशन किया जाए तो इसके कई लाब होते हैं जैसे:
तनाव कम करना
एंड्रोफिन्स का उत्पादन करना जिससे शारीरिक दर्द कम हो जाता है।
डी एच ई ए (डिहाइड्रोपिनड्रोस्टेरोंन) का उत्पादन बढ़ने से टी और बी लिम्फोसाइट्स (एक प्रकार की श्वेत रुधिर कोशिकाएं) का उत्पादन बढ़ता है जो आपके प्रतिरक्षा तंत्र को सहायता करता है। डीएचईए से आप आपको अच्छा महसूस करते हैं तथा यह मस्तिषक के जैवरसायन को बढ़ाता है जो जन्म के पूर्व तथा जन्म के बाद आने वाले तनाव और उदासी को कम करता है।
तनाव पैदा करने वाले हार्मोंस जैसे अड्रेनलिन और कोर्टिसोल को कम करता है। ऑक्सीटोसिन प्रसव को आगे बढ़ने में मदद करता है यद्यपि दर्द, तनाव और डर के कारण अड्रेनलिन और कोर्टिसोल का उत्सर्जन होता है।
नींद की गुणवत्ता बढ़ना और मूड अच्छा रखना
1. इससे एंड्रोफिन्स का उत्पादन बढ़ता है जो वास्तव में एक दर्द निवारक है। प्रसव पूर्व आप जितना अधिक मेडिटेशन करेंगे, प्रसव के समय एंड्रोफिन्स का स्तर उतना अधिक होगा।
2. मेडिटेशन से ब्लड प्रेशर (रक्तदाब) और हृदय गति कम होती है जिसके कारण प्रीक्लाम्प्सिया (प्रसव के बाद कोमा में जाने की स्थिति) की संभावना बहुत कम हो जाती है।
यह नकारात्मक भावनाओं को दूर करता है। नकारात्मक भावनाएं अधिक समय तक रहने पर गर्भ में पलने बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है।
मां को सशक्त बनाकर उसके मन से बच्चे के जन्म की प्रक्रिया का भय निकाला जा सकता है। यह सिखाया जाना चाहिए कि प्रत्येक संकुचन एक जैविक माध्यम जिसके द्वारा बच्चा अपनी मां से बात करता है और अपनी मां को बताता है कि वह आ रहा/रही है। प्रत्येक संकुचन का सामना डर से नहीं बल्कि हिम्मत से करना चाहिए जिससे प्रसव सामान्य रूप से हो जाता है।
- इससे मां के शरीर में दूध का उत्पादन बढ़ता है तथा प्रसव के पश्चात होने वाला तनाव नहीं होता।
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राजयोग ध्यान : इस तकनीक में सकारात्मक संगीत के माध्यम से आपका पूरा ध्यान आपकी तीसरी आँख पर एक प्रकाश (परम चेतना) पर केंद्रित किया जाता है।
मंत्र मेडिटेशन : गर्भ में पल रहे बच्चे पर विशेष रूप से तैयार किये गए वैदिक मन्त्रों का बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है तथा यह ऊर्जा गर्भ में बढ़ने वाले बच्चे को स्थानांतरित होती है। इससे बच्चे के लिए एक स्वस्थ वातावरण का निर्माण होता है।
प्रसव पीड़ा के माध्यम से श्वसन
रेचक या लंबी सांस छोड़ना : सांस छोड़ने और गहरी सांस छोड़ने से प्रसव पीड़ा के दौरान बहुत आराम मिलता है। हर 4 सेकण्ड तक गिनकर सांस लें और उससे दुगुने समय तक सांस छोड़ें। प्रसव की प्रथम स्थिति में जब भी संकुचन महसूस हो इस प्रक्रिया को दोहराएँ क्योंकि इस समय गर्भाशय का मुंह खुलता है या फैलता है। इसका एक अन्य विकल्प यह है कि हवा में सांस लें तथा जब सांस छोड़ रहे हों तब “ ॐ” जैसी कोई अच्छी आवाज़ निकालें। आपको मानसिक तौर पर आराम और शांति महसूस होगी।
ब्लोइंग : नाक से सांस लेना और मुंह से निकलना तथा इस संपूर्ण प्रक्रिया को दोहराना बहुत सहायक होता है। सांस को पकड़ कर रखने और ज़ोर से छोड़ने तथा चीज़ों को पकड़कर रखने से तनाव, थकान और असुविधा बढ़ती है। राज़ की बात है कि इसे सामान्य रूप से हो जाने दें।
प्रसव की द्वितीय स्थिति
जब गर्भाशय का मुंह पूरी तरह से फ़ैल जाता है तो वास्तव में यही समय ज़ोर लगाने का होता है, उसके पहले नहीं। संकुचन आने पर इस प्रकार श्वसन करें, सांस लें, इसे पकड़कर रखें और नीचे की ओर ज़ोर लगायें जैसे आप ज़ोर लगाकर कड़े मल का त्याग कर रहे हों। जब तक संकुचन रहता है तब तक फिर से गहरी सांस लें, उसे पकड़कर रखें तथा जितनी देर तक हो सके नीचे की ओर ज़ोर लगायें। बच्चे को बाहर आने में सहायता करने का यह अवसर हाथ से न जाने दें। यह बहुत अधिक महत्वपूर्ण है कि जब संकुचन गुज़र जाता है तो मां को पूरी तरह से आराम मिलता है तथा वह आराम से सांस ले सकती है। यदि थक जाएँ तो नाक से सांस लेकर मुंह से निकालें। बच्चे के बाहर आने तक इसे जारी रखें।
प्रसव की तृतीय स्थिति
प्लेसेंटा (नाल) की डिलीवरी। सामान्य रूप से सांस लें। सामान्यत: यह 10 – 15 मिनिट में बाहर आकर अलग हो जाता है। इस दौरान कुछ संकुचन महसूस होता है क्योंकि बच्चा निकलने के बाद प्लेसेंटा (नाल) भी बाहर निकल आता है।
- सांस लेते समय स्ट्रेच करें।
- ऐसा आसन जिसमें पेट पर दबाव पड़े उसे पूरी तरह से टालना चाहिए।
- अंत में आराम करना महत्वपूर्ण है।



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