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जहरीली स्मॉग से बचे प्रेगनेंसी में, वरना मां और भ्रूण की सांसो में घोल देगा जहर
दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते वायुप्रदूषण की वजह से कई लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसके चलते लोगों को श्वसन संबंधी समस्याएं हो रही है। लेकिन इस समय इस प्रदूषण से सबसे ज्यादा समस्या गर्भवती महिलाओं को हो सकती है। क्योंकि ये मां और बच्चें और दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इस जहरीली स्मॉग से गर्भवती महिलाओं की सेहत पर बुरा असर पड़ता है।
दिल्ली और इसके आस पास के इलाकों में इन दिनों हवा में वायु प्रदूषण का लेवल बढ़ा हुआ है। जाहिर है इसके शरीर में जाने से आपको और शिशु को नुकसान हो सकता है। गर्भावस्था में महिलाओं का इम्युनिटी सिस्टम भी कमजोर होता है जिससे बीमार पड़ने का भी खतरा अधिक होता है। चलिए जानते हैं स्मॉग से किसी प्रेगनेंट महिला की सेहत को कैसे प्रभावित कर सकता है। ऋजुता दिवेकर ने FB पर शेयर किये स्मॉग से बचने के नुस्खे

सांस की बीमारी होने का खतरा
ज्यादा स्मॉग से आपको थकान और बेचैनी हो सकती है। इसके अलावा प्रदूषण आपके फेफड़ों के कामकाज को बाधित कर सकता है। यह वायु मार्ग में जलन , सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी जैसी आदि समस्याएं हो सकती हैं। अगर आप पहले से अस्थमा जैसी किसी बीमारी से पीड़ित हैं, तो आपकी हालत और ज्यादा ख़राब हो सकती है।दिल्ली हुई जहरीली: जानें स्मॉग से कैसे करें खुद और परिवार का बचाव

स्मॉग से बच्चे पर क्या असर हो सकता है?
एक अध्ययन के अनुसार स्मॉग से बच्चों में श्वसन संबंधी प्रभाव पड़ सकता है। यह बच्चों के अंगों पर बुरा असर डाल सकता है जिससे बच्चे को दीर्घकालिक जटिलताएं हो सकती हैं। वायु प्रदूषण से खासकर बच्चों के फेफड़ों के विकास पर ज्यादा बुरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा इससे समय से पहले जन्म और बच्चे का इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होना का भी खतरा होता है। इससे बच्चे के फेफड़ों का कामकाज बाधित हो सकता है, सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं और बचपन में ही अस्थमा होने का भी डर है।

शिशु मुत्यु दर
इसके अलावा फेफड़ों के खराब होने से शिशु मृत्यु दर में भी तेजी हो सकती है। वायु प्रदूषण फेफड़ों को कैसे प्रभावित करता है, यह कारण अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन कई अध्ययन इस बात का दावा करते हैं कि स्मॉग से गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान हो सकता है।

समय से पहले हो सकता है प्रसव
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक जिन गर्भवती महिलाओं को दमे की बीमारी है, उन्हें वायु प्रदूषण के कारण समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ सकता है।
गर्भधारण करने से तीन महीने पहले तक नाइट्रोजन ऑक्साइड के ज़्यादा संपर्क में आने से, दमा से पीड़ित महिलाओं में यह खतरा 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। वहीं, बिना दमा वाली महिलाओं में इसके होने की संभावना आठ प्रतिशत होती है। इतने ही समय के लिए कार्बन मोनोऑक्साइड के संपर्क में आने से दमा पीड़ित महिलाओं में समयपूर्व प्रसव का खतरा 12 प्रतिशत अधिक हो जाता है। जबकि दूसरी महिलाओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

अस्थमा होने का डर
गर्भवती महिलाओं को पहले तीन महीने में अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए। अगर हवा में मौजूद खराब रासायनिक तत्वों का असर भ्रूण तक पहुंच जाता है तो समय पूर्व जन्म संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं और उनका विकास प्रभावित हो सकता है। बच्चों को बाद में अस्थमा की शिकायत हो सकती है। गौर करने वाली बात है कि वायु प्रदूषण का थोड़े वक्त का भी कुप्रभाव दीर्घकालिक असर डाल सकता है।

ऑक्सीजन से पहुंचेगी जहरीली गैस
वायु प्रदूषण के मौजूदा स्तर से गर्भवती महिलाओं को और उनकी कोख में पल रहे बच्चों को काफी जोखिम होता है। दरअसल भ्रूण को ऑक्सीजन का प्रवाह मां से होता है और अगर वह खराब हवा में सांस ले रही है तो अजन्मे बच्चों में जोखिम बढ़ जाता है।



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