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प्रेगनेंसी में आईसीपी, कितना जानते हैं आप इसके बारे में
माँ बनना हर औरत का सपना होता है लेकिन बात अगर शारीरिक तौर पर की जाए तो गर्भधारण करने के बाद पूरे नौ महीने की अवधि किसी भी महिला के लिए सुखद नहीं होती। कई तरह के दर्द और तकलीफों से गुज़रने के बाद स्त्री बच्चे को जन्म देती है।
कुछ परेशानियां ऐसी होती हैं जो गर्भावस्था में बिल्कुल सामान्य होती है और उन्हें लेकर ज़्यादा चिंतित होने की ज़रुरत नहीं होती। वहीं दूसरी ओर कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी होता है ताकि होने वाले बच्चे और माँ पर पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

आज के इस आधुनिक दौर में भी कई लोग अंधविश्वासी होते हैं जो इस तरह की परेशानियों को गर्भावस्था में आम मानते हैं और इसलिए गर्भवती महिलाएं इन बातों पर गौर न करके बहुत बड़ी लापरवाही करती हैं। इसका एक उदाहरण है कि कई महिलाओं को आखिरी तिमाही में बहुत ज़्यादा खुजली की समस्या हो जाती है। अकसर ऐसा कोलेस्टेसिस यानी पित्तस्थिरता के कारण होता है।
यह ऐसी अवस्था होती है जिसमें लीवर में पित्त का प्रवाह रुक जाता है या कम हो जाता है। ऐसे में लीवर प्रभावित होता है और इस कारण से इंट्राहेप्टिक कोलेस्टासिस ऑफ प्रेग्नेंसी (आईसीपी) हो जाता है। यह समस्या महिलाओं को गर्भावस्था के दूसरे या तीसरे तिमाही में हो सकती है।
कई मामलों में यह परेशानी डिलीवरी के कुछ समय बाद खत्म हो जाती है। यह तो गर्भावस्था में होने वाली इस समस्या का सिर्फ एक ही पहलू है। इस लेख के माध्यम से हम गर्भावस्था में आईसीपी के लक्षण और इसके बारे में कुछ और ज़रूरी जानकारियों पर प्रकाश डालेंगे।
आईसीपी क्या है?
गर्भावस्था से जुड़ी इस समस्या को समझने से पहले यह ज़रूरी है कि सबसे पहले हम लीवर की बुनियादी कार्य प्रणाली को समझें। सामान्य अवस्था में लीवर बाइल नामक एंज़ाइम का उत्पादन करता है जिसका प्रथम उद्देश्य वसा को तोड़ना और पाचन प्रक्रिया में मदद करना होता है। लीवर से उत्पाद होने के बाद बाइल गॉल ब्लैडर में जाकर जमा हो जाता है।
जब कोई महिला गर्भावस्था में आईसीपी से पीड़ित होती है तो लीवर में बाइल का उत्पादन धीमा हो जाता है। कुछ गंभीर मामलों में उत्पादन बिल्कुल बंद हो जाता है जिससे लीवर में अपने आप ही एसिड बनना शरू हो जाता है। यह बाइल एसिड नसों को प्रभावित करता है और त्वचा में तेज खुजली होने लगती है।
मेडिकली बात करें तो अगर शरीर में सीरम बाइल एसिड और टोटल बाइल एसिड (टीबीए) 10 माइक्रोमोल या उससे ऊपर है तो स्त्री आईसीपी से पीड़ित है।
यह एक गंभीर समस्या है अगर सही समय पर इसका ठीक से इलाज नहीं कराया गया तो इसके कारण प्री-टर्म लेबर, भ्रूण पर संकट या स्टिल बर्थ का भी खतरा हो सकता है।
इसलिए गर्भवती महिलाओं के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि इसके लक्षणों के बारे में भी उन्हें सही जानकारी रहे ताकि वे सही समय पर अपना इलाज करवा सके।
आईसीपी के लक्षण
1. खुजली
2. जॉन्डिस
3. हल्के रंग का शौच
4. पेट के दाहिने तरफ दर्द
5. थकान और भूख में कमी
खुजली
आईसीपी से जुड़ा यह एक आम लक्षण है हालांकि कई बार यह खुजली पूरे शरीर में होती है तो कुछ मामलों में यह केवल हाथ और पैर में होती है। जो महिलाएं जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली होती हैं उन्हें इस तरह की समस्या अधिक होती है यानी इस अवस्था में खुजली ज़्यादा होती है। कई औरतों को खुजली की समस्या दिन की तुलना में रात के समय अधिक होती है जिससे उनकी नींद भी बाधित होती है।
जॉन्डिस
जॉन्डिस लीवर से जुड़ी एक आम समस्या है। वैसे तो लीवर से जुड़ी कई समस्याएं हैं लेकिन जॉन्डिस आईसीपी का सबसे पहला लक्षण है। पीली आँखें जॉन्डिस जैसी बीमारी का मुख्य लक्षण है। जॉन्डिस उन महिलाओं को हो सकता है जो पहले तिमाही में आईसीपी से पीड़ित हों।
यदि आपके डॉक्टर ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि आपको जॉन्डिस है तो सबसे पहले आप अपने बाइल सेक्रेशन के स्तर की जांच करवाएं। अगर आपको पहले ही पता चल जाए कि आप आईसीपी से पीड़ित हैं तो सही समय पर इलाज करवा कर और बेहतर देखभाल के ज़रिये माँ और बच्चे दोनों को ज़्यादा नुकसान पहुंचने से बचाया जा सकता है।
हल्के रंग का शौच
इस लक्षण से आईसीपी का पता लगाना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि शौच का हल्का या अलग रंग होना इसके कई कारण हो सकते हैं। आपके परिवार, दोस्तों या किसी रिश्तेदार को आईसीपी की समस्या थी तो आप उनसे इस बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।
वैसे तो लीवर से जुड़ी समस्या पिता के परिवार की ओर से ज़्यादा होता है लेकिन अगर बात आईसीपी की करें तो यह परिवार में माता की ओर से आता है। यदि आपके परिवार में पहले भी कई औरतों को आईसीपी हो चुका है तो ऐसे में आपको इसके लक्षणों के बारे में आसानी से पता लग जाएगा।
पेट के दाहिने तरफ दर्द
प्रेगनेंसी में अकसर महिलाओं को शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द की शिकायत होती है इसमें कोई नयी बात नहीं है। वहीं दूसरी ओर पूरे नौ महीने शरीर के कुछ हिस्सों में गर्भवती महिलाओं को दर्द बिल्कुल भी नहीं होता। यदि आपको पेट के दाहिने हिस्से में दर्द की समस्या हो रही है तो ऐसे में फ़ौरन अपने डॉक्टर से सलाह लें।
कई मामलों में यह गॉल ब्लैडर में स्टोन के कारण हो सकता है लेकिन अगर यह समस्या नहीं है तो फिर आप आईसीपी से जूझ रही हैं।
थकान और भूख में कमी
प्रेगनेंसी में यह समस्या भी आम बात होती है जिसके कई अलग अलग कारण हो सकते हैं। इस अवस्था में अकसर महिलाओं को थकावट की समस्या रहती है या फिर कमज़ोरी होती है क्योंकि उनका शरीर एक साथ दो जीवों का भार उठा रहा होता है। अगर आपको यह परेशानी सामान्य से ज़्यादा लगने लगे तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।
इस तरह की समस्या उन महिलाओं को ज़्यादा होती है जिन्हें पिछले 24 महीनों के अंदर जॉन्डिस की शिकायत हुई होती है या फिर लीवर से जुड़ा कोई पुराना रोग हो। जो महिलाएं गर्भधारण करने से पहले शराब का सेवन करती हैं उन महिलाओं को भी इस तरह की समस्या ज़्यादा होती है।



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