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प्रेगनेंसी के दौरान करेला खाना चाहिए या नहीं, दूर करें ये कंफ्यूजन
गर्भावस्था में महिलाएं अपने खानपान को लेकर काफी कॉन्शियस हो जाती है। क्या खाएं और क्या न खाएं, इस बारे में कई गर्भवती महिलाओं को सही जानकारी नहीं होती है। कई महिलाएं गर्भावस्था में करेला खाने को लेकर कंफ्यूज होती है। आइए आपकी कंफ्यूजन दूर कर देते हैं। गर्भावस्था के दौरान करेला का सेवन मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
करेला में फाइबर, कैल्शियम, पोटेशियम, बीटा-केरोटिन और डाइट्री फाइबर होता है जो गर्भ में पल रहे बच्चे और मां दोनों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।

फाइबर की मात्रा अधिक होती है:
करेला में फाइबर उच्च मात्रा में होता है जो जल्दी भूख का अहसास नहीं कराता है। यह हाई-कैलोरी फूड्स और जंक फूड्स की क्रेविंग्स को कम करता है। इसके अलावा यह प्रेग्नेंसी के दौरान आपको मोटे होने से भी बचाता है।

एंटीऑक्सीडेंट होता है
करेला में विटामिन सी होता है जो एंटीऑक्सीडेंट होता है और गर्भवती महिलाओं को हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है। यह गर्भवती महिलाओं के इम्यूनिटी को भी बढ़ाने में भी मदद करता है और इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता है।

बॉवेल मूवमेंट को बेहतर रखता है
करेला पेरिस्टालिसिस को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकता है जो बाद में बॉवेल मूवमेंट को नियंत्रित करने और गर्भवती महिलाओं के पाचन तंत्र को बेहतर करने में मदद करता है। करेला पाचन तंत्र से जुड़ी अन्य समस्याओं से भी राहत प्रदान करता है।

फोलेट उच्च मात्रा में होता है
गर्भवती महिलाओं के लिए फोलेट एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। यह मिनरल्स संभावित न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट को सुरक्षित रखने में मदद करता है। करेला में फोलेट की बहुत अधिक मात्रा होती है। इसमें गर्भवती महिलाओं में इस मिनरल्स की दैनिक आवश्यकता का एक चौथाई हिस्सा है।

भ्रूण का विकास करता है
कुछ खास किस्म के विटामिंस और मिनरल्स का एक बड़ा मुख्य स्रोत होता है। इसमें आयरन, नियासिन, पोटेशियम, पेंटोथेनिक एसिड, जिंक, पाइरोडॉक्सिन, मैग्नीशियम और मैंगनीज शामिल होता हैं। इसे आसानी से सुपर सब्जी कहा जा सकता है क्योंकि यह भ्रूण के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।



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