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प्रेगनेंसी में बाईं तरफ सोना नहीं है जरूरी, स्टडी कहती है ये बात
हम सभी की सोने की एक पसंदीदा पोजीशन होती है लेकिन प्रेगनेंसी में महिलाओं को अपनी इस पसंद से भी समझौता करना पड़ता है। इस समय आपको अपने नहीं बल्कि अपने बच्चे के अनुसार सोना पड़ता है।
लंबे समय से यह धारणा चली आ रही है कि प्रेगनेंसी में बाईं तरफ सोना लाभकारी होता है। कुछ महिलाओं को इस पोजीशन में आराम मिलता है क्योंकि इससे कमर में दर्द नहीं होता।

महिलाओं को प्रेगनेंसी में पेट या पीठ के बल ना सोने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे गर्भाशय के भार से रक्त वाहिकाएं दब सकती हैं। इसका मतलब है कि इस स्थिति में शिशु तक कम खून पहुंचता है और वो अंडरवेट हो सकता है।
हालांकि, ये सच नहीं है। एक नई स्टडी के अनुसार बाईं करवट लेकर सोने से कोई खास फायदा नहीं होता है। यहां तक कि पहली तिमाही में आपके सोने की पोजीशन का नौवें महीने पर कोई असर नहीं पड़ता है।
क्या कहती है स्टडी
उताह की यूनिवर्सिटी में एक नया अध्ययन किया गया था जिसके अनुसार प्रेगनेंसी में मां के सोने की पोजीशन का शिशु की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है।

इसी के साथ शोधकर्ताओं ने 6 महीने तक 9000 गर्भवती महिलाओं के सोने के पैटर्न का विश्लेषण किया। अध्ययन में गर्भावस्था के 30 सप्ताह से पहले की महिलाओं को शामिल नहीं किया गया क्योंकि इस स्टडी में महिलाओं को स्लीपिंग पैटर्न फॉलो करने की सख्त सलाह दी गई थी और पहले 5 से 6 महीने में खास ध्यान दिया जाता है क्योंकि इस समय बच्चे के अंग और मांसपेशियों का विकास होता है।
परिणाम इस आधार पर निकाले गए कि मृत जन्मे बच्चे, हाई ब्लड प्रेशर से संबंधित विकारों या शिशु का आकार छोटा होने का कितना खतरा या इस तरह के मामले थे।
अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं ने दाईं करवट या पीठ के बल सोना ज्यादा पसंद किया उनमें हाई ब्लड प्रेशर, मृत शिशु के जन्म या शिशु का आकार छोटे होने जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बाईं तरफ सोने वाली गर्भवती महिलाओं की तुलना में ज्यादा था।
विशेषज्ञ की मानें तो ऐसा कहा जा सकता है कि 30 सप्ताह की प्रेगनेंसी तक सोने की अलग-अलग पोजीशन ट्राई की जा सकती हैं।
अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है कि आप पीठ के बल सोने या करवट या पोजीशन बदलने से आपके शिशु की सेहत पर कोई असर पड़ेगा। सही और आरामदायक पोजीशन में सोना आपके शिशु के लिए सेहतमंद होगा।



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