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जुड़वा बच्चों में से एक गर्भ में ही हो सकता है गायब, कहीं प्रेग्नेंसी में आपको भी तो नहीं ये बीमारी

अगर अचानक प्रेग्नेंट महिला के पेट में पलने वाले जुड़वा बच्चों में से एक बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो जाए और फिर गर्भ में दो के स्थान पर एक ही बच्चा रह जाए तो आप चौंक सकते हैं कि गर्भ से दूसरा बच्चा आखिर गायब कहा हो गया। दरअसल डॉक्टर इस स्थिति को वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम कहते हैं, जिसमें गर्भ में पलने वाले दो बच्चों मे से एक बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो जाती है और प्रेग्नेंट महिला को पता भी नहीं चल पाता है। आज के समय में इस तरह के मामले कई सामने आने लगे हैं। अमेरिकन प्रेग्नेंसी एसोसिएशन की रिसर्च के मुताबिक वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम को पहली बार 1945 में पहचाना गया था। इसमें भ्रूण के फेटल टिशू अन्य जुड़वां बच्चे को अपने अंदर सोख लेते हैं। आइए इस आर्टिकल के जरिए जानते हैं कि वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम के क्या कारण, लक्षण और बचानव हैं।
वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम का कारण
कई बार महिलाओं के प्रेंग्नेंसी की शुरुआती जांच में जुड़वा बच्चा होने की पुष्टि होती है, लेकिन बाद में एक बच्चा गर्भ में ही गायब हो जाता है। जिस कारण मां दो के स्थान पर सिर्फ एक ही बच्चे को जन्म देती हैं। रिसर्च के मुताबिक शुरुआत में प्रेग्नेंट महिला के गर्भ में दो बच्चे होते हैं, लेकिन गर्भ में खाने, ब्लड और ऑक्सीजन का सही ढ़ग से सप्लाई न मिलने पर या फिर प्रेग्नेंट महिला के ज्यादा तनाव लेने के कारण गर्भ में पल रहे एक बच्चे का विकास रुक जाता है। जिस कारण धीरे-धीरे बच्चा गर्भ में ही नष्ट होने लगता है। जिस बच्चे को सही तरह से ऑक्सीजन ब्लड और फूड सप्लाई होता है वो बच जाता है जबकि दूसरा बच्चा गर्भ में ही नष्ट हो जाता है।
वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम के लक्षण
अमेरिकन प्रेग्नेंसी एसोसिएशन की रिसर्च के अनुसार वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम 30 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है। इस लक्षण में कई बार प्रेग्नेंसी में महिला को हल्की ब्लीडिंग हो सकती है। ऐसे में अगर डॉक्टर आपको जुड़वा बच्चे होने की बात कंफर्म कर दें और इसके बाद आपको पेट में ऐंठन और ब्लीडिंग हो, तो ये इस बात की ओर इशारा है कि आपके गर्भ में एक बच्चे का विकास होना बंद हो गया है। लेकिन ऐसे में आप डरें नहीं तुरंत अपनी गायनोकॉलोजिस्ट से सलाह लें।
वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम का इलाज
अमेरिकन प्रेग्नेंसी एसोसिएशन के मुताबिक प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने के दौरान गर्भ में जुड़वां बच्चों में से किसी एक के खो जाने पर कोई खास चिकित्सा देखभाल जरूरी नहीं है। इस स्थिति में मां के गर्भ से ब्लडिंग होना या धब्बे या पेल्विक दर्द महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत होती है। लेकिन इस स्थित में गर्भ में दूसरे बच्चे की जिंदा रहने की संभावना ज्यादा होती है।
वही दूसरी ओर, अगर गर्भ में एक जुड़वा बच्चा गायब दूसरे या तीसरे महीने में गायब हो जाता है तो आकी प्रेग्नेंसी मुश्किल हो सकती है। क्योंकि इस तरह के गर्भधारण पर दूसरे जुड़वा बच्चे पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में मां समय-समय पर अपनी और गर्भ में पलने वाले बच्चे का चेकअप करवाएं।



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