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Ratan Tata: हर माता-पिता को गांठ बांध लेनी चाहिए रतन टाटा की ये बातें, जिंदगी में ऊंचा मुकाम हासिल करेगा बच्चा
Ratan Tata: रतन टाटा किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आज भी करोड़ों दिलों में अपनी दरियादिली और सादगी की वजह से जिंदा हैं। रतन टाटा को भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपार सम्मान और स्नेह मिला है। उनका जन्म 28 दिसंबर 1937 को मुंबई में हुआ था। रतन टाटा का सादगी भरा स्वभाव, दूरदर्शी सोच और विनम्र व्यवहार हर किसी को प्रभावित करती है। वैसे तो हमसे से अधिकतर लोग रतन जी को एक सफल उद्योगपति के रूप में ज्यादा जानते हैं, मगर वह बच्चों की परवरिश पर भी गहन विचार रखते थे और समय-समय लोगों के बीच अपनी बात साझा कर माता-पिता को सही दिशा दिखाते थे। दरअसल, आज के दौर में ज्यादातर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे बड़े होकर केवल सफल न हो, बल्कि अमीर और एक नामी पहचान बनाएं। लेकिन रतन टाटा जी का मानना था कि सफलता का मतलब सिर्फ पैसा नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों को ऐसी परवरिश और शिक्षा मिलनी चाहिए, जो उन्हें एक अच्छा इंसान और अच्छे व्यक्तित्व वाला नागरिक बनाए। आइए, आज रतन टाटा के जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनकी कुछ ऐसी पेरेंटिंग टिप्स, जो हर माता-पिता को अपनानी चाहिए।

शिक्षा का उद्देश्य खुशहाल जीवन हो
रतन टाटा का कहना था कि आपको अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा जरूर दिलानी चाहिए, लेकिन सिर्फ धन कमाना इसका लक्ष्य कभी नहीं होना चाहिए। बच्चे की शिक्षा का असल उद्देश्य होना चाहिए जीवन में सही और गलत के बीच की रेखा को साफ देख पाना और हर परिस्थिति में खुश रहना। जब बच्चे खुद से संतुष्ट और खुश रहना सीख जाते हैं, तो वे चीजों की अहमियत समझते हैं, केवल उनकी कीमत नहीं।
निर्णय लेने दें
रतन टाटा जी का मानना था कि सही फैसले के इंतजार में समय बर्बाद करना ठीक नहीं। माता-पिता को बच्चे को निर्णय लेने देने की स्वतंत्रता देनी चाहिए, ताकि वह उससे कुछ सीखें और फिर मेहनत व समझदारी से उसे अपने निर्णयों को सही दिशा में ले जाएं। रतन टाटा जी का कहना था कि माता-पिता को बच्चों को डराने के बजाय उन्हें फैसले लेने का आत्मविश्वास देने का प्रयास करना चाहिए।
अवसर पहचानने की आदत डालें
तन टाटा जी का मानना था कि हर व्यक्ति की अपनी खास क्षमता होती है। माता-पिता को बच्चों को हर क्षेत्र में एक साथ धकेलने के बजाय उनकी रुचि और योग्यता को पहचान कर सही दिशा देनी चाहिए। जब बच्चा एक ही क्षेत्र में अपना समय देता है और फोकस करता है, तो उसमें वह महारत हासिल कर लेता है, जो उसकी स्किल का हिस्सा बन जाती है।
जीवन के उतार-चढ़ाव से न डराएं
कम अंक आना या असफल होना हर मनुष्य के जीवन का हिस्सा है। रतन टाटा जी का कहना था कि माता-पिता को बच्चों को समझाना चाहिए कि कठिन समय जीवन में आता ही है, जो कि जीवन का एक जरूरी हिस्सा है। बिना उतार-चढ़ाव वाला जीवन ठहरा हुआ होता है और आपको एक ही जगह ठहरने पर विवश करता है, इसलिए इन उतार-चढ़ाव से डरने की जगह मजबूती से उसका सामना करें।



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