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Parenting Tips: बच्चों को बनाना है संस्कारी! इस तरह करें परवरिश, हर कोई बोलेगा वाह बच्चे हों तो ऐसे
Make Child Well Behaved And Cultured: आज की तेज रफ्तार और डिजिटल दुनिया में बच्चों को अच्छे संस्कार देना किसी चुनौती से कम नहीं है। माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे न सिर्फ पढ़ाई में अच्छे हों, बल्कि व्यवहार में भी सभ्य, विनम्र और जिम्मेदार बनें। पर सवाल उठता है बच्चों को संस्कारी कैसे बनाएं? क्या सिर्फ स्कूल या किताबें उन्हें यह सिखा सकती हैं? नहीं ऐसा नहीं है दरअसल यह शुरुआत घर से होती है, और सबसे पहले मां-बाप को ही उदाहरण बनना होता है।
अगर आप चाहते हैं कि लोग आपके बच्चे की तारीफ करें और कहें वाह! कैसे संस्कारी और समझदार बच्चे हैं तो नीचे दिए गए पेरेंटिंग टिप्स आपके बहुत काम के हैं।

1. संस्कार की पहली पाठशाला घर होता है
हमेशा सुना है कि बच्चे का पहला स्कूल उसका घर होता है। बच्चा जैसा माहौल घर में देखता है, वही उसकी नींव बनाता है। घर में बड़ों का सम्मान, सच बोलना, समय पर खाना और सोना ये सब बातें बिना कहे भी बच्चे सीखते हैं। इसलिए हर दिन खुद को एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करें।
2. 'प्लीज', 'सॉरी', 'धन्यवाद' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करें
सामान्य शिष्टाचार की बातें जैसे "प्लीज", "थैंक यू", और "सॉरी" सिखाना बहुत जरूरी है। ये शब्द उनके आत्म-सम्मान को बढ़ाते हैं और दूसरों के प्रति सम्मान भी दर्शाते हैं। पेरेंट्स को अपने घर में भी इन शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि बच्चों को इनका महत्व समझ आए।

3. कहानियों से दें नैतिक शिक्षा
हर बच्चे को कहानियां सुनना बहुत पसंद होता है। ऐसे में उन्हें बचपन से ही रामायण, महाभारत, पंचतंत्र या फिर छोटे-छोटे नैतिक उपदेश वाली कहानियां सुनाएं। ये बच्चों के दिमाग में संस्कार गहराई से बैठाती हैं। हर रात सोने से पहले एक अच्छी कहानी सुनाना आदत बनाएं।
4. धार्मिक या सांस्कृतिक जुड़ाव
बच्चों को मंदिर ले जाएं, पूजा में शामिल करें, या कोई पर्व मनाते समय उन्हें उसकी कहानी बताएं। ये अनुभव उन्हें जड़ों से जोड़े रखते हैं।
5. सेवा और करुणा की भावना विकसित करें
बच्चों को छोटे-छोटे काम जैसे गरीबों को खाना देना, किसी बीमार की मदद करना या जानवरों से प्यार करना सिखाएं। इससे उनमें दया और सहानुभूति विकसित होती है।

6. मोबाइल-स्क्रीन से सीमित जुड़ाव
हर वक्त मोबाइल में उलझे रहने वाले बच्चे सामाजिक व्यवहार से दूर हो जाते हैं। स्क्रीन टाइम सीमित करें और बच्चों को आउटडोर एक्टिविटी या पारिवारिक बातचीत में शामिल करें।
7. उनकी बात सुनें, डांटे नहीं
बच्चों की भावनाओं को समझें। उन्हें डांटने से ज्यादा असर आपकी विनम्र बातों का होता है। बच्चे अगर कुछ गलत भी करें तो पहले उन्हें सुनें, फिर समझाएं।
8. हर अच्छे काम की सराहना करें
अगर बच्चा किसी बुजुर्ग को पानी देता है, या खुद से होमवर्क करता है उसकी तारीफ करें। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह उसी व्यवहार को दोहराएगा।

9. हर दिन थोड़ी देर 'पेरेंटिंग टाइम'
दिन में कम से कम 20 मिनट का समय बच्चों के साथ जरूर बिताएं बात करें, खेलें या बस साथ बैठें। यह समय उनके लिए अनमोल होता है और संबंधों को मजबूत करता है।
10. खुद वही बनें जो आप सिखाना चाहते हैं
आप जैसा व्यवहार करेंगे, बच्चा वैसा ही सीखेगा। अगर आप सच बोलते हैं, विनम्र रहते हैं, समय का पालन करते हैं बच्चा बिना कहे ही वो सब सीख जाएगा।



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