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क्या है AFP? बिल्कुल पोलियो जैसे नजर आते हैं लक्षण, डॉक्टर से जानें इस दुलर्भ बीमारी की वजह और इलाज
What is Acute flaccid paralysis : भारत में अलग-अलग जगह से दो पोलियों के संदिग्ध मामले सामने आए है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। यह मामला मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स जिले के एक दूरदराज गांव का है, जहां दो साल के एक बच्चे में पोलियो के लक्षण पाए गए हैं। इस बच्चे का इलाज असम के गोलपारा जिले के एक अस्पताल में चल रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 18 माह की बच्ची में पोलियो जैसे लक्षण पाए जाने की खबर सामने आई है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि बच्ची पूरी तरह से वैक्सीनेटेड हैं।
अब इन दो नए मामले के सामने आने के बाद, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने तुरंत अलर्ट जारी किया है। साथ ही, WHO ने दोनों मामलों में निगरानी रखने को कहा हैं और पोलियो के नए मामले को फैलने से रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया है। हालांकि एक्सपर्ट का कहना हैं कि गाजियाबाद के मामले में ये पोलियो नहीं बल्कि इससे मिलती जुलती बीमारी AFP का मामला है। हर साल इस बीमारी के मामले सामने आते हैं। जिसके बाद एतिहायत के तौर पर डब्लूएचओ को रिपोर्ट करना होता है। आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में डिटेल में-

क्या कहते हैं डॉक्टर?
पेंगुइन पीड्रियटि्क केयर जयपुर, के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विवेक शर्मा बताते हैं कि देश से पोलियो को खत्म हुए 15 साल हो चुके हैं। हालांकि पोलियो जैसे मिलते-जुलते लक्षणों वाले बच्चे हर साल मिलते हैं। जो चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता बढा देता हैं। हर साल देशभर में एक्यूट फ्लेसिड पैरालिसिस (AFP) के सैकड़ों मामले सामने आते हैं। इस तरह के मामलों में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए डब्ल्यूएचओ को रिपोर्टिंग करना जरूरी होता है। जिसमें बच्चे को आइसोलेटेड रखकर उसे 90 दिन तक मॉनिटर किया जाता है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट पर ही स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करता है
AFP के लक्षण
अचानक जब शरीर का कोई अंग ढीला हो जाए यानी किसी अंग में कमजोरी दिख तो उसे एक्यूट फ्लेसिड पैरालिसिस कहा जाता है। यह कई बार अपने आप हो जाता है तो कई बार सिर या पीठ पर चोट लगने के कारण होता। एक्यूट फ्लेसिड पैरालिसिस (AFP) से टांग या बाजू जब ढीले या कमजोर होते हैं तो यह पोलियो जैसा नजर आता है। इलाज से एक्यूट फ्लेसिड पैरालिसिस ठीक हो जाता है। इसमें हाथ-पैरों में तेजी से कमज़ोरी का तेज़ी से आना, सांस लेने और खाना खाने में कमजोरी होना। चलते-चलते लड़खड़ा कर गिर जाना।
APF की वजह
एक्यूट फ्लेसिड पैरालिसिस ( (एएफपी) एक सिंड्रोम है जिसके होने के पीछे कई संक्रामक और गैर-संक्रामक कारण हो सकते हैं जो बच्चों में तेजी से कमजोरी और लकवा का कारण बनते हैं। कई दूसरे एंटरोवायरस का समूह जब बच्चों पर अटैक करता है, तो एक्यूट फ्लेसिड पैरालिसिस की समस्या हो सकती है। इसके अलावा 5 साल से छोटे बच्चों में विटामिन-डी की कमी होने के साथ ही अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। ऐसे बच्चे सही उपचार मिलने के बाद स्वस्थ हो जाते हैं।
2011 में आया था आखिरी मामला
देश में आखिरी बार 2011 में पोलियो का मामला दर्ज हुआ था। इस बीमारी को जड से खत्म करने के लिए भारत सरकार ने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया था। पोलियो एक वायरस है जो बच्चों की इम्यूनिटी को नष्ट कर उनमें गंभीर विकलांगता का कारण बनता है। इसका कोई इलाज नहीं है, इसलिए टीकाकरण ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। भारत ने 2014 में खुद को पोलियो मुक्त घोषित कर दिया था।
कब तक लगता है पोलियो का टीका
पोलियो का टीका बच्चों को जन्म से लेकर 5 साल की उम्र तक दिया जाता है। भारत में, पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चे को जन्म के समय, 6 सप्ताह, 10 सप्ताह, और 14 सप्ताह की उम्र में पोलियो की खुराकें दी जाती हैं। इसके बाद, 9 महीने से 1 साल की उम्र के बीच बूस्टर खुराक दी जाती है। साथ ही, 5 साल की उम्र तक बच्चों को नियमित रूप से "पल्स पोलियो अभियान" के दौरान अतिरिक्त खुराकें दी जाती हैं। इन खुराकों से बच्चों को पोलियो से सेफ जाता है और उनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है।



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