Latest Updates
-
Meat Lentil Combo Dal Gosht Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा स्वाद -
किस समय जन्मा बच्चा होता है भाग्यशाली? टाइम ऑफ बर्थ से जानें कितना लकी है आपका बेबी -
Crispy Corn Snack Makki Tikki Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसी कुरकुरी टिक्की -
क्या E20 पेट्रोल मीठा होता है? जानें सिक्किम के वायरल वीडियो में पेट्रोल टैंक पर क्यों टूट पड़ीं चींटियां -
प्रेग्नेंसी में आम खाना चाहिए या नहीं? जानें इसके फायदे, नुकसान और खाने का सही तरीका -
Telegram Ban in India: NEET परीक्षा से पहले सरकार ने क्यों उठाया यह बड़ा कदम? जानें फायदे और नुकसान -
Chef's Secret Method Chicken Biryani Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी लजीज बिरयानी -
Muharram 2026: मुहर्रम कब है? 16 या 17 जून, जानें भारत में कब दिखेगा नया चांद और क्या है इसका महत्व -
सांतवा बड़ा मंगल आज: हनुमान जी की कृपा पाने के लिए तुरंत करें ये 5 महाउपाय, दूर होंगे सभी संकट और कर्ज -
International Day of Family Remittances 2026: आज के दिन क्यों मनाते है अंतर्राष्ट्रीय पारिवारिक प्रेषण दिवस
कब शारीरिक संबंध बनाने चाहिए और कब नहीं, आयुर्वेद ने बताए हैं सहवास से जुड़े ये नियम
Physical intimacy Rules According to Ayurveda : आज के मॉर्डन युग में भी लोग यौन संबंधों यानी सेक्स पर खुलकर बात करने से कतराते हैं, लेकिन प्राचीन समय में सेक्स को प्राकृतिक और धार्मिक कार्यों में से एक माना जाता था। प्राचीन नियमों के अनुसार सहवास से वंशवृद्धि, मैत्रीलाभ, साहचर्य सुख, मानसिक रूप
से परिपक्वता, दीर्घायु, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुख की प्राप्ति हासिल की जा सकती है। अगर व्यक्ति आयुर्वेद के बताए नियमों के अनुसार संभोग करता है, तो वह कभी बीमार नहीं पड़ता है और संभोग के बाद उत्पन्न हुई संतान भी कई गुणों में दक्ष होती है।

आज के जमाने में उन नियमों को भूला दिया गया है। सेक्स अब आनंद का जरिया बनकर रह है। मगर प्राचीन काल में इसे काम वासना नहीं बल्कि एक दायित्व और प्रेम की भावना समझा जाता था। जो पति और पत्नी की रिश्तों को सुदृढ़ करता था। अगर आप भी एक हेल्दी सेक्स लाइफ और वैवाहिक जीवन में मिठास चाहते हैं, तो आयुर्वेद में बताए गए इन नियमों का पालन करें।
पहला नियम : इन दिनों शारीरिक संबध बनाने से करें परहेज
शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे दिन भी हैं जिस दिन पति-पत्नी को किसी भी रूप में शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए, जैसे अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्थी, अष्टमी, रविवार, संक्रांति, संधिकाल, श्राद्ध पक्ष, नवरात्रि, श्रावण मास और ऋतुकाल आदि में स्त्री और पुरुष को एक-दूसरे से दूर ही रहना चाहिए। इस नियम का पालन करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और आपसी प्रेम-सहयोग बना रहना है अन्यथा गृहकलह और धन की हानि के साथ ही व्यक्ति आकस्मिक घटनाओं को आमंत्रित कर लेता है।
दूसरा नियम: कौनसा समय होता है संबंध बनाने के लिए श्रेष्ठ
शारीरिक संबंध बनाने के लिए रतिक्रिया यानी शारीरिक संबंध बनाने के लिए रात के समय को श्रेष्ठ माना गया है। इस समय संबंध बनाने से सात्विक, दीघार्य, यशस्वी, गुणवान, अनुशासित, संस्कारवान, धर्म प्रवृति का अनुसरण करने वाली संतान की उत्पति होती है।
तीसरा नियम: इन स्थितियों में नहीं बनाएं संबंध
आयुर्वेद के अनुसार स्त्री के मासिक धर्म के दौरान अथवा किसी रोग या संक्रमण के दौरान सेक्स नहीं करना चाहिए। यौन संबंध बनाने से पहले और बाद में कुछ स्वच्छता नियमों का पालन करना चाहिए। इससे इंफेक्शन या बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाव होता है। सहवास से पहले शौच से निवृत्त हो जाएं। सहवास के बाद जननांगों को अच्छे से साफ करें और स्नान करें।
चौथा नियम: किन जगह नहीं बनाना चाहिए संबध
शास्त्रों में बताया कि किन जगह पर संबंध बनाने से परहेज करना चाहिए? पवित्र माने जाने वाले वृक्षों के नीचे, सार्वजनिक स्थानों, चौराहों, उद्यान, श्मशान घाट, वध स्थल, औषधालय, मंदिर, ब्राह्मण, गुरु और अध्यापक के निवास स्थान में संभोग नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो शास्त्रानुसार उसको इसका बुरा परिणाम भुगतना पड़ता है।

पांचवा नियम: गर्भ ठहरने के बाद न करें सेक्स
किसी भी पुरुष को अपनी पत्नी के साथ गर्भकाल के दौरान सहवास नहीं करना चाहिए। गर्भकाल में संभोगरत होते हैं, तो भावी संतान के अपंग और रोगी पैदा होने का खतरा बना रहता है। हालांकि कुछ शास्त्रों के अनुसार 2 या 3 माह तक सहवास किए जाने का उल्लेख मिलता है लेकिन गर्भ ठहरने के बाद सहवास ना हीं किया जाए तो ही उचित है।
छठा नियम: महिलाओं के लिए सेक्स एजुकेशन जरुरी
वात्सायन के अनुसार सभी स्त्री को विवाह से पहले पिता के घर में और विवाह के पश्चा्त पति की अनुमति से कामशास्त्र की शिक्षा अवश्य लेनी चाहिए। इससे दांपत्य जीवन में स्थिरता बनी रहती है और पति अन्य स्त्रियों की ओर आकर्षित नहीं हो पाता। इसलिए स्त्रियों को यौनक्रिया का ज्ञान होना आवश्यक है ताकि वह काम कला में निपुण हो सके और पति को अपने प्रेमपाश में बांधकर रख सके। साथ ही आचार्य वात्सायन बताते है की स्त्रियों को अपने किसी विश्वसनीय दाई,विवाहिता सखी, हम उम्र मौसी या बड़ी बहन, ननद या भाभी जिसे संभोग का आनंद प्राप्त हो चुका हो आदि से बिना बेझिझक होकर सहवास की शिक्षा लेनी चाहिए।।
सातवां नियम: बेस्ट पॉजीशन क्या है?
आयुर्वेद के अनुसार, एक आदर्श सेक्स पोजीशन वह है जहां महिला अपना चेहरा ऊपर की ओर करके लेटी हो। इस पॉजीशन में पुरुष और स्त्री दोनों ही सेक्स का भरपूर मजा ले पाते है।



Click it and Unblock the Notifications